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मलेरिया का हर रोज एक शिकार
bhiwani
Updated Sun, 20 Jul 2014 12:30 AM IST
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मलेरिया का हर रोज एक शिकार
बरसात का मौसम शुरू होते ही मच्छर का डंक भी भयानक होने लगा है। हालात ये है कि औसतन हर रोज मलेरिया केस का मामला सामने आ रहा है। मई माह से अब तक 92 मलेरिया पीड़ित मरीज सामने आ चुके हैं। इस वर्ष अब तक सरकारी रिकॉर्ड में 123 मलेरिया मरीजों का नाम दर्ज हो चुका है।
यह तो सरकारी आंकड़ा है। अधिकतर मरीज प्राइवेट अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में यह संख्या दोगुने तक भी जा सकती है। बरसाती मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने ठहरे हुए पानी में टेमीटोज नामक दवा का छिड़काव शुरू किया है।
धनाना-भिवानी में हालात सबसे गंभीर
हर वर्ष धनाना, भिवानी, मानहेरू, बौंद, मानकावास में हालात गंभीर रहते हैं। इस वर्ष सामने आए 123 मरीजों में भी अधिकतर भिवानी और धनाना से ही हैं। विभाग ने भी मरीजाें की अधिक संख्या के चलते उक्त पांच क्षेत्रों को ही संवेदनशील माना है।
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पिछले वर्ष की तुलना में हालात ठीक
वर्ष 2013 के शुरुआती 15 जुलाई तक करीब 329 मरीज पॉजिटिव पाए गए थे। इस बार अब तक 123 ही मामले सामने आए हैं। इससे देखने से लगता है कि हालात काबू में है। मगर सच्चाई यह भी है कि अधिकतर मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना बेहतर समझते हैं। ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों का रिकॉर्ड नहीं होने से मलेरिया मरीजों का पूरा रिकॉर्ड साफ-साफ नहीं है।
2011 में आए थे 3661 मरीज
मलेरिया बीमारी कई दफा गंभीर बन जाती है और जानलेवा भी साबित हो सकती है। वर्ष 2011 में 3661 मलेरिया मरीज सामने आए थे। विभाग को चिंता सता रही है कि तब जैसे हालात न बन जाए।
लारवा खत्म करना आसान, मच्छर नहीं
मच्छर का लारवा खत्म किया जा सकता है लेकिन मच्छर बनने के बाद उसे खत्म करना बेहद मुश्किल है। यह बात स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मानते हैं। इसलिए मच्छरों का लारवा खत्म करने पर जोर है। इसी कड़ी में जहां गांवों के तालाबों में गंबूझिया मछली छोड़ी जा रही है वहीं थोड़ी जगह में जमा पानी पर टेमीटोज नामक दवा डलवाई जा रही है ताकि मच्छर का लारवा खत्म किया जा सके। विभाग की माने तो फॉगिंग भी मच्छरों की रोकथाम में पूरी तरह कारगर नहीं है। नियमित स्प्रे पर रोक है। इससे मच्छरों को खत्म किया जा सकता है। ऐसे में अगर मलेरिया से बचाव करना है और मच्छरों की रोकथाम करनी है तो लोगों को स्वयं ही अलर्ट होना होगा।
मलेरिया के लक्षण
- तेज बुखार होना
- तेज सिर दर्द होना
- अचानक सर्दी लगकर तेज बुखार होना और फिर उतर जाना, बार-बार बुखार होना
- कमजोरी महसूस होना
उपाय
- मलेरिया रोगी का तुरंत चिकित्सक से उपचार कराना चाहिए
- घर के आसपास खाली कूलर, मटकाें, खराब टंकी, नालियों में पानी ना ठहरने दें
- यदि मकान के आसपास कही पानी जमा है तो उसमें मिट्टी का तेल, खराब मोबिल, काला तेल डालना चाहिए
- घर में मच्छरों की रोकथाम के मच्छर मारने या भगाने की दवाइयों का प्रयोग करना चाहिए
कब कितने आए मलेरिया केस
वर्ष मलेरिया केस
2005 1615
2006 1844
2007 2374
2008 2660
2009 2707
2010 1335
2011 3661
2012 2602
2013 953
2014 123
(जनवरी से 15 जुलाई तक)
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बरसात का मौसम शुरू होते ही मच्छर का डंक भी भयानक होने लगा है। हालात ये है कि औसतन हर रोज मलेरिया केस का मामला सामने आ रहा है। मई माह से अब तक 92 मलेरिया पीड़ित मरीज सामने आ चुके हैं। इस वर्ष अब तक सरकारी रिकॉर्ड में 123 मलेरिया मरीजों का नाम दर्ज हो चुका है।
यह तो सरकारी आंकड़ा है। अधिकतर मरीज प्राइवेट अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में यह संख्या दोगुने तक भी जा सकती है। बरसाती मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने ठहरे हुए पानी में टेमीटोज नामक दवा का छिड़काव शुरू किया है।
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धनाना-भिवानी में हालात सबसे गंभीर
हर वर्ष धनाना, भिवानी, मानहेरू, बौंद, मानकावास में हालात गंभीर रहते हैं। इस वर्ष सामने आए 123 मरीजों में भी अधिकतर भिवानी और धनाना से ही हैं। विभाग ने भी मरीजाें की अधिक संख्या के चलते उक्त पांच क्षेत्रों को ही संवेदनशील माना है।
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पिछले वर्ष की तुलना में हालात ठीक
वर्ष 2013 के शुरुआती 15 जुलाई तक करीब 329 मरीज पॉजिटिव पाए गए थे। इस बार अब तक 123 ही मामले सामने आए हैं। इससे देखने से लगता है कि हालात काबू में है। मगर सच्चाई यह भी है कि अधिकतर मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना बेहतर समझते हैं। ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों का रिकॉर्ड नहीं होने से मलेरिया मरीजों का पूरा रिकॉर्ड साफ-साफ नहीं है।
2011 में आए थे 3661 मरीज
मलेरिया बीमारी कई दफा गंभीर बन जाती है और जानलेवा भी साबित हो सकती है। वर्ष 2011 में 3661 मलेरिया मरीज सामने आए थे। विभाग को चिंता सता रही है कि तब जैसे हालात न बन जाए।
लारवा खत्म करना आसान, मच्छर नहीं
मच्छर का लारवा खत्म किया जा सकता है लेकिन मच्छर बनने के बाद उसे खत्म करना बेहद मुश्किल है। यह बात स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मानते हैं। इसलिए मच्छरों का लारवा खत्म करने पर जोर है। इसी कड़ी में जहां गांवों के तालाबों में गंबूझिया मछली छोड़ी जा रही है वहीं थोड़ी जगह में जमा पानी पर टेमीटोज नामक दवा डलवाई जा रही है ताकि मच्छर का लारवा खत्म किया जा सके। विभाग की माने तो फॉगिंग भी मच्छरों की रोकथाम में पूरी तरह कारगर नहीं है। नियमित स्प्रे पर रोक है। इससे मच्छरों को खत्म किया जा सकता है। ऐसे में अगर मलेरिया से बचाव करना है और मच्छरों की रोकथाम करनी है तो लोगों को स्वयं ही अलर्ट होना होगा।
मलेरिया के लक्षण
- तेज बुखार होना
- तेज सिर दर्द होना
- अचानक सर्दी लगकर तेज बुखार होना और फिर उतर जाना, बार-बार बुखार होना
- कमजोरी महसूस होना
उपाय
- मलेरिया रोगी का तुरंत चिकित्सक से उपचार कराना चाहिए
- घर के आसपास खाली कूलर, मटकाें, खराब टंकी, नालियों में पानी ना ठहरने दें
- यदि मकान के आसपास कही पानी जमा है तो उसमें मिट्टी का तेल, खराब मोबिल, काला तेल डालना चाहिए
- घर में मच्छरों की रोकथाम के मच्छर मारने या भगाने की दवाइयों का प्रयोग करना चाहिए
कब कितने आए मलेरिया केस
वर्ष मलेरिया केस
2005 1615
2006 1844
2007 2374
2008 2660
2009 2707
2010 1335
2011 3661
2012 2602
2013 953
2014 123
(जनवरी से 15 जुलाई तक)