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जैविक खाद से खेत में बीमारियों की होती हैं रोकथाम: डॉ: आरके
Updated Wed, 25 Apr 2018 01:25 AM IST
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जैविक खाद से खेत में रोगों की होती है रोकथाम: डॉ. आरके
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी
कृषि एवं कल्याण विभाग हरियाणा और हिंदुस्तान गम एंड केमिकल्स भिवानी की ओर से खंड कैरू के गांव चांदवास में आयोजित ग्वार जागरूकता शिविर में किसानों को खेती में उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, हरी खाद, केंचुआ खाद के इस्तेमाल की जानकारी दी।
मंगलवार को गांव चांदवास में ग्वार जागरूकता शिविर में चौ. चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कीट विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर के सैनी ने कहा कि जैविक खादों के प्रयोग से भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। इससे भूमि का पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है और खारेपन का दुष्प्रभाव कम होता है। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों जैसे कपास का उखेड़ा आदि से भी निजात मिलती है। डॉ. सौनी ने कहा कि कुछ बीमारियों की रोकथाम बहुत कम लागत से बीज उपचार द्वारा सफलतापूर्वक की जा सकती है। इस अवसर पर सरपंच सतबीर सिंह के अलावा पूर्व सरपंच राजबीर, विजय, अजीत, बलवान, संदीप, विक्रम, दलबीर, जसविंद्र, संजय, मुंशीरमा, नरेंद्र, विरेंद्र, भागीरथ, रामबीर सहित लगभग 50 किसान मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी
कृषि एवं कल्याण विभाग हरियाणा और हिंदुस्तान गम एंड केमिकल्स भिवानी की ओर से खंड कैरू के गांव चांदवास में आयोजित ग्वार जागरूकता शिविर में किसानों को खेती में उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, हरी खाद, केंचुआ खाद के इस्तेमाल की जानकारी दी।
मंगलवार को गांव चांदवास में ग्वार जागरूकता शिविर में चौ. चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कीट विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर के सैनी ने कहा कि जैविक खादों के प्रयोग से भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। इससे भूमि का पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है और खारेपन का दुष्प्रभाव कम होता है। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों जैसे कपास का उखेड़ा आदि से भी निजात मिलती है। डॉ. सौनी ने कहा कि कुछ बीमारियों की रोकथाम बहुत कम लागत से बीज उपचार द्वारा सफलतापूर्वक की जा सकती है। इस अवसर पर सरपंच सतबीर सिंह के अलावा पूर्व सरपंच राजबीर, विजय, अजीत, बलवान, संदीप, विक्रम, दलबीर, जसविंद्र, संजय, मुंशीरमा, नरेंद्र, विरेंद्र, भागीरथ, रामबीर सहित लगभग 50 किसान मौजूद थे।
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