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आठ लाइटें खरीदने का छोड़ा टेंडर, खरीदी 14 लाइटें
Updated Sun, 08 Jul 2018 01:00 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। पिछले सप्ताह ही शहर में लगाई गई 9.86 लाख से अधिक की हाईमास्ट लाइटें दो दिन जलने के बाद ही बंद हो गई। नगर परिषद प्रशासन ने आठ लाइटें खरीदने के लिए 9.86 लाख रुपये का टेंडर छोड़ा था लेकिन नप ने आठ की बजाय 14 लाइटें खरीदी। अतिरिक्त की अब पेमेंट भी करनी होगी, मगर लाइटों को लगाए पांच से सात दिन ही हुए हैं और लाइटें बंद हैं। कुछ जगह हाई मास्ट लाइट की छह में दो लाइटें जल रही हैं तो कहीं एक। नप अधिकारियों का कहना है कि ये लाइटें गारंटी पीरियड में हैं जिनको चेक कराया जाएगा। मगर लाइटों के इस तरह बंद होने और खरीद पर सवाल उठ रहे हैं।
नगर परिषद की ओर से पिछले सप्ताह ही शहर के विभिन्न वार्डों में 14 हाईमास्ट लाइटें लगवाई गई हैं। इनमें एमसी कॉलोनी के पार्क में एक, शिव नगर में दो, वार्ड 18 में दो, सेक्टर 13, पुराना हाउसिंग बोर्ड में पांच, वार्ड 14 में एक हाईमास्ट लाइटें लगाई हैं। नगर परिषद की ओर से शहर के लिए आठ हाईमास्ट लाइटें खरीदने के लिए नौ लाख 86 हजार रुपये का टेंडर छोड़ा गया था। टेंडर माइनस में थे। अब नप की ओर से आठ की जगह 14 लाइटें खरीदी गई हैं। एक जगह छोड़ बाकी सभी जगह लाइटें लग गई हैं। मगर समस्या है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद जहां हाईमास्ट लाइटें लगाई गई हैं वहां अंधेरा पसरा है।
ये लाइटें दो दिन तो ठीक जली मगर उसके बाद से बंद हैं। कुछ जगह हाईमास्ट की छह में से दो ही लाइटें जल रही हैं। लाइटों के दो दिन जलने के बाद बंद होने पर सवाल उठ रहे हैं। इन लाइटों को लगवाने व देखरेख का जिम्मा संभाल रहे नप कर्मचारियों का कहना है कि इनका टाइम सेट नहीं किया है, जिस कारण समस्या आ रही है वहीं नप के पदाधिकारियों का कहना है कि लाइटें बंद हुई हैं तो जांच करवाई जाएगी। अभी इनकी पेमेंट नहीं की गई है।
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जहां जरूरत वहां लगी नहीं
स्ट्रीट लाइटों की जगह को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लाइटें ज्यादातर कॉलोनियों के पार्कों व कुछ मार्गों पर लगाई हैं जबकि जहां ज्यादा जरूरत है, वहां नहीं लगने पर सवाल उठ रहे हैं। पुराना हाउसिंग बोर्ड, सेक्टर व अन्य वार्डों के छोटे पार्कों में लाइटें लगाई गई हैं जबकि इन कॉलोनियों के ही बड़े पार्क या मुख्य मार्ग जहां अंधेरा पसरा रहता है वहां लाइटें नहीं लगाई गई।
25 लाख की स्ट्रीट लाइटें खरीदने की तैयारी
शहर में अधिकतर स्ट्रीट लाइटें वर्षों पुरानी है जिनमें अधिकतर खराब हो चुकी हैं। नगर परिषद प्रशासन शहर के लिए 25 लाख रुपये की और स्ट्रीट लाइटें खरीदने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
वर्जन ::::
आठ लाइटें खरीदने का टेंडर दिया था। वह माइनस में था तो आठ की जगह 14 खरीदी गई। अगर कहीं लाइटें बंद हो गई हैं तो उन्हें चेक कराया जाएगा। अभी इनकी पेमेंट नहीं की गई है।
-रण सिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद भिवानी
------
दोबारा होनी चाहिए ई-टेंडर प्रक्रिया
अगर लाइटें ज्यादा खरीदी जा रही हैं तो नियमानुसार ज्यादा खरीदी जाने वाली लाइटों की नए सिरे से ई-टेंडरिंग प्रक्रिया होनी चाहिए। लाइटें गारंटी पीरियड में होती हैं, उन्हें तुरंत ठीक करवाना चाहिए।
-विजय पंचगावा, पूर्व चेयरमैन
-----------
शहर में एक जगह छोड़कर बाकी जगह हाईमास्ट लाइटें लगवा दी गई हैं। 14 हाईमास्ट लाइटें हैं। लाइटें बंद होने बाबत ठेकेदार से बातचीत हुई है। उनका कहना है कि इनका टाइम सेट नहीं किया है। दिल्ली से कर्मचारी आकर टाइम सेट करेंगे। अगर कोई खराबी है तो उसे भी ठीक करवाया जाएगा।
-प्रवीण बजाज जेई, नगर परिषद
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भिवानी। पिछले सप्ताह ही शहर में लगाई गई 9.86 लाख से अधिक की हाईमास्ट लाइटें दो दिन जलने के बाद ही बंद हो गई। नगर परिषद प्रशासन ने आठ लाइटें खरीदने के लिए 9.86 लाख रुपये का टेंडर छोड़ा था लेकिन नप ने आठ की बजाय 14 लाइटें खरीदी। अतिरिक्त की अब पेमेंट भी करनी होगी, मगर लाइटों को लगाए पांच से सात दिन ही हुए हैं और लाइटें बंद हैं। कुछ जगह हाई मास्ट लाइट की छह में दो लाइटें जल रही हैं तो कहीं एक। नप अधिकारियों का कहना है कि ये लाइटें गारंटी पीरियड में हैं जिनको चेक कराया जाएगा। मगर लाइटों के इस तरह बंद होने और खरीद पर सवाल उठ रहे हैं।
नगर परिषद की ओर से पिछले सप्ताह ही शहर के विभिन्न वार्डों में 14 हाईमास्ट लाइटें लगवाई गई हैं। इनमें एमसी कॉलोनी के पार्क में एक, शिव नगर में दो, वार्ड 18 में दो, सेक्टर 13, पुराना हाउसिंग बोर्ड में पांच, वार्ड 14 में एक हाईमास्ट लाइटें लगाई हैं। नगर परिषद की ओर से शहर के लिए आठ हाईमास्ट लाइटें खरीदने के लिए नौ लाख 86 हजार रुपये का टेंडर छोड़ा गया था। टेंडर माइनस में थे। अब नप की ओर से आठ की जगह 14 लाइटें खरीदी गई हैं। एक जगह छोड़ बाकी सभी जगह लाइटें लग गई हैं। मगर समस्या है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद जहां हाईमास्ट लाइटें लगाई गई हैं वहां अंधेरा पसरा है।
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ये लाइटें दो दिन तो ठीक जली मगर उसके बाद से बंद हैं। कुछ जगह हाईमास्ट की छह में से दो ही लाइटें जल रही हैं। लाइटों के दो दिन जलने के बाद बंद होने पर सवाल उठ रहे हैं। इन लाइटों को लगवाने व देखरेख का जिम्मा संभाल रहे नप कर्मचारियों का कहना है कि इनका टाइम सेट नहीं किया है, जिस कारण समस्या आ रही है वहीं नप के पदाधिकारियों का कहना है कि लाइटें बंद हुई हैं तो जांच करवाई जाएगी। अभी इनकी पेमेंट नहीं की गई है।
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जहां जरूरत वहां लगी नहीं
स्ट्रीट लाइटों की जगह को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लाइटें ज्यादातर कॉलोनियों के पार्कों व कुछ मार्गों पर लगाई हैं जबकि जहां ज्यादा जरूरत है, वहां नहीं लगने पर सवाल उठ रहे हैं। पुराना हाउसिंग बोर्ड, सेक्टर व अन्य वार्डों के छोटे पार्कों में लाइटें लगाई गई हैं जबकि इन कॉलोनियों के ही बड़े पार्क या मुख्य मार्ग जहां अंधेरा पसरा रहता है वहां लाइटें नहीं लगाई गई।
25 लाख की स्ट्रीट लाइटें खरीदने की तैयारी
शहर में अधिकतर स्ट्रीट लाइटें वर्षों पुरानी है जिनमें अधिकतर खराब हो चुकी हैं। नगर परिषद प्रशासन शहर के लिए 25 लाख रुपये की और स्ट्रीट लाइटें खरीदने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
वर्जन ::::
आठ लाइटें खरीदने का टेंडर दिया था। वह माइनस में था तो आठ की जगह 14 खरीदी गई। अगर कहीं लाइटें बंद हो गई हैं तो उन्हें चेक कराया जाएगा। अभी इनकी पेमेंट नहीं की गई है।
-रण सिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद भिवानी
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दोबारा होनी चाहिए ई-टेंडर प्रक्रिया
अगर लाइटें ज्यादा खरीदी जा रही हैं तो नियमानुसार ज्यादा खरीदी जाने वाली लाइटों की नए सिरे से ई-टेंडरिंग प्रक्रिया होनी चाहिए। लाइटें गारंटी पीरियड में होती हैं, उन्हें तुरंत ठीक करवाना चाहिए।
-विजय पंचगावा, पूर्व चेयरमैन
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शहर में एक जगह छोड़कर बाकी जगह हाईमास्ट लाइटें लगवा दी गई हैं। 14 हाईमास्ट लाइटें हैं। लाइटें बंद होने बाबत ठेकेदार से बातचीत हुई है। उनका कहना है कि इनका टाइम सेट नहीं किया है। दिल्ली से कर्मचारी आकर टाइम सेट करेंगे। अगर कोई खराबी है तो उसे भी ठीक करवाया जाएगा।
-प्रवीण बजाज जेई, नगर परिषद