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गरजे कर्मचारी, इंतजार के बाद मिली रोडवेज की सवारी
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अंबाला/बराड़ा। दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पहले दिन सोमवार को जिले में मिलाजुला असर दिखाई दिया। सुबह सभी कर्मचारियों ने विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगें रखी। दूसरी ओर, रोडवेज का चक्का जाम होने के कारण लोगों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा। वहीं बैंक कार्यालय बंद रहे। इससे आमजन को परेशानी झेलनी पड़ी। इसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी। अधिकतर सरकारी बैंक खुल गए और बसों का संचालन पहले की तरह होने लगा।
संगठन पदाधिकारियों ने मंगलवार को भी हड़ताल में बढ़चढ़ कर भाग लेने और ऐसे ही हड़ताल जारी रखने के लिए प्रेरित किया। हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए कहा कि सरकार जनविरोधी कार्य कर रही है। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार सरकारी विभागों का धड़ल्ले से निजीकरण कर रही है। इससे रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन प्राप्त हो चुका है। प्रदर्शनकारियों की माने तो देश में आर्थिक विकास की गति को बढ़ाने के लिए निजीकरण पर बल दिया जा रहा है। वह दिन दूर नहीं जब सभी विभाग प्राइवेट हाथों में होंगे, केवल सरकार चलाने वाले ही सरकारी होंगे। इस हड़ताल में रोडवेज विभाग, बैंक कर्मचारी, पब्लिक हेल्थ विभाग, राजस्व विभाग, बिजली कर्मचारी, शिक्षा विभाग, नगरपालिका, आशा वर्कर, पशुपालन विभाग, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के सैकड़ों कर्मचारी शामिल हुए।
बता दें कि इस हड़ताल से जहां रोडवेज बसें बंद रही, वहीं बैंकों सहित अनेकों विभागों में कामकाज प्रभावित रहा। राष्ट्रव्यापी हड़ताल में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों, नगर निगमों, परिषदों, पालिकाओं, पंचायत राज संस्थाओं, सोसायटी व विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत लाखों कर्मचारी शामिल रहे। दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी सहित देश की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट इंपलाईज फेडरेशन सहित सैकड़ों कर्मचारी संघों ने संयुक्त रूप से किया है।
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इन मांगों को पूरा कराने के लिए हड़ताल कर रहे कर्मचारी
प्रमुख मांगों में पीटीआई व ग्रुप डी खेल कोटे के कर्मचारियों सहित छंटनी ग्रस्त सभी कर्मचारियों की सेवाएं बहाल करने, एनएचएम, गेस्ट टीचर सहित सभी प्रकार के अनियमित व ठेका कर्मचारियों को पक्का करने, पक्का होने तक समान काम समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान करने, 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन देना शामिल है। इसके अलावा नेशनल मुद्री करण पाइपलाइन योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं विभागों को निजीकरण से बचाने, नए पद सृजित करने, लिपिक का वेतन बढ़ाने, लेबर कोड, बिजली बिल व नई शिक्षा नीति वापस लेने, खेती टिकाऊ व लाभकर किए जाने, एसीपी लाभ देने बारे, एचआरए के स्लैब में बदलाव, डीए एरियर का भुगतान बारे, 65-70-75 व 80 की आयु उपरांत पेंशनर्स की बेसिक पेंशन में पांच प्रतिशत बढ़ोतरी करने, हाउस रेंट के स्लैब में 9-18-27 प्रतिशत का बदलाव करने, 18 महीने के एरियर का भुगतान करने, नेशनल एजूकेशन पॉलिसी, लेबर कोड्स, बिजली संशोधन बिल-2022 को रद्द करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने, एक्स ग्रेसिया रोजगार स्कीम में लगाई गई शर्तों को हटाने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और आंगनबाड़ी, आशा व मिड डे मील वर्करों को कर्मचारी का दर्जा देने आदि प्रमुख मांगें हैं।
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संगठन पदाधिकारियों ने मंगलवार को भी हड़ताल में बढ़चढ़ कर भाग लेने और ऐसे ही हड़ताल जारी रखने के लिए प्रेरित किया। हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए कहा कि सरकार जनविरोधी कार्य कर रही है। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार सरकारी विभागों का धड़ल्ले से निजीकरण कर रही है। इससे रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन प्राप्त हो चुका है। प्रदर्शनकारियों की माने तो देश में आर्थिक विकास की गति को बढ़ाने के लिए निजीकरण पर बल दिया जा रहा है। वह दिन दूर नहीं जब सभी विभाग प्राइवेट हाथों में होंगे, केवल सरकार चलाने वाले ही सरकारी होंगे। इस हड़ताल में रोडवेज विभाग, बैंक कर्मचारी, पब्लिक हेल्थ विभाग, राजस्व विभाग, बिजली कर्मचारी, शिक्षा विभाग, नगरपालिका, आशा वर्कर, पशुपालन विभाग, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के सैकड़ों कर्मचारी शामिल हुए।
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बता दें कि इस हड़ताल से जहां रोडवेज बसें बंद रही, वहीं बैंकों सहित अनेकों विभागों में कामकाज प्रभावित रहा। राष्ट्रव्यापी हड़ताल में सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों, नगर निगमों, परिषदों, पालिकाओं, पंचायत राज संस्थाओं, सोसायटी व विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत लाखों कर्मचारी शामिल रहे। दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी सहित देश की दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट इंपलाईज फेडरेशन सहित सैकड़ों कर्मचारी संघों ने संयुक्त रूप से किया है।
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इन मांगों को पूरा कराने के लिए हड़ताल कर रहे कर्मचारी
प्रमुख मांगों में पीटीआई व ग्रुप डी खेल कोटे के कर्मचारियों सहित छंटनी ग्रस्त सभी कर्मचारियों की सेवाएं बहाल करने, एनएचएम, गेस्ट टीचर सहित सभी प्रकार के अनियमित व ठेका कर्मचारियों को पक्का करने, पक्का होने तक समान काम समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान करने, 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन देना शामिल है। इसके अलावा नेशनल मुद्री करण पाइपलाइन योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं विभागों को निजीकरण से बचाने, नए पद सृजित करने, लिपिक का वेतन बढ़ाने, लेबर कोड, बिजली बिल व नई शिक्षा नीति वापस लेने, खेती टिकाऊ व लाभकर किए जाने, एसीपी लाभ देने बारे, एचआरए के स्लैब में बदलाव, डीए एरियर का भुगतान बारे, 65-70-75 व 80 की आयु उपरांत पेंशनर्स की बेसिक पेंशन में पांच प्रतिशत बढ़ोतरी करने, हाउस रेंट के स्लैब में 9-18-27 प्रतिशत का बदलाव करने, 18 महीने के एरियर का भुगतान करने, नेशनल एजूकेशन पॉलिसी, लेबर कोड्स, बिजली संशोधन बिल-2022 को रद्द करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने, एक्स ग्रेसिया रोजगार स्कीम में लगाई गई शर्तों को हटाने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और आंगनबाड़ी, आशा व मिड डे मील वर्करों को कर्मचारी का दर्जा देने आदि प्रमुख मांगें हैं।