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मनोहर लाल सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों की टोली में शामिल थे 'कुंडू', अब 'भाजपा और हुड्डा' को लगे खटकने

Thu, 25 Feb 2021 03:19 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Feb 2021 03:19 PM IST
सार

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जिनका रोहतक व झज्जर जिले में एक छत्र राज रहा है, वे भी बलराज कुंडू की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर चिंतित हैं। अगर बलराज कुंडू का कद बढ़ता है तो वे दीपेंद्र के लिए भी बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंदी के तौर पर उभर सकते हैं...

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Balraj Kundu is political rival of Haryana CM Manohar Lal khattar and Bhupinder Hooda both
बलराज कुंडू - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

साल 2019 में जब हरियाणा विधानसभा चुनाव का नतीजा आया तो भाजपा के खाते में 40 सीटें आई थीं। मनोहर लाल दोबारा से मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकें, इसके लिए उन्हें कम से कम छह विधायकों की जरूरत थी। तभी रणजीत सिंह, गोपाल कांडा और बलराज कुंडू सहित सात निर्दलीय विधायकों ने भाजपा को समर्थन दे दिया था। बाद में जजपा, जिसके पास दस विधायक थे, वह भी सरकार में शामिल हो गई। हालांकि बाद में कुंडू की पटरी मनोहर लाल सरकार के साथ नहीं बैठ सकी और उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया।

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कुंडू किसान महापंचायतों में सक्रिय तौर से भाग लेने लगे। गुरुवार को आयकर विभाग की टीमों ने उनके रोहतक और गुरुग्राम सहित कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे हैं। अगर इन छापों का राजनीतिक अर्थ निकाला जाए तो बलराज कुंडू मुख्यमंत्री मनोहर लाल मनोहर लाल और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को खटक रहे हैं। वे इन दोनों नेताओं की आंखों का कांटा बन चुके थे।
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प्रदेश की राजनीति के जानकार बताते हैं, पिछले कुछ समय से जो कुछ घटित हो रहा था, उसके मद्देनजर ये छापे अप्रत्याशित नहीं हैं। रोहतक लोकसभा क्षेत्र की महम विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने शुरू में भाजपा सरकार को समर्थन दिया था। कुंडू को यह उम्मीद थी कि उन्हें मंत्री पद दिया जाएगा, लेकिन उनका नंबर नहीं आया। चेयरमैन के पद पर भी कुंडू को नियुक्त नहीं किया गया। हालांकि बाद में कुंडू ने कहा था कि उन्हें चेयरमैन पद का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने खुद स्वीकार नहीं किया था। रोहतक शहर के पूर्व विधायक और भाजपा सरकार में राज्य मंत्री रहे मनीष ग्रोवर के साथ उनकी राजनीतिक तकरार सार्वजनिक हो गई थी। बलराज कुंडू ऐसा मानते थे कि उन्हें मंत्री का पद न मिलने के पीछे कथित तौर पर ग्रोवर एक बड़ी वजह रहे हैं।
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बलराज कुंडू ने ग्रोवर पर उनके मंत्री पद के दौरान हुए कार्यों को लेकर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को इस मामले में विधानसभा पटल पर जवाब देना पड़ा था। उन्होंने कहा था कि ग्रोवर पर लगाए गए आरोपों की जांच कर ली गई है। जांच में भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बाद बलराज कुंडू, भाजपा और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के खिलाफ हमलावर हो गए। उन पर सत्ता पक्ष की ओर से ऐसे आरोप भी लगाए कि वे किसान आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं। यह भी कहा गया कि कुंडू ने आंदोलन के दौरान किसानों को आर्थिक मदद भी पहुंचाई है। टीकरी बॉर्डर के धरना स्थल पर चल रहे भंडारे में कुंडू का भारी आर्थिक सहयोग रहा है। आयकर विभाग के छापों के बाद कुंडू के रोहतक स्थित कार्यालय द्वारा कहा गया है कि ये राजनीति से प्रेरित छापे हैं। बलराज कुंडू का का स्टाफ आयकर विभाग की टीमों को उनकी जांच पड़ताल में पूरा सहयोग दे रहा है।

हरियाणा राजनीति के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र कुमार सैनी बताते हैं, कुंडू के साथ लोगों का भारी जनसमर्थन है, यह बात भाजपा और कांग्रेस के नेता अच्छी तरह समझ रहे हैं। वे भविष्य में दोनों पार्टियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर सकते हैं। खासतौर पर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जिनका रोहतक व झज्जर जिले में एक छत्र राज रहा है, वे भी बलराज कुंडू की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर चिंतित हैं। उनके बेटे एवं राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक से कई बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। अगर बलराज कुंडू का कद बढ़ता है तो वे दीपेंद्र के लिए भी बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंदी के तौर पर उभर सकते हैं। मौजूदा कार्रवाई को राजनीतिक दबाव का एक तरीका कहा जाएगा।

दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि इस मामले से मनोहर लाल सरकार का कोई लेना देना नहीं है। आयकर विभाग के छापे कानूनी कार्रवाई का हिस्सा हैं। इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। विपक्षी दल कांग्रेस का यह कहना कि वह सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाएगी, भाजपा को इससे कोई मतलब नहीं है। मनोहर लाल सरकार पूर्ण बहुमत में है।


भाजपा नेताओं के मुताबिक भाजपा को जजपा के दस विधायकों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है। बता दें कि 90 सदस्यीय विधानसभा में अब विधायकों की संख्या 88 रह गई है। इनेलो विधायक अभय चौटाला ने त्यागपत्र दे दिया था, जबकि कांग्रेस पार्टी के कालका से विधायक प्रदीप चौधरी को एक मामले में सजा होने के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इसके बाद सदन में भाजपा के 40, कांग्रेस के 30, जजपा के 10, निर्दलीय 7 और एचएलपी का एक विधायक है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा अगर अविश्वास प्रस्ताव लाते हैं तो उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। भाजपा और उसके सहयोगी दल पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं।

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