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हरियाणा में आपसी खींचतान की भेंट चढ़ा टीएनए
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 26 May 2014 11:31 PM IST
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हरियाणा में शिक्षा विभाग की ओर से अध्यापकों का टीचर नीड असेसमेंट (टीएनए) टेस्ट आखिरकार विभाग और अध्यापकों की खींचतान की भेंट चढ़ गया।
विभाग के लाख भरोसा जताने के बाद भी सोमवार को अध्यापकों ने परीक्षा का विरोध किया। हरियाणा के अध्यापक संगठनों ने दावा किया है कि प्रदेश में विरोध शत प्रतिशत सफल रहा है।
हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास इस बाबत कोई जवाब नहीं है। विभाग ने इस संदर्भ में बयान तो जारी किया, लेकिन यह खुलासा नहीं किया कि परीक्षा में कितने अध्यापक बैठे।
परीक्षा का आयोजन एससीईआरटी गुड़गांव और भिवानी बोर्ड द्वारा करवाया गया था। एससीईआरटी गुड़गांव के निदेशक की ओर से इस संदर्भ में प्रेस बयान जारी कर कहा गया है कि शिक्षा में सुधार के लिए टीएनए का आयोजन किया गया था।
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26 मई को हुए इस सर्वेक्षण में खंड स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। अध्यापकों को इस सर्वेक्षण में भाग लेना था, लेकिन विभिन्न अध्यापक संगठनों की नकारात्मक सोच के कारण इसका विरोध किया गया।
इससे कुछ अध्यापक सर्वेक्षण में शामिल नहीं हो पाए। निदेशक के मुताबिक , यह खुशी की बात है कि 90 प्रतिशत से अधिक अध्यापक स्वेच्छा से परीक्षा में भाग लेने के लिए केंद्र तक पहुंचे। विभाग उनका आभार प्रकट करता है।
उनका केंद्रों पर पहुंचना यह दर्शाता है कि वे शिक्षा में गुणवत्ता और सुधार के प्रति गंभीर हैं और विभाग के सकारात्मक प्रयास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं।
टीचरों में था अपनी गलती उजागर होने का डर!
एससीईआरटी गुड़गांव के निदेशक की ओर से जारी प्रेस बयान में कहा गया कि अध्यापक संघों की नकारात्मक सोच के कारण टीएनए का विरोध हुआ। फिर भी 90 फीसदी से अधिक अध्यापक अपनी मरजी से परीक्षा देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अध्यापकों में यह नकारात्मकता उस अनजाने भय के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें व्यक्ति अपनी गलती उजागर होने से डरता है।
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विभाग के लाख भरोसा जताने के बाद भी सोमवार को अध्यापकों ने परीक्षा का विरोध किया। हरियाणा के अध्यापक संगठनों ने दावा किया है कि प्रदेश में विरोध शत प्रतिशत सफल रहा है।
हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास इस बाबत कोई जवाब नहीं है। विभाग ने इस संदर्भ में बयान तो जारी किया, लेकिन यह खुलासा नहीं किया कि परीक्षा में कितने अध्यापक बैठे।
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परीक्षा का आयोजन एससीईआरटी गुड़गांव और भिवानी बोर्ड द्वारा करवाया गया था। एससीईआरटी गुड़गांव के निदेशक की ओर से इस संदर्भ में प्रेस बयान जारी कर कहा गया है कि शिक्षा में सुधार के लिए टीएनए का आयोजन किया गया था।
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26 मई को हुए इस सर्वेक्षण में खंड स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। अध्यापकों को इस सर्वेक्षण में भाग लेना था, लेकिन विभिन्न अध्यापक संगठनों की नकारात्मक सोच के कारण इसका विरोध किया गया।
इससे कुछ अध्यापक सर्वेक्षण में शामिल नहीं हो पाए। निदेशक के मुताबिक , यह खुशी की बात है कि 90 प्रतिशत से अधिक अध्यापक स्वेच्छा से परीक्षा में भाग लेने के लिए केंद्र तक पहुंचे। विभाग उनका आभार प्रकट करता है।
उनका केंद्रों पर पहुंचना यह दर्शाता है कि वे शिक्षा में गुणवत्ता और सुधार के प्रति गंभीर हैं और विभाग के सकारात्मक प्रयास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं।
टीचरों में था अपनी गलती उजागर होने का डर!
एससीईआरटी गुड़गांव के निदेशक की ओर से जारी प्रेस बयान में कहा गया कि अध्यापक संघों की नकारात्मक सोच के कारण टीएनए का विरोध हुआ। फिर भी 90 फीसदी से अधिक अध्यापक अपनी मरजी से परीक्षा देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अध्यापकों में यह नकारात्मकता उस अनजाने भय के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें व्यक्ति अपनी गलती उजागर होने से डरता है।