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संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए गठित होगा अलग से बोर्ड : सोमेश्वर दत

Rohtak Bureau Updated Wed, 07 Feb 2018 01:01 AM IST
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संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए गठित होगा अलग से बोर्ड : सोमेश्वर दत्त
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भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अधीन ही शीघ्र संस्कृत का बोर्ड गठित किया जाएगा, जो प्रदेश में आचार्य और शास्त्री की परीक्षाओं का संचालन करेगा। यह बात हरियाणा संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. सोमेश्वर दत्त ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने बताया कि बोर्ड गठन को लेकर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में 12 फरवरी को एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संस्कृत के विद्वान भाग लेंगे। बैठक में संस्कृत के बोर्ड की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
रामकुंज में मंगलवार सुबह पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. सोमेश्वर दत्त ने कहा कि प्रदेश व केन्द्र सरकार संस्कृत भाषा के बढ़ावे के लिए सकारात्मक कदम उठा रही है। वर्ष 2012 में बनी नीति से प्रदेश में संस्कृत अध्यापकों की नियुक्तियां कम होने लगी थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने संस्कृत भाषा की महता को देखते हुए नई नीति निर्धारित की है। इस नीति के तहत अब आचार्य और शास्त्री करने वाले भी संस्कृत के अध्यापक-प्राध्यापक नियुक्त हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की सकारात्मक सोच के परिणाम स्वरूप ही प्रदेश में संस्कृत विश्व विद्यालय की स्थापना की जा रही है। संस्कृत बोर्ड के गठन होने के बाद आचार्य और शास्त्री की परीक्षाएं इस बोर्ड के तहत हो सकेगी। डॉ. दत्त ने बताया कि अब शास्त्री व आचार्य से छोटी कक्षाओं में 60 प्रतिशत अंक लेने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलेगी। छात्रवृत्ति के लिए 1400 आवेदन प्रदेश भर से अकादमी को प्राप्त हो चुके है। उन्होंने बताया कि संस्कृत भाषा को और अधिक बढ़ावा देने के लिए अकादमी द्वारा पुरस्कार घोषित किए गए हैं, जिनमें तीन विद्वान शिव नारायण शास्त्री, सत्यनारायाण वेद और सुमन भिवानी से हैं। उन्होंने बताया कि पुरस्कार राशि में भी बढ़ोतरी की जा रही है। पंडित सोमदत्त शर्मा, धर्मशास्त्र और महर्षि विश्वामित्र आदि तीन नए पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया जाएगा, जिसमें संस्कृत भाषा में उल्लेखनीय योगदान देने व प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित विद्वानों को अकादमी द्वारा सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही अकादमी की नई पत्रिका का भी प्रकाशन होगा। डॉ. दत्त ने कहा कि संस्कृत प्राचीतम भाषा है, जिसकी महता आज भी बरकरार है। वैदिक गणित भी संस्कृत भाषा में लिखा गया है, जो वर्तमान में भी प्रासंगिक है। इस दौरान आचार्य डॉ. मुरलीधर शास्त्री व समाज सेवी नंद किशोर अग्रवाल भी मौजूद थे।

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