फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   A two-acre pond will be built for irrigation in the dry area at a cost of Rs 1.90 crore.

Bhiwani News: सूखे इलाके में सिंचाई के लिए 1.90 करोड़ से बनेगा दो एकड़ में तालाब

Fri, 27 Feb 2026 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 27 Feb 2026 01:55 AM IST
विज्ञापन
A two-acre pond will be built for irrigation in the dry area at a cost of Rs 1.90 crore.
जूई नहर। 
भिवानी। अब सूखाग्रस्त इलाके में भूमि की प्यास बुझाने के लिए सिंचाई विभाग 1.90 करोड़ रुपये की लागत से करीब दो एकड़ पंचायती भूमि पर तालाब का निर्माण कराएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग की जूई डिविजन ने कार्यों के टेंडर लगाए हैं। करीब 15 से 20 दिन में तालाब निर्माण का काम भी शुरू हो जाएगा। तालाब का निर्माण सिंचाई विभाग की सूखाग्रस्त क्षेत्र में भूमिगत जल में सुधार और किसानों के लिए जल संचय की महत्वाकांक्षी योजना हैं।
विज्ञापन

सिंचाई विभाग ने जिले के गांव भांखड़ा में दो एकड़ पंचायती भूमि पर तालाब निर्माण का खाका तैयार किया था। जिस पर अब सिंचाई विभाग को बजट मंजूरी मिलने पर कार्यों के टेंडर लगाए गए हैं। करीब दो एकड़ में बनने वाले इस तालाब को इलाके की जीवन रेखा माने जाने वाली चौधरी बंसीलाल कैनाल (जूई नहर) से पाइप लाइन के जरिए जोड़ा जाएगा। कैनाल में जब भी नहरी पानी आएगा। इस दौरान पाइप लाइन के जरिए करीब दो एकड़ के इस तालाब में अतिरिक्त पानी का संचय किया जाएगा। यह तालाब तलहटी में कच्चा रहेगा, ताकि इस तालाब का पानी भूमिगत जल स्तर को सुधार सके।
विज्ञापन

बता दें कि भिवानी जिला के तोशाम, बहल, लोहारू, सिवानी और कैरू खंड के अधिकांश गांव डार्क जोन में शामिल हैं। इन गांवों में भूमिगत जलस्तर ढाई सौ से तीन सौ फीट गहराई तक पहुंच चुका है। ये पानी पीने लायक तो दूर खेतीबाड़ी में प्रयोग के काबिल भी नहीं बचा है। काफी गहराई में जाने की वजह से भूमिगत जल के दोहन पर जमीन के नीचे से खतरनाक रसायन भी बाहर आ रहे हैं, जो खेती को तो नष्ट कर ही रहा है, मानव सेहत के लिए भी काफी हानिकारक साबित हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

भूमि मिट्टी जांच में भी पानी इन इलाकों के भूमिगत पानी की सच्चाई सामने आ चुकी है। इसी को लेकर सिंचाई विभाग ने महत्वाकांक्षी योजना बनाई है, जिसमें सूखाग्रस्त इलाकों की पंचायती भूमि पर तालाब बनाकर इनके अंदर नहरों का स्वच्छ पानी भंडारित किया जा रहा है। ये पानी जरूरत के समय किसानों के लिए फसल सिंचाई में तो इस्तेमाल किया ही जाएगा, साथ ही भूमि के जल स्तर में सुधार के लिए भी बेहतर नतीजे देगा।



जूई कैनाल से सिंचित होता है अधिकांश मरुस्थली इलाका
चौधरी बंसीलाल कैनाल (जूई नहर) से जिले का अधिकांश मरुस्थली इलाका सिंचित होता है। यहां के किसानों के लिए भूमिगत जल की निर्भरता बहुत कम बनी है जबकि नहरी पानी उपलब्ध होने पर ही किसान परंपरागत खेती कर पा रहे हैं। हालांकि इन इलाकों के किसानों को अब माइक्रो इरिगेशन यानी सूक्ष्म सिंचाई की ओर भी कदम बढ़ाया है, जिसके क्रांतिकारी नतीजे भी सामने आए हैं, क्योंकि रेतीले टीलों में अब यहां के किसान परंपरागत खेती के साथ बागवानी में भी योगदान दे रहे हैं।





गांव भांखड़ा में ग्राम पंचायत के सहयोग से करीब दो एकड़ पंचायती भूमि पर तालाब निर्माण किया जाएगा। इसके टेंडर कराए गए हैं। इस तालाब को चौधरी बंसीलाल कैनाल से पाइप लाइन के जरिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। जिससे भूमिगत जल की स्थिति में सुधार होगा और इलाके के किसानों के लिए नहरी पानी की उपलब्धता भी आसानी से हो जाएगी। नहरों में शेड्यूल के हिसाब से ही पानी मिलता है। अधिकांश गर्मी के मौसम में नहरी पानी की कम उपलब्धता पर भी ये तालाब इलाके की फसल और भूमिगत जल संचय का सशक्त माध्यम बनेगा।

-अनुरोग गोयल, कार्यकारी अभियंता, जूई डिविजन सिंचाई विभाग, भिवानी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed