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एडमिशन के लिए छह घंटे बवाल के बाद हुई ओपन काउंसलिंग की घोषणा
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:24 AM IST
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एडमिशन के लिए छह घंटे हंगामे के बाद ओपन काउंसिलिंग की घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी
नियम 134-ए के तहत एडमिशन से वंचित बच्चों के अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर सांठगांठ का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया। इस दौरान अभिभावकों ने बीईओ कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों को खूब खरी-खरी की सुनाई। अभिभावकों से बात करने आए प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के नेता से इतनी तीखी नोक-झोक हुई कि झगड़ा होते-होते बचा। सुबह से चार बजे तक बीईओ कार्यालय में हंगामा होता रहा। हंगामे के तीन घंटे बाद शाम करीब विभाग ने एडमिशन से वंचित 907 बच्चों को राहत देते हुए एक मई को ओपन काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि नियम एक 134 ए के तहत हुई प्रवेश परीक्षा में 1942 बच्चों ने 55 प्रतिशत और इससे अधिक अंक प्राप्त कर दाखिला लेने की अर्हता हासिल की। लेकिन, स्कूल अलॉटमेंट लिस्ट में केवल 1035 बच्चों के नाम दर्शाए गए। बाकी 907 बच्चों के नाम लिस्ट से नदारद मिले। विभाग का कहना है कि अभिभावकों ने कुछ चुनिंदा स्कूलों को ही ऑप्शन दिया। इन स्कूलों में मेरिट के आधार पर स्कूल अलॉट कर दिए, बाकी का मामला अधर में लटक गया।
सोमवार सुबह बड़ी संख्या में अभिभावक इस आस में बीटीएम रोड स्थित बीईओ कार्यालय पहुंचे कि एडमिशन से वंचित रहे उनके बच्चों को राहत मिलेगी। बीईओ कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों के गोल-मोल जवाब पर अभिभावक भड़क गए और सवाल-जवाब करने लगे। जैसे-जैसे अभिभावकों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे माहौल में तल्खी भी बढ़ती गई। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने लोगों से पैसे लेकर कम अंक वाले बच्चों का तो एडमिशन कर दिया, लेकिन 90 अंक प्राप्त करने वाले बच्चों का लिस्ट में नाम जारी ही नहीं किया। कई बड़े स्कूलों में सीट खाली होने के बाद भी लिस्ट में एक भी स्कूल का नाम नहीं है। यहां तक की कई बच्चों को ऐसे स्कूल भी दिए जा चुके हैं, जिन्होंने उस स्कूल का नाम तक फार्म में नहीं भरा।
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अभिभावकों के हंगामे के बीच प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन से जुड़ा नेता मौके पर पहुंचा। नेता ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभिभावक शांत नहीं हुए। बहस कुछ ही क्षणों में तू-तू मैं-मैं में बदल गई। इस दौरान उक्त नेता ने बच्चों का किसी भी स्कूल में दाखिला न होने देने की धमकी दी तो अभिभावकों व उक्त नेता के बीच झगड़ा होते-होते बचा। बीच-बचाव से जैसे-तैसे मामला शांत किया गया।
स्कूल लिस्ट में नाम न आने के कारण अभिभावक सुबह से ही बीईओ ऑफिस में अधिकारी व कर्मचारी अभिभावकों को समझाते रहे लेकिन अभिभावकों का गुस्सा आसमान पर रहा। बीईओ कार्यालय के कर्मचारी शाम तक अभिभावकों को यही कहते रहे कि अपनी शिकायत दर्ज करा दो, इसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।
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हंगामे के तीन घंटे बाद ऐलान, एक मई को होगी ओपन काउंसलिंग
रात आठ बजे के करीब शिक्षा विभाग ने बताया कि एक मई को ओपन काउंसलिंग होगी। इस दिन एडमिशन से वंचित 907 बच्चों को मेरिट के आधार पर मौका दिया जाएगा। बीईओ नरेश मेहता ने बताया कि प्रवेश परीक्षा पास करने वाले बच्चों के लिए विभाग दूसरी और तीसरी काउंसलिंग कराएगा। दूसरी काउंसलिंग एक मई को होगी और तीसरी इसके एक सप्ताह बाद होगी। काउंसलिंग के दौरान प्रवेश परीक्षा पास करने वाले बच्चों को मेरिट व शेष सीट की संख्या के आधार पर स्कूल अलॉट किया जाएगा। बच्चों से मौके पर प्राथमिकता पूछी जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी
नियम 134-ए के तहत एडमिशन से वंचित बच्चों के अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर सांठगांठ का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया। इस दौरान अभिभावकों ने बीईओ कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों को खूब खरी-खरी की सुनाई। अभिभावकों से बात करने आए प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के नेता से इतनी तीखी नोक-झोक हुई कि झगड़ा होते-होते बचा। सुबह से चार बजे तक बीईओ कार्यालय में हंगामा होता रहा। हंगामे के तीन घंटे बाद शाम करीब विभाग ने एडमिशन से वंचित 907 बच्चों को राहत देते हुए एक मई को ओपन काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि नियम एक 134 ए के तहत हुई प्रवेश परीक्षा में 1942 बच्चों ने 55 प्रतिशत और इससे अधिक अंक प्राप्त कर दाखिला लेने की अर्हता हासिल की। लेकिन, स्कूल अलॉटमेंट लिस्ट में केवल 1035 बच्चों के नाम दर्शाए गए। बाकी 907 बच्चों के नाम लिस्ट से नदारद मिले। विभाग का कहना है कि अभिभावकों ने कुछ चुनिंदा स्कूलों को ही ऑप्शन दिया। इन स्कूलों में मेरिट के आधार पर स्कूल अलॉट कर दिए, बाकी का मामला अधर में लटक गया।
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सोमवार सुबह बड़ी संख्या में अभिभावक इस आस में बीटीएम रोड स्थित बीईओ कार्यालय पहुंचे कि एडमिशन से वंचित रहे उनके बच्चों को राहत मिलेगी। बीईओ कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों के गोल-मोल जवाब पर अभिभावक भड़क गए और सवाल-जवाब करने लगे। जैसे-जैसे अभिभावकों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे माहौल में तल्खी भी बढ़ती गई। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने लोगों से पैसे लेकर कम अंक वाले बच्चों का तो एडमिशन कर दिया, लेकिन 90 अंक प्राप्त करने वाले बच्चों का लिस्ट में नाम जारी ही नहीं किया। कई बड़े स्कूलों में सीट खाली होने के बाद भी लिस्ट में एक भी स्कूल का नाम नहीं है। यहां तक की कई बच्चों को ऐसे स्कूल भी दिए जा चुके हैं, जिन्होंने उस स्कूल का नाम तक फार्म में नहीं भरा।
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अभिभावकों के हंगामे के बीच प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन से जुड़ा नेता मौके पर पहुंचा। नेता ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभिभावक शांत नहीं हुए। बहस कुछ ही क्षणों में तू-तू मैं-मैं में बदल गई। इस दौरान उक्त नेता ने बच्चों का किसी भी स्कूल में दाखिला न होने देने की धमकी दी तो अभिभावकों व उक्त नेता के बीच झगड़ा होते-होते बचा। बीच-बचाव से जैसे-तैसे मामला शांत किया गया।
स्कूल लिस्ट में नाम न आने के कारण अभिभावक सुबह से ही बीईओ ऑफिस में अधिकारी व कर्मचारी अभिभावकों को समझाते रहे लेकिन अभिभावकों का गुस्सा आसमान पर रहा। बीईओ कार्यालय के कर्मचारी शाम तक अभिभावकों को यही कहते रहे कि अपनी शिकायत दर्ज करा दो, इसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।
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हंगामे के तीन घंटे बाद ऐलान, एक मई को होगी ओपन काउंसलिंग
रात आठ बजे के करीब शिक्षा विभाग ने बताया कि एक मई को ओपन काउंसलिंग होगी। इस दिन एडमिशन से वंचित 907 बच्चों को मेरिट के आधार पर मौका दिया जाएगा। बीईओ नरेश मेहता ने बताया कि प्रवेश परीक्षा पास करने वाले बच्चों के लिए विभाग दूसरी और तीसरी काउंसलिंग कराएगा। दूसरी काउंसलिंग एक मई को होगी और तीसरी इसके एक सप्ताह बाद होगी। काउंसलिंग के दौरान प्रवेश परीक्षा पास करने वाले बच्चों को मेरिट व शेष सीट की संख्या के आधार पर स्कूल अलॉट किया जाएगा। बच्चों से मौके पर प्राथमिकता पूछी जाएगी।