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90 फीसदी नर्सिंग स्टूडेंट छुट्टी पर, इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक तीमारदारी ठप
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Sat, 14 Nov 2015 12:19 AM IST
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भिवानी। सुबह का वक्त। इमरजेंसी में 25-30 मरीजों का जमावड़ा। मरीजों की भीड़ इसलिए बढ़ी कि त्योहार पर 90 प्रतिशत नर्सिंग स्टूडेंट, एएनएम, जीएनएम छुटी पर हैं। इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक मरीज तीमारदारी के लिए तरस गए। इलाज तो दूर इंजेक्शन लगवाने वालों की इमरजेंसी में कतार देखी गई। यह समस्या अगले दो दिन और बरकरार रहेगी।
स्वास्थ्य विभाग के एएनएम कोर्स में 65 और जीएनएम कोर्स में 100 नर्सिंग स्टूडेंट्स है। इन स्टूडेंट्स की प्रेक्टिकल ट्रेनिंग के लिए सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी, मेडिसन, जच्चा बच्चा वार्ड, नीकू, सभी वार्डों व अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं में अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी लगाई गई है। ये स्टाफ नर्स और चिकित्सकों के साथ मिलकर मरीजों की इलाज में मदद करती है। इमरजेंसी में मरहम पट्टी के साथ इंजेक्शन लगाने तक का काम संभालती है। इनमें 90 फीसदी यानी करीब 155 नर्सिंग स्टूडेंट्स के छुट्टी पर जाने के कारण अस्पताल की पूरी व्यवस्था ही बिगड़ गई है। इमरजेंसी में मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है तो वार्डों व अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल है।
इमरजेंसी में अधिक समस्या है। इमरजेंसी में न मरीजों को मरहम पट्टी करने वाला कोई है और न ही इंजेक्शन लगाने वाला। दो स्टाफ नर्स पूरी व्यवस्था को संभालने का प्रयास कर रही थी मगर इंजेक्शन के लिए अधिकतर मरीजों को ओपीडी में भेजा गया। जिस कारण ओपीडी के इंजेक्शन कक्ष में भी मरीजों की भीड़ रही। अधिकतर मरीजों ने प्राइवेट अस्पतालों में ही जाना बेहतर समझा।
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ऑटो एनालाइजर मशीन और सीडब्ल्यूसी ठप
- नहीं हो रहे टेस्ट, सीडब्ल्यूसी के लिए प्राइवेट लैबों में जा रहे मरीज
- केमिकल किट नहीं होने के कारण बंद है मशीनें
भिवानी। डेंगू का खतरा अभी भी बरकरार है, मगर अस्पताल में कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट नहीं हो रहे। सीडब्ल्यूसी के साथ एक साथ एक ही समय में अनेक टेस्ट करने वाली ऑटो एनालाइजर मशीन भी ठप है। दोनों मशीनें केमिकल किट के अभाव में ठप है। ऐसे में मरीजों को विभिन्न टेस्टों के लिए प्राइवेट लैबों की ओर भागना पड़ रहा है।
पिछले दिनों डेंगू का खासा प्रकोप रहा। मरीजों के डेंगू टेस्ट के साथ कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट भी खूब हुए। डेंगू के मरीज अब भी सामने आ रहे है मगर कंप्लीट ब्लड काउंट करने वाली मशीन ठप है। कंप्लीट ब्लड काउंट में ब्लड की 17 तरह की रिपोर्ट्स आती है। जिससे मरीज की बीमारी का स्तर जानने में काफी मदद मिलती है।
लाखों की लागत से लाई गई फूली ऑटो एनालाइजर मशीन भी पिछले कुछ दिनों से बंद है। इस मशीन की खासियत है कि एक ही समय में सैकड़ों टेस्ट किए जा सकते है और इसके परिणाम भी एकदम स्टिक है। मगर पिछले कुछ दिनों से मशीन ठप है। दोनों मशीनों के ठप होने का कारण केमिकल व विभिन्न टेस्ट के लिए आने वाली किट का खत्म होना बताया जा रहा है। किट की सप्लाई नहीं होने का कारण पेमेंट विवाद बताया जा रहा है मगर अभी स्थित पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है कि कब तक सैंपल टेस्ट किट आएंगी और कब ये मशीनें चलेंगी। मशीनों के बंद होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीज अब कंप्लीट ब्लड काउंट समेत विभिन्न टेस्टों के लिए प्राइवेट अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर है। ऐसे में अस्पताल में जो टेस्ट निशुल्क होते है वहीं प्राइवेट लैबों में मरीजों को एक सौ से एक हजार रुपये देकर वे टेस्ट करवाने पड़ रहे है।
यहां तो कोई व्यवस्था नहीं
अपने भतीजे का ब्लड टेस्ट करवाने पहुंचे रमेश टांक ने बताया कि उसके भतीजे को डेंगू जैसे लक्षण है। इसी कारण यहां टेस्ट कराने पहुंचे तो बता रहे है कि सीबीसी मशीन नहीं चल रही। अब बाहर करवाना होगा। नया बाजार से अस्पताल पहुंचे राजेश कुमार ने बताया कि उसके बेटे को बुखार है। यहां चिकित्सक को दिखाया तो सीबीसी टेस्ट कराने के लिए लिखा मगर लैब में हो ही नहीं रहा। अब बाहर करवाना होगा।
वर्जन:::::::
कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट होते रहे हैं। थोड़ी बहुत तकनीकी समस्या आ जाती है, जिसे जल्दी ठीक करा दिया जाएगा।
डॉ. रघुवीर शांडिल्य, कार्यकारी पीएमओ, सिविल अस्पताल
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स्वास्थ्य विभाग के एएनएम कोर्स में 65 और जीएनएम कोर्स में 100 नर्सिंग स्टूडेंट्स है। इन स्टूडेंट्स की प्रेक्टिकल ट्रेनिंग के लिए सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी, मेडिसन, जच्चा बच्चा वार्ड, नीकू, सभी वार्डों व अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं में अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी लगाई गई है। ये स्टाफ नर्स और चिकित्सकों के साथ मिलकर मरीजों की इलाज में मदद करती है। इमरजेंसी में मरहम पट्टी के साथ इंजेक्शन लगाने तक का काम संभालती है। इनमें 90 फीसदी यानी करीब 155 नर्सिंग स्टूडेंट्स के छुट्टी पर जाने के कारण अस्पताल की पूरी व्यवस्था ही बिगड़ गई है। इमरजेंसी में मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है तो वार्डों व अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल है।
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इमरजेंसी में अधिक समस्या है। इमरजेंसी में न मरीजों को मरहम पट्टी करने वाला कोई है और न ही इंजेक्शन लगाने वाला। दो स्टाफ नर्स पूरी व्यवस्था को संभालने का प्रयास कर रही थी मगर इंजेक्शन के लिए अधिकतर मरीजों को ओपीडी में भेजा गया। जिस कारण ओपीडी के इंजेक्शन कक्ष में भी मरीजों की भीड़ रही। अधिकतर मरीजों ने प्राइवेट अस्पतालों में ही जाना बेहतर समझा।
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ऑटो एनालाइजर मशीन और सीडब्ल्यूसी ठप
- नहीं हो रहे टेस्ट, सीडब्ल्यूसी के लिए प्राइवेट लैबों में जा रहे मरीज
- केमिकल किट नहीं होने के कारण बंद है मशीनें
भिवानी। डेंगू का खतरा अभी भी बरकरार है, मगर अस्पताल में कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट नहीं हो रहे। सीडब्ल्यूसी के साथ एक साथ एक ही समय में अनेक टेस्ट करने वाली ऑटो एनालाइजर मशीन भी ठप है। दोनों मशीनें केमिकल किट के अभाव में ठप है। ऐसे में मरीजों को विभिन्न टेस्टों के लिए प्राइवेट लैबों की ओर भागना पड़ रहा है।
पिछले दिनों डेंगू का खासा प्रकोप रहा। मरीजों के डेंगू टेस्ट के साथ कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट भी खूब हुए। डेंगू के मरीज अब भी सामने आ रहे है मगर कंप्लीट ब्लड काउंट करने वाली मशीन ठप है। कंप्लीट ब्लड काउंट में ब्लड की 17 तरह की रिपोर्ट्स आती है। जिससे मरीज की बीमारी का स्तर जानने में काफी मदद मिलती है।
लाखों की लागत से लाई गई फूली ऑटो एनालाइजर मशीन भी पिछले कुछ दिनों से बंद है। इस मशीन की खासियत है कि एक ही समय में सैकड़ों टेस्ट किए जा सकते है और इसके परिणाम भी एकदम स्टिक है। मगर पिछले कुछ दिनों से मशीन ठप है। दोनों मशीनों के ठप होने का कारण केमिकल व विभिन्न टेस्ट के लिए आने वाली किट का खत्म होना बताया जा रहा है। किट की सप्लाई नहीं होने का कारण पेमेंट विवाद बताया जा रहा है मगर अभी स्थित पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है कि कब तक सैंपल टेस्ट किट आएंगी और कब ये मशीनें चलेंगी। मशीनों के बंद होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीज अब कंप्लीट ब्लड काउंट समेत विभिन्न टेस्टों के लिए प्राइवेट अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर है। ऐसे में अस्पताल में जो टेस्ट निशुल्क होते है वहीं प्राइवेट लैबों में मरीजों को एक सौ से एक हजार रुपये देकर वे टेस्ट करवाने पड़ रहे है।
यहां तो कोई व्यवस्था नहीं
अपने भतीजे का ब्लड टेस्ट करवाने पहुंचे रमेश टांक ने बताया कि उसके भतीजे को डेंगू जैसे लक्षण है। इसी कारण यहां टेस्ट कराने पहुंचे तो बता रहे है कि सीबीसी मशीन नहीं चल रही। अब बाहर करवाना होगा। नया बाजार से अस्पताल पहुंचे राजेश कुमार ने बताया कि उसके बेटे को बुखार है। यहां चिकित्सक को दिखाया तो सीबीसी टेस्ट कराने के लिए लिखा मगर लैब में हो ही नहीं रहा। अब बाहर करवाना होगा।
वर्जन:::::::
कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट होते रहे हैं। थोड़ी बहुत तकनीकी समस्या आ जाती है, जिसे जल्दी ठीक करा दिया जाएगा।
डॉ. रघुवीर शांडिल्य, कार्यकारी पीएमओ, सिविल अस्पताल