{"_id":"5a887f234f1c1b2a788b6512","slug":"141518894883-bhiwani-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क, सीवर व पानी को तरसे उद्योगपति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क, सीवर व पानी को तरसे उद्योगपति
Updated Sun, 18 Feb 2018 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सड़क, सीवर और पानी के लिए 20 साल से तरस रहे शहर के औद्योगिक क्षेत्र
भिवानी। करोड़ों रुपये टैक्स देने के बाद भी शहर के औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपति सड़क, सीवर, पेयजल के लिए भी तरस रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि दो दशक से चल रही फैक्ट्रियों मेें आज तक पेयजल व सीवरेज लाइन तक नहीं पहुंच पाई है। हालत यह है कि उद्योगपतियों को रोजाना 300 से 400 रुपये का पेयजल टैंक मंगवाना पड़ रहा है। वहीं, फैक्ट्रियों से निकलने वाला वेस्ट पानी रास्ते में जमा है।
शहर के रोहतक रोड से गांव हरीपुर तक इंडस्ट्रियल एरिया फैला हुआ है। यहां करीब 150 छोटे-बड़े उद्योग चल रहे हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के लिए ये उद्योग दशकों बाद भी तरस रहे हैं। शहर के सेक्टर-26 इंडस्ट्रियल एरिया व हरीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में सीवरेज व पेयजल लाइन तक नहीं है। 40 ऐसी फैक्ट्रियां हैं जहां रोजाना पानी के टैंकर मंगवाकर उद्योग चलाए रहे हैं।
जहां सीवर, वहां भी हालात बदतर
सेक्टर 26 स्थित औद्योगिक क्षेत्र में सीवर लाइन हैं। लेकिन, यहां भी हालात बदतर हैं। सीवर लाइन अक्सर जाम रहती है। नतीजतन, फैक्ट्रियों से निकला रसायन युक्त पानी सड़कों पर जमा रहता है। औद्योगिक क्षेत्र में आधा दर्जन जगहों पर सड़क पर जमा पानी से दुर्गंध फैल रही है।
विज्ञापन
पंचायत और नगर परिषद सीमा के चक्कर में उलझा विकास
चौंकाने वाली बात यह है कि इस क्षेत्र में फैक्टरी लगाने वाले उद्योगपति हरीपुर पंचायत के पास अपने प्रस्ताव लेकर जाते हैं तो वह यह सीमा नगर परिषद की बताते हैं। नगर परिषद के पास जाते हैं तो वह इसे हरीपुर गांव का एरिया बताकर पल्ला झाड़ लेते है। फैक्टरी मालिकों का कहना है कि ऐसे में करोड़ों रुपये का टैक्स देेने के बाद भी उन्हें ये सुविधाएं नसीब नहीं हो पा रही है।
--
खरीद कर मंगवा रहे पानी
यहां पर फैक्टरी लगाए करीब 20 साल हो रहे हैं, लेकिन पेयजल लाइन तक की सुविधा नहीं मिल पाई है। हालत यह है कि रोजाना एक से दो टैैंकर पानी खरीद कर मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है। प्रशासन और सरकार को लिखित में भी शिकायत कर मूलभूत सुविधाओं की मांग कर चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
धर्मेंद्र शर्मा, उद्योगपति
--
आज भी हैं सड़कें कच्ची
सड़क आज भी कच्ची होने के कारण माल की गाड़ी बरसात के दिनों में जमीन में धंस तक जाती है। आने जाने में भारी परेशानी के अलावा समय की बर्बादी भी होती है।
राजेश, ठेकेदार
सीवरेज लाइन ना होने से हो रही परेशानी
करीब 20 साल पहले यहां प्लास्टिक फैक्टरी लगाई थी, लेकिन आज तक सीवरेज लाइन नहीं डाली गई है। फैक्टरी के लिए जमीन के अंदर हौद बनाया हुआ है, लेकिन यह छह माह के अंदर ही भर जाता है। उसके अंदर से मल निकाल कर कहां डाले यह समस्या बनी हुई है।
- मनीराम बापोड़ा, उद्योगपति
साहब आधी कमाई तो पानी मंगवाने में ही लग जाती है
फैक्टरी में फेब्रीकेशन का ठेका लिया हुआ है। पानी का टैंकर मंगवाने में ही आधी कमाई खर्च हो जाती है। पेयजल लाइन यहां डालना बेहद जरूरी है।
-ठेकेदार, हेमंत
उद्योगपतियों को पानी और सीवर को लेकर कोई समस्या है तो पंचायत को आकर अवगत कराए। इसके बाद ग्राम पंचायत उचित कदम उठाएगी। इस बारे में कोई फैक्टरी संचालक उनसे नहीं मिला है।
-नरेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि
ग्राम पंचायत, हरीपुर
औद्योगिक क्षेत्र नगर परिषद सीमा से बाहर है। यहां की सीवर और पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी हरीपुर ग्राम पंचायत की है।
आरके मेहता, सचिव
नगर परिषद
विज्ञापन
भिवानी। करोड़ों रुपये टैक्स देने के बाद भी शहर के औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपति सड़क, सीवर, पेयजल के लिए भी तरस रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि दो दशक से चल रही फैक्ट्रियों मेें आज तक पेयजल व सीवरेज लाइन तक नहीं पहुंच पाई है। हालत यह है कि उद्योगपतियों को रोजाना 300 से 400 रुपये का पेयजल टैंक मंगवाना पड़ रहा है। वहीं, फैक्ट्रियों से निकलने वाला वेस्ट पानी रास्ते में जमा है।
शहर के रोहतक रोड से गांव हरीपुर तक इंडस्ट्रियल एरिया फैला हुआ है। यहां करीब 150 छोटे-बड़े उद्योग चल रहे हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के लिए ये उद्योग दशकों बाद भी तरस रहे हैं। शहर के सेक्टर-26 इंडस्ट्रियल एरिया व हरीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में सीवरेज व पेयजल लाइन तक नहीं है। 40 ऐसी फैक्ट्रियां हैं जहां रोजाना पानी के टैंकर मंगवाकर उद्योग चलाए रहे हैं।
विज्ञापन
जहां सीवर, वहां भी हालात बदतर
सेक्टर 26 स्थित औद्योगिक क्षेत्र में सीवर लाइन हैं। लेकिन, यहां भी हालात बदतर हैं। सीवर लाइन अक्सर जाम रहती है। नतीजतन, फैक्ट्रियों से निकला रसायन युक्त पानी सड़कों पर जमा रहता है। औद्योगिक क्षेत्र में आधा दर्जन जगहों पर सड़क पर जमा पानी से दुर्गंध फैल रही है।
विज्ञापन
पंचायत और नगर परिषद सीमा के चक्कर में उलझा विकास
चौंकाने वाली बात यह है कि इस क्षेत्र में फैक्टरी लगाने वाले उद्योगपति हरीपुर पंचायत के पास अपने प्रस्ताव लेकर जाते हैं तो वह यह सीमा नगर परिषद की बताते हैं। नगर परिषद के पास जाते हैं तो वह इसे हरीपुर गांव का एरिया बताकर पल्ला झाड़ लेते है। फैक्टरी मालिकों का कहना है कि ऐसे में करोड़ों रुपये का टैक्स देेने के बाद भी उन्हें ये सुविधाएं नसीब नहीं हो पा रही है।
--
खरीद कर मंगवा रहे पानी
यहां पर फैक्टरी लगाए करीब 20 साल हो रहे हैं, लेकिन पेयजल लाइन तक की सुविधा नहीं मिल पाई है। हालत यह है कि रोजाना एक से दो टैैंकर पानी खरीद कर मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है। प्रशासन और सरकार को लिखित में भी शिकायत कर मूलभूत सुविधाओं की मांग कर चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
धर्मेंद्र शर्मा, उद्योगपति
--
आज भी हैं सड़कें कच्ची
सड़क आज भी कच्ची होने के कारण माल की गाड़ी बरसात के दिनों में जमीन में धंस तक जाती है। आने जाने में भारी परेशानी के अलावा समय की बर्बादी भी होती है।
राजेश, ठेकेदार
सीवरेज लाइन ना होने से हो रही परेशानी
करीब 20 साल पहले यहां प्लास्टिक फैक्टरी लगाई थी, लेकिन आज तक सीवरेज लाइन नहीं डाली गई है। फैक्टरी के लिए जमीन के अंदर हौद बनाया हुआ है, लेकिन यह छह माह के अंदर ही भर जाता है। उसके अंदर से मल निकाल कर कहां डाले यह समस्या बनी हुई है।
- मनीराम बापोड़ा, उद्योगपति
साहब आधी कमाई तो पानी मंगवाने में ही लग जाती है
फैक्टरी में फेब्रीकेशन का ठेका लिया हुआ है। पानी का टैंकर मंगवाने में ही आधी कमाई खर्च हो जाती है। पेयजल लाइन यहां डालना बेहद जरूरी है।
-ठेकेदार, हेमंत
उद्योगपतियों को पानी और सीवर को लेकर कोई समस्या है तो पंचायत को आकर अवगत कराए। इसके बाद ग्राम पंचायत उचित कदम उठाएगी। इस बारे में कोई फैक्टरी संचालक उनसे नहीं मिला है।
-नरेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि
ग्राम पंचायत, हरीपुर
औद्योगिक क्षेत्र नगर परिषद सीमा से बाहर है। यहां की सीवर और पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी हरीपुर ग्राम पंचायत की है।
आरके मेहता, सचिव
नगर परिषद