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Bhiwani News: नहरी पानी की सफाई के लिए जलघर में बनेगा पांच एमएलडी क्षमता का नया संयंत्र, लोहड़ और हालु के लिए अलग बूस्टर

Wed, 19 Feb 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Wed, 19 Feb 2025 01:17 AM IST
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A new plant with 5 MLD capacity will be constructed
महम रोड पर ​स्थित जलघर का मुख्य द्वार।
संजय वर्मा
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भिवानी। नहरी पानी की सफाई और भंडारण के लिए पुराने जलघर परिसर में पांच एमएलडी क्षमता का उपचार संयंत्र (ट्रीटमेंट प्लांट) बनेगा। इसके अंदर पहले नहरी पानी को शुद्ध किया जाएगा, फिर उसे सीधे बूस्टरों के जरिए घरों तक पेयजल आपूर्ति में दिया जाएगा। शहरी दायरे की अनधिकृत कॉलोनियों में भी पेयजल लाइनें डाली जाएंगी। लोहड़ और हालु जोन को जलघर से अलग कर उसका नया बूस्टर बनाया जाएगा।
पुराने जलघर में भी चार नए वाटर टैंक बनेंगे, जिसमें प्रत्येक टैंक की पानी भंडारण क्षमता 14.33 करोड़ लीटर होगी। शहरी दायरे में सौ किलोमीटर तक सात श्रेणियों की पेयजल लाइनें डाली जाएंगी। अमृत द्वितीय चरण में 246 करोड़ रुपये की पेयजल परियोजना के डिजाइन को जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग मुख्यालय ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब इन कार्याें के एस्टीमेट तैयार किए जाएंगे।
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अमृत द्वितीय चरण में शहरी दायरे के 31 वार्डों के लिए पेयजल और सीवर प्रणाली की अलग-अलग परियोजनाओं का खाका तैयार कर मुख्यालय भेजा गया था। इसमें सीवर परियोजना में मुख्यालय ने कुछ आपत्ति दर्ज कर उसे लौटाया था लेकिन पेयजल की 246 करोड़ रुपये की परियोजना के मसौदे के डिजाइन को मंजूरी मिल गई है। अब इस मसौदे में शामिल सभी कार्यों को कराने के लिए अधिकारी अनुमानित लागत के आकलन में जुटे हैं।
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शहर में तीन जलघर बने हैं, लेकिन अब पूरे शहर में सीधे बूस्टरों से ही पेयजल आपूर्ति घरों तक पहुंचेगी जबकि जलघर के अंदर नहरी पानी भंडारण और उसे शुद्ध करने का काम होगा। अनधिकृत कॉलोनियाें समेत शहर के जिन क्षेत्रों में पानी की लाइन नहीं थी, उनमें भी पेयजल लाइन डाली जाएगी।
शहर के 22 बूस्टरों की बढ़ेगी क्षमता, तीन नए बूस्टर बनेंगे
शहर में करीब 22 बूस्टर पहले से बने हैं। इन सभी की क्षमता पहले से अधिक की जाएगी और इनसे नए इलाकों को भी पेयजल आपूर्ति के लिए जोड़ा जाएगा जबकि तीन नए बूस्टरों का भी निर्माण होगा। इनमें लोहड़ और हालु जोन की पेयजल आपूर्ति के लिए अलग बूस्टर बनेगा। डाबर जलघर में नया बूस्टर तैयार होगा। इससे उत्तमनगर और दिनोद रोड क्षेत्र की कॉलोनियां जुड़ेंगी। दादरी रोड पर भी नया बूस्टर बनाया जाएगा। इससे लोहारू रोड और ऑटो मार्केट के आसपास के क्षेत्र समेत आधी कृष्णा कॉलोनी भी जुड़ेगी। पुराने बूस्टरों के पंपिंग सिस्टम को भी बदला जाएगा।

शहर में अब 31 जोन में होगी पेयजल की आपूर्ति
शहरी क्षेत्र में करीब 25 बूस्टर विकसित किए जाएंगे। इनके जरिए पूरे शहर की पेयजल आपूर्ति को 31 जोन में बांट दिया जाएगा। फिलहाल शहर के 12 जोन में ही पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नए जोन बनने पर पानी की लाइन से वंचित शहरी क्षेत्र भी नियमित पेयजल आपूर्ति से जुड़ेगा। पूरे शहर में करीब 100 किमी लंबी पाइपलाइन डाली जाएगी। इनकी मोटाई चार इंच, आठ इंच, 10 इंच, 12 इंच, 16 इंच और 24 इंच की होगी। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की शहरी पेयजल शाखा के इस ढांचागत सुधार से आगामी 25 सालों तक लाभ मिलेगा।

मिताथल हेड से जुड़ेगा पांच एमएलडी प्लांट
पुराने जलघर में पांच एमएलडी क्षमता का नया उपचार संयंत्र बनेगा। इस प्लांट में मिताथल हेड से सीधा नहरी पानी भेजा जाएगा। इसे शुद्ध करने के बाद ही शहरी दायरे के बूस्टरों तक पानी पहुंचेगा। इसके लिए मिताथल हेड के पंपिंग स्टेशन की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जलघर से फिर शुद्ध पानी बूस्टरों तक पहुंचेगा। यही पानी घरों तक पेयजल आपूर्ति में मिलेगा। पुरानी लाइनें बदलने और नई पाइपलाइन के जरिए बूस्टरों से घरों तक पेयजल आपूर्ति होगी। इससे गंदे पानी की आपूर्ति और अंतिम छोर तक पानी न पहुंचने की समस्या का भी स्थायी समाधान होगा।

तीन से चार माह में पूरी होगी एस्टीमेट और निविदा प्रक्रिया
पेयजल परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद एस्टीमेट और निविदा प्रकिया में करीब तीन से चार माह का समय लग जाएगा। इस दौरान जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी पेयजल लाइनों, बूस्टरों और नए कार्यों से जुड़ी सभी जानकारी मुख्यालय के साथ साझा करेंगे। इसके बाद ही कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी होंगे।


अमृत द्वितीय चरण के पेयजल कार्यों की परियोजना के डिजाइन को मंजूरी मिल गई है। इसके बाद इन कार्यों से जुड़े अलग-अलग एस्टीमेट तैयार किए जा रहे हैं। शहरी दायरे में एक नया उपचार संयंत्र बनेगा। इसी तरह शहरी दायरे के सभी बूस्टरों की क्षमता बढ़ेगी। तीन नए बूस्टर भी बनेंगे। इसके बाद शहरी दायरे में पेयजल की समुचित व्यवस्था संभव हो पाएगी। -ताजदीन, जेई, शहरी पेयजल शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, भिवानी।
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