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शांति से जीवन जीने के गुर बताए
Updated Sun, 24 Dec 2017 12:35 AM IST
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शांति से जीवन जीने के गुर बताए
बहल। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शनिवार को आयोजित तीन दिवसीय शिविर में साधकों को शांति से जीवन जीने के गुर सिखाए गए। साधकों को मेडिटेशन की विधि का अभ्यास करवाया गया तथा दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
बीके कर्ण राणा ने बताया कि व्यक्ति अपने आप को शरीर समझने लगता है जिससे दुख की उत्पत्ति होती है। अगर व्यक्ति अपने को आत्मा समझने लगे तो सुख की अनुभूति होगी। इसलिए, हर एक को दिन में कई बार यह संकल्प लेना चाहिए कि मैं शांतिस्वरूप आत्मा हूं। उन्होंने कहा कि आज के दिन सुख के साधन तो बढ़ते जा रहे हैं लेकिन मन की शांति घटती जा रही है। जो झगड़ा, विसाद एवं मानव मन में विकारों का कारण बन रही है।
कार्यक्रम में साधकों को गीता के रहस्यों को समझने, स्वीकार करने और जीवन में उतारने की नसीहत दी गई। संचालिका बीके शकुंतला ने कहा कि ऐसे शिविर समाज में समरसता की भावना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस मौके पर जीआर शर्मा, महावीर प्रसाद, नरसिंह, सागरमल, रोशन, सुनील शर्मा, रघुबीर सांगवान सहित आदि मौजूद रहे।
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बहल। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शनिवार को आयोजित तीन दिवसीय शिविर में साधकों को शांति से जीवन जीने के गुर सिखाए गए। साधकों को मेडिटेशन की विधि का अभ्यास करवाया गया तथा दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
बीके कर्ण राणा ने बताया कि व्यक्ति अपने आप को शरीर समझने लगता है जिससे दुख की उत्पत्ति होती है। अगर व्यक्ति अपने को आत्मा समझने लगे तो सुख की अनुभूति होगी। इसलिए, हर एक को दिन में कई बार यह संकल्प लेना चाहिए कि मैं शांतिस्वरूप आत्मा हूं। उन्होंने कहा कि आज के दिन सुख के साधन तो बढ़ते जा रहे हैं लेकिन मन की शांति घटती जा रही है। जो झगड़ा, विसाद एवं मानव मन में विकारों का कारण बन रही है।
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कार्यक्रम में साधकों को गीता के रहस्यों को समझने, स्वीकार करने और जीवन में उतारने की नसीहत दी गई। संचालिका बीके शकुंतला ने कहा कि ऐसे शिविर समाज में समरसता की भावना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस मौके पर जीआर शर्मा, महावीर प्रसाद, नरसिंह, सागरमल, रोशन, सुनील शर्मा, रघुबीर सांगवान सहित आदि मौजूद रहे।
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