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भिवानी में 24 घंटे में 77 एमएम बरसात
Updated Tue, 25 Sep 2018 01:10 AM IST
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भिवानी। देर रात 12 बजे से दो बजे के बीच महज दो घंटे में ही बवानीखेड़ा में 62 एमएम बरसात दर्ज की गई। बवानीखेड़ा में पिछले 24 घंटे में 107 एमए बरसात हो चुकी है। वहीं भिवानी में भी पिछले 24 घंटे में 77 एमएम से ज्यादा बारिश हो चुकी है। तोशाम में अलखपुरा माइनर और चांग में सैय मोड़ के पास अत्यधिक बारिश के कारण नहर टूट गई। जिस कारण सारा पानी खेतों और गांव में घुस गया। चांग गांव में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। वहीं, चांग स्कूल में छुट्टी करनी पड़ी। जिले के आधा दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए है।
पिछले दो दिन से चल रही बारिश सोमवार को भी जारी रही। सोमवार को दिनभर जिलेभर में हलकी बूंदाबांदी चली। मगर रात को बारिश ने कहर ढ़ाया। बवानीखेड़ा में महज दो घंटे में 62 एमएम बरसात दर्ज की गई। पिछले 24 घंटे में यहां 107 एमएम बारिश हो चुकी है वहीं भिवानी में पिछले 24 घंटे में 77 एमएम बारिश हो चुकी है। बारिश के कारण भिवानी, बवानीखेड़ा की सडक़ों से रात के समय गुजरना मुश्किल हो गया था। भिवानी शहर में सुबह 11 बजे तक ही सभी मुख्य मार्गों से पानी निकाला जा सका।
बारिश से फसलों में भारी नुकसान
बरसात से जिले में कपास, बाजरा की फसल में भारी नुकसान हुआ है। ज्यादा नुकसान भिवानी और बवानीखेड़ा में है। यहां 80 फीसदी किसानों ने कपास लगा रखी और बारिश से सारी फसल जमीन पर बिछ गई है। 50 से 70 प्रतिशत खराब हो गई है।
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टपकने लगी अस्पताल की छत, सी-मैट भवन में आया करंट
बारिश में सामान्य अस्पताल का भवन टपकने लगा। ओपीडी में बारिश से फालसीलिंग गिर गई तो वार्ड तीन-चार की गैलरी और प्राइवेट वार्ड में छत टपकने लगी। जिस कारण मरीजों को भी परेशानी हुई। वहीं सी-मैट भवन भी बारिश में टपकने लगा। यहां सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय के अलावा चौ. बंसीलाल यूनिवर्सिटी की कक्षाएं लगती है। यहां एक कमरे जहां सर्व शिक्षा अभियान के कर्मचारी बैठे थे, छत टपकने के कारण करंट आ गया। जिससे हड़कंप मच गया।
चांग में रात को नहर टूटी, घरों, खेतों और स्कूलों में भरा पानी
बारिश के कारण भिवानी डिस्ट्रीब्यूटरी नहर सैय पुल के पास से रात को टूट गई। जिससे नहर का पानी बस स्टैंड कॉलोनी, राजकीय स्कूलों व गलियों व खेतों में तीन से चार फुट तक पानी जमा हो गया है। भारी बारिश के कारण नहर पाटने का काम 13 घंटे बाद शुरू हो सका है। तीन दिन की बारिश से पहले ही काफी पानी जमा हो चुका था। ऐसे में नहर टूटने से गांव के खेतों सहित बस स्टैंड कॉलोनी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पानी तीन से चार फुट तक पानी जमा होने से छुट्टी करनी पड़ी। इन दिनों स्कूलों में विद्यार्थियों के सितंबर परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में सभी विद्यार्थी व स्कूल स्टाफ भारी बरसात में भी पहुंचे। लेकिन स्कूल में तीन से चार फुट तक पानी देखकर वापस अपने घर लौट गए।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्या कमलेश ढांडा व कन्या स्कूल के प्राचार्य ओपी आर्या ने बताया कि नहर टूटने से स्कूल में तीन से चार फुट तक पानी जमा हो गया है। उच्चाधिकारियों से बातचीत के बाद ही स्कूल की छुट्टी करनी पड़ी है। गांव चंाग के कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चार से पांच फूट तक पानी भरने के कारण आज भी स्कूल की छूट्टी रहेगी। स्कूल प्राचार्य डा. ओमप्रकाश आर्य ने बताया कि इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। अधिकारियों के आदेश पर ही स्कूल की छुट्टी कर दी गई है।
जताई में बारिश के कारण गिरा मकान
गांव जताई में दो दिन से बारिश के बीच सोमवार सुबह एक मकान गिर गया। गनमिनत यह रहा कि किसी को चोट नहीं लगी। मकान मालिक जगबीर ने बताया कि वह सुबह बाहर किसी काम से गया हुआ था। उसकी मां उसकी मौसी के घर गई हुई थी। जब वापस घर आकर देखा तो मकान पूरी तरह गिर चुका था। घर का सामान मलबे के नीचे दबा हुआ मिला। शुक्र है कि मकान रात को नहीं गिरा। वरना किसी की जान भी जा सकती थी। भय के माहौल से पास के घरों वालो ने भी अपने मकान खाली कर सामान दुसरे घरों में शिफ्ट कर दिया है।
बरसात से लेट हुआ चपरासी, स्कूल के बाहर खड़ी रही छात्राएं
कैरू। गांव देवराला के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में सुबह तेज बारिश आने से स्कूल के बाहर ही छात्राओं को खड़े होकर चपरासी का इंतजार करना पड़ा। दरअसल बारिश के कारण चपड़ासी लेट हो गया और स्कूल का गेट बं द रहा। सुबह करीबन दस बजे स्कूल का गेट खोला गया। उसके ेबाद ही छात्राएं अंदर जा सकी। करीब दो घंटे देरी से ताला खोला गया। हेडमास्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश तेज होने के कारण चपड़ासी देरी से आया।
डूबने की कगार पर बापोड़ा की हरिजन बस्ती, एक मकान में आई दरार
दो दिन की बारिश के कारण बापोड़ा गांव की हरिजन बस्ती डूबने की कगार पर है। बस्ती की गलियों में चार फुट तक पानी भरा गया है। बस्ती के लोगों ने बताया कि उनके घरों में भी दो से तीन फुट तक पानी भर गया है। घर से बाहर निकल नहीं सकते। तोशाम निगरानी कमेटी के चेयरमैन रविंद्र बापोड़ा ने बताया कि पिछले तीन साल से बारिश के समय गांव बापोड़ा के हालात खराब हो जाते है। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। एक मकान में भारी दरारें आ गई है।
स्कूल हुआ बारिश के पानी से लबालब
बहल। रविवार रात को आई तेज बारिश से में अनेक जगह पर जलभराव की स्थिति बन गई। राजकीय कन्या विद्यालय में करीब दो फीट तक पानी भर गया जिससे छात्राओं को पानी के अंदर से ही जाना पड़ा। कमरों में सही व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्राओं को विद्यालय के कमरों के बाहर बरामदों में चटाई पर बैठकर ही पेपर देने पड़े। नई अनाज मंडी, राजगढ रोड, पिलानी रोड समेत अन्य नीची जगहों पर पानी भर गया तथा लोगों का आवागमन बाधित हो गया।
सूई स्कूल पानी से लबालब, लोगों ने जताया रोष
बवानीखेड़ा में हुई मूसलाधार बारिश आफत बनी। सभी मुख्य मार्ग और गलियां पानी से लबालब रही। सोमवार को स्कूली परीक्षा होने के चलते जाना विद्यार्थियों की मजबूरी थी और ऐसे में विद्यार्थियों पानी से होकर जाना पड़ा।
एक महीने पहले बनी रेलवे स्टेशन क्वार्टर की दिवार गिरी
बवानी खेड़ा के रेलवे स्टेशन के साथ बने क्वार्टर की लगभग एक माह पहले बनी दिवार बारिश में गिर गई। गनीमत रही कि जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। दिवार के पहली ही बारिश में गिरने से निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे है। शमशेर सिंह, अशोक कुमार, सोनू, राहुल, राघव, सुमित्रा, भागवंती आदि ने बताया कि दिवार की स्थिति देखने से लगता है कि इसमें निम्न स्तर की सामग्री का प्रयोग किया गया।
पिछले दो दिन से चल रही बारिश सोमवार को भी जारी रही। सोमवार को दिनभर जिलेभर में हलकी बूंदाबांदी चली। मगर रात को बारिश ने कहर ढ़ाया। बवानीखेड़ा में महज दो घंटे में 62 एमएम बरसात दर्ज की गई। पिछले 24 घंटे में यहां 107 एमएम बारिश हो चुकी है वहीं भिवानी में पिछले 24 घंटे में 77 एमएम बारिश हो चुकी है। बारिश के कारण भिवानी, बवानीखेड़ा की सडक़ों से रात के समय गुजरना मुश्किल हो गया था। भिवानी शहर में सुबह 11 बजे तक ही सभी मुख्य मार्गों से पानी निकाला जा सका।
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बारिश से फसलों में भारी नुकसान
बरसात से जिले में कपास, बाजरा की फसल में भारी नुकसान हुआ है। ज्यादा नुकसान भिवानी और बवानीखेड़ा में है। यहां 80 फीसदी किसानों ने कपास लगा रखी और बारिश से सारी फसल जमीन पर बिछ गई है। 50 से 70 प्रतिशत खराब हो गई है।
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टपकने लगी अस्पताल की छत, सी-मैट भवन में आया करंट
बारिश में सामान्य अस्पताल का भवन टपकने लगा। ओपीडी में बारिश से फालसीलिंग गिर गई तो वार्ड तीन-चार की गैलरी और प्राइवेट वार्ड में छत टपकने लगी। जिस कारण मरीजों को भी परेशानी हुई। वहीं सी-मैट भवन भी बारिश में टपकने लगा। यहां सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय के अलावा चौ. बंसीलाल यूनिवर्सिटी की कक्षाएं लगती है। यहां एक कमरे जहां सर्व शिक्षा अभियान के कर्मचारी बैठे थे, छत टपकने के कारण करंट आ गया। जिससे हड़कंप मच गया।
चांग में रात को नहर टूटी, घरों, खेतों और स्कूलों में भरा पानी
बारिश के कारण भिवानी डिस्ट्रीब्यूटरी नहर सैय पुल के पास से रात को टूट गई। जिससे नहर का पानी बस स्टैंड कॉलोनी, राजकीय स्कूलों व गलियों व खेतों में तीन से चार फुट तक पानी जमा हो गया है। भारी बारिश के कारण नहर पाटने का काम 13 घंटे बाद शुरू हो सका है। तीन दिन की बारिश से पहले ही काफी पानी जमा हो चुका था। ऐसे में नहर टूटने से गांव के खेतों सहित बस स्टैंड कॉलोनी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पानी तीन से चार फुट तक पानी जमा होने से छुट्टी करनी पड़ी। इन दिनों स्कूलों में विद्यार्थियों के सितंबर परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में सभी विद्यार्थी व स्कूल स्टाफ भारी बरसात में भी पहुंचे। लेकिन स्कूल में तीन से चार फुट तक पानी देखकर वापस अपने घर लौट गए।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्या कमलेश ढांडा व कन्या स्कूल के प्राचार्य ओपी आर्या ने बताया कि नहर टूटने से स्कूल में तीन से चार फुट तक पानी जमा हो गया है। उच्चाधिकारियों से बातचीत के बाद ही स्कूल की छुट्टी करनी पड़ी है। गांव चंाग के कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चार से पांच फूट तक पानी भरने के कारण आज भी स्कूल की छूट्टी रहेगी। स्कूल प्राचार्य डा. ओमप्रकाश आर्य ने बताया कि इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। अधिकारियों के आदेश पर ही स्कूल की छुट्टी कर दी गई है।
जताई में बारिश के कारण गिरा मकान
गांव जताई में दो दिन से बारिश के बीच सोमवार सुबह एक मकान गिर गया। गनमिनत यह रहा कि किसी को चोट नहीं लगी। मकान मालिक जगबीर ने बताया कि वह सुबह बाहर किसी काम से गया हुआ था। उसकी मां उसकी मौसी के घर गई हुई थी। जब वापस घर आकर देखा तो मकान पूरी तरह गिर चुका था। घर का सामान मलबे के नीचे दबा हुआ मिला। शुक्र है कि मकान रात को नहीं गिरा। वरना किसी की जान भी जा सकती थी। भय के माहौल से पास के घरों वालो ने भी अपने मकान खाली कर सामान दुसरे घरों में शिफ्ट कर दिया है।
बरसात से लेट हुआ चपरासी, स्कूल के बाहर खड़ी रही छात्राएं
कैरू। गांव देवराला के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में सुबह तेज बारिश आने से स्कूल के बाहर ही छात्राओं को खड़े होकर चपरासी का इंतजार करना पड़ा। दरअसल बारिश के कारण चपड़ासी लेट हो गया और स्कूल का गेट बं द रहा। सुबह करीबन दस बजे स्कूल का गेट खोला गया। उसके ेबाद ही छात्राएं अंदर जा सकी। करीब दो घंटे देरी से ताला खोला गया। हेडमास्टर गजेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश तेज होने के कारण चपड़ासी देरी से आया।
डूबने की कगार पर बापोड़ा की हरिजन बस्ती, एक मकान में आई दरार
दो दिन की बारिश के कारण बापोड़ा गांव की हरिजन बस्ती डूबने की कगार पर है। बस्ती की गलियों में चार फुट तक पानी भरा गया है। बस्ती के लोगों ने बताया कि उनके घरों में भी दो से तीन फुट तक पानी भर गया है। घर से बाहर निकल नहीं सकते। तोशाम निगरानी कमेटी के चेयरमैन रविंद्र बापोड़ा ने बताया कि पिछले तीन साल से बारिश के समय गांव बापोड़ा के हालात खराब हो जाते है। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। एक मकान में भारी दरारें आ गई है।
स्कूल हुआ बारिश के पानी से लबालब
बहल। रविवार रात को आई तेज बारिश से में अनेक जगह पर जलभराव की स्थिति बन गई। राजकीय कन्या विद्यालय में करीब दो फीट तक पानी भर गया जिससे छात्राओं को पानी के अंदर से ही जाना पड़ा। कमरों में सही व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्राओं को विद्यालय के कमरों के बाहर बरामदों में चटाई पर बैठकर ही पेपर देने पड़े। नई अनाज मंडी, राजगढ रोड, पिलानी रोड समेत अन्य नीची जगहों पर पानी भर गया तथा लोगों का आवागमन बाधित हो गया।
सूई स्कूल पानी से लबालब, लोगों ने जताया रोष
बवानीखेड़ा में हुई मूसलाधार बारिश आफत बनी। सभी मुख्य मार्ग और गलियां पानी से लबालब रही। सोमवार को स्कूली परीक्षा होने के चलते जाना विद्यार्थियों की मजबूरी थी और ऐसे में विद्यार्थियों पानी से होकर जाना पड़ा।
एक महीने पहले बनी रेलवे स्टेशन क्वार्टर की दिवार गिरी
बवानी खेड़ा के रेलवे स्टेशन के साथ बने क्वार्टर की लगभग एक माह पहले बनी दिवार बारिश में गिर गई। गनीमत रही कि जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। दिवार के पहली ही बारिश में गिरने से निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे है। शमशेर सिंह, अशोक कुमार, सोनू, राहुल, राघव, सुमित्रा, भागवंती आदि ने बताया कि दिवार की स्थिति देखने से लगता है कि इसमें निम्न स्तर की सामग्री का प्रयोग किया गया।