फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   पंचकुला को छोड़ हर जिले में प्राइवेट स्कूलों से पिछड़े सरकारी स्कूल

पंचकुला को छोड़ हर जिले में प्राइवेट स्कूलों से पिछड़े सरकारी स्कूल

Sat, 26 May 2018 01:36 AM IST
Updated Sat, 26 May 2018 01:36 AM IST
विज्ञापन
पंचकुला को छोड़ हर जिले में प्राइवेट स्कूलों से पिछड़े सरकारी स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

भिवानी।
सेकेंडरी शिक्षा पर 1270 करोड़ से अधिक खर्च करने के बाद भी सरकारी स्कूल फिसड्डी साबित हो रहे हैं। सरकार 255 करोड़ से अधिक तो सीधे शिक्षकों के वेतन पर खर्च कर रही है। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों का परिणाम 44.38 प्रतिशत रहा। वहीं सरकारी की तुलना बहुत कम बजट वाले प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 59.87 रहा। पंचकुला को छोड़ सभी जिलों के सरकारी स्कूल प्राइवेट के सामने फिसड्डी साबित हुए। पंचकुला जिला भले ही जिलावार सूची में 16वें स्थान पर रहा है, मगर यह एकमात्र ऐसा जिला है जहां सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट से बेहतर परिणाम दिए। पलवल सबसे फिसड्डी रहा, यहां सरकारी स्कूलों के महज 18.86 फीसदी ही बच्चे पास हुए जबकि प्राइवेट स्कूलों का परिणाम 49.74 रहा।
सरकारी स्कूलों पर 1270 करोड़ से अधिक खर्चने के बावजूद परिणाम में सुधार नहीं होने पर मंथन शुरू हो गया है। खराब परिणाम पर लोगों में रोष है। जगह-जगह लोग सरकारी स्कूलों पर ताला लगाकर स्टाफ बदलने की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन

शिक्षकों की कमी, गैर शिक्षण कार्यों में ड्यूटी से भी बिगड़ रहा परिणाम
खराब परिणाम के बाद अब मंथन शुरू हो गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 25 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले सरकारी स्कूलों और शिक्षकों की सूची बनाई जा रही है। शिक्षकों से इस बारे में जवाब मांगा जा रहा है। परिणाम खराब आने के अनेक कारण निकलकर आ रहे हैं। इनमें प्रमुख है शिखकों की कमी। प्रदेशभर के 1372 सेकेंडरी स्कूल में पीजीटी के 33 हजार पद हैं। इनमें से करीब 10 हजार पद रिक्त हैं। अनेक स्कूलों में हिंदी, सोशल साइंस के शिक्षक बच्चों को अंग्रेजी और मैथ पढ़ाने पर मजबूर हैं। इसके बाद दूसरा मुख्य कारण सामने आ रहा है गैर शिक्षण कार्य। पिछले साल शिक्षा सत्र 2017-18 के 324 दिनों में 125 दिन तो शिक्षक और विद्यार्थी विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रचार व कार्यक्रमों में उलझे रहे। इनमें गीता जयंती, दीन दयाल उपाध्याय जयंती, स्वर्ण जयंती उत्सव, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम, ट्रैफिक जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों की बीएलओ और सुपरवाइजर ड्यूटी शामिल हैं। 80 दिन अवकाश रहे। जिनमें रविवार के अवकाश के अलावा अन्य धार्मिंक अवकाश शामिल है। ऐसे में शिक्षण कार्य महज 121 दिन ही हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन्होंने बचाई लाज
प्रदेश के कुछ सरकारी स्कूल ऐसे भी हैं जिनका सौ फीसदी परिणाम रहा। भिवानी जिले के देवसर गांव के गवर्नमेंट ब्वॉयज स्कूल का परिणाम सौ फीसदी रहा। यहां 26 के 26 बच्चे पास हुए। 412 अंक लेकर छात्र विकास ने स्कूल में टॉप किया। इसी तरह प्रदेश के अनेक सरकारी स्कूलों का परिणाम 90 फीसदी से अधिक रहा।
प्रमुख मद जहां खर्च हुआ अधिक बजट (लाखों में)
वेतन 25500
मंथली स्टाइपेंड 12000
(बीपीएल/बीसीए)
मंथली स्टाइपेंड 8000
(एससी/एसटी)
शिक्षा अधिकार 48000
स्कूल बिल्डिंग 8000
यह रही जिलों में प्राइवेट और सरकारी स्कूलों की स्थिति
जिला परिणाम
अंबाला 44.18
प्राइवेट स्कूल 54.13
सरकारी स्कूल 44.6
भिवानी 53.88
प्राइवेट स्कूल 66.43
सरकारी स्कूल 30.96
फरीदाबाद 42.63
प्राइवेट स्कूल 45.66
सरकारी स्कूल 35.51
फतेहाबाद 48.99
प्राइवेट स्कूल 63.34
सरकारी स्कूल 27.52
गुरुग्राम 47.04
प्राइवेट स्कूल 59.26
सरकारी स्कूल 36.97
हिसार 52.70
प्राइवेट स्कूल 63.8
सरकारी स्कूल 44.7
झज्जर 61.42
प्राइवेट स्कूल 67.12
सरकारी स्कूल 45.71
जींद 52.08
प्राइवेट स्कूल 65.45
सरकारी स्कूल 41.74
करनाल 44.99
प्राइवेट स्कूल 53.86
सरकारी स्कूल 37.04
कैथल 49.37
प्राइवेट स्कूल 61.3
सरकारी स्कूल 38.77
कुरुक्षेत्र 48.69
प्राइवेट स्कूल 59.69
सरकारी स्कूल 45.49
महेंद्रगढ़ 65.30
प्राइवेट स्कूल 72.8
सरकारी स्कूल 37.35
पंचकुला 45.49
प्राइवेट स्कूल 45.21
सरकारी स्कूल 58.67
पानीपत 53.01
प्राइवेट स्कूल 58.94
सरकारी स्कूल 45.63
रेवाड़ी 64.25
प्राइवेट स्कूल 74.25
सरकारी स्कूल 35.08
रोहतक 54.85
प्राइवेट स्कूल 63.18
सरकारी स्कूल 43.45
सिरसा 52.46
प्राइवेट स्कूल 64.83
सरकारी स्कूल 38.66
सोनीपत 56.45
प्राइवेट स्कूल 61.57
सरकारी स्कूल 44.09
यमुनानगर 41.99
प्राइवेट स्कूल 46.9
सरकारी स्कूल 41.2
मेवात 39.80
प्राइवेट स्कूल 54.10
सरकारी स्कूल 35.74
पलवल 39.95
प्राइवेट स्कूल 49.74
सरकारी स्कूल 18.86
चरखी दादरी 69.76
प्राइवेट स्कूल 76.77
सरकारी स्कूल 50.66
वर्जन::::
परिणाम संतोषजनक नहीं है। शिक्षा का स्तर सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गर्मियों की छुट्टियों में भी री-अपीयर आने वाले विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाने का निर्णय लिया है। हमारा प्रयास रहता है कि शिक्षकों की गैर शिक्षण कार्यों में ड्यूटी ना लगे। इस बारे में मुख्यमंत्री से भी बातचीत हुई थी। मगर कुछ कार्य जैसे चुनाव के समय ड्यूटी आदि लगानी पड़ती है। स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए जेबीटी शिक्षकों की भर्ती की गई थी।’

-रामबिलास शर्मा, शिक्षा मंत्री
वर्जन:::::
हरियाणा में शिक्षा की मॉनिटरिंग सहीं तरीके से नहीं है। प्रदेश में अधिकतर डीईओ, डीईईओ, बीईओ, बीईईओ आदि अधिकतर पद रिक्त हैं। ऐसे में मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही। अधिकतर जगह प्रिंसिपल को ही अतिरिक्त चार्ज दे रखे हैं। दूसरा अब आठवीं तक न बच्चों पर शिक्षा का प्रेशर है और न ही शिक्षकों की जवाबदेही हो रही है। पांचवीं और आठवीं का बोर्ड बने तो शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
-धर्मपाल सिंह, अध्यक्ष, स्टेट स्कूल प्रिंसिपल एसोसिएशन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed