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Ambala News: दो ऑपरेटरों के नाम 50 गांवों का काम
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अंबाला छावनी तहसील में टूटी कुर्सियां। संवाद
अंबाला। छावनी तहसील में दो ऑपरेटरों के जिम्मे 50 गांवों और शहरी क्षेत्रों के इंतकाल और जमाबंदी का काम है। ऐसे में यदि किसी को इंतकाल कराना है या फिर जमाबंदी लेनी है तो आपको इंतजार करना होगा, क्योंकि दो ऑपरेटरों के सहारे 50 गांवों सहित शहरी क्षेत्र के इंतकाल और जमाबंदी का काम है।
इस कारण इन दोनों पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है, वहीं तहसील आने वाले लोगों को भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों की परेशानी भी बढ़ रही है। अब यह जानकारी भी सामने आई है कि इन दो ऑपरेटरों में से भी एक को दूसरी जगह पर लगाने की तैयारी चल रही है। अगर ऐसा हुआ तो तहसील में काम के लिए घंटों नहीं कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा।
तहसील में काम कराने आए गौरव, संतोष, किरण, प्रवीण और दीपक ने बताया कि सुबह से इंतकाल कराने के लिए खड़े हैं, लेकिन ऑपरेटरों के पास इंतकाल के ढेर लगे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत पोर्टल को लेकर है, जब भी इंतकाल की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की जाती है, तब सर्वर डाउन हो जाता है या फिर साइट बंद हो जाती है।
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जमाबंदी का आलम भी ऐसा ही है, दिन के समय भीड़ रहने के कारण ऑपरेटरों को जमाबंदी निकालने में काफी दिक्कत होती है। इस वजह से लोग रजिस्ट्री और इंतकाल के लिए कई बार दुर्व्यवहार पर उतर आते हैं। इसलिए इंतकाल निकालने का काम भी दोपहर बाद यानी तीन से शाम पांच बजे तक किया जा सकता है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंबाला कैंट की तहसील अलग होने के बाद जो सुविधाएं विधानसभा क्षेत्र के लोगों को मिलनी चाहिए थी, वो कर्मचारियों की कमी की वजह से अभी भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
दूसरी ड्यूटी से परेशान पटवारी
कहने को अंबाला कैंट तहसील में तीन से चार पटवारी हैं, लेकिन वे भी दूसरे प्रशासनिक कार्यों में लगे हैं। इससे आमजन को काम के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ता है। अगर पटवारी सीट पर मिल जाए तो दस्तावेज ढूंढने और फिर ऑनलाइन इंतकाल चढ़ाने में ही कई दिन निकल जाते हैं। ऐसे में लोग भी बार-बार चक्कर मारकर थक जाते हैं।
सुविधाओं के नाम पर टूटी कुर्सी, एकमात्र जनरेटर
ऑनलाइन पोर्टल में दिक्कत आना रोजाना की बात है, वहीं दूसरी बड़ी परेशानी बैठने की है। जिस जगह पर रजिस्ट्री और इंतकाल सहित जमाबंदी का कार्य हो रहा है, वहां बड़ी मुश्किल से आठ से दस लोगों के बैठने के लिए ही कुर्सियां हैं, जबकि यहां रोजाना आने वाले लोगों की संख्या 100 से अधिक है, मजबूरन उन्हें या तो गैलरी में या फिर नीचे फर्श पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। अगर इस दौरान बिजली चली गई तो फिर काम चौपट हो जाता है क्योंकि तहसील में एक ही जनरेटर है, जिस पर तहसील में कार्यरत लगभग 20 से अधिक विभागों का लोड है, प्राप्त जानकारी अनुसार जनरेटर में डीजल डलवाने के लिए भी अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
पटवारी को मिले कंप्यूटर तो बेहतर हो काम
जमीन का इंतकाल और जमाबंदी के दोनों काम पटवारी के सुपुर्द हैं, ऐसे में अगर उनकी सीट पर ही एक कंप्यूटर लग जाए और ऑपरेटर मिल जाए तो फिर लोगों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी और उनके सारे काम एक ही सीट पर हो जाएंगे। नाम न छापने की शर्त पर पटवारियों ने बताया कि अगर ऐसा हो जाए तो उनकी आधी से ज्यादा परेशानी खत्म हो जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी।
वर्जन
दो ऑपरेटरों पर काम का काफी बोझ है। ऑपरेटरों की संख्या बढ़ाने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उल्टा अब दोनों ऑपरेटरों में से भी एक ऑपरेटर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। अगर ऐसा हुआ तो लोगों की परेशानी काफी बढ़ जाएगी। अन्य सुविधाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा।
सुनील कुमार, नायब तहसीलदार, कैंट तहसील।
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इस कारण इन दोनों पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है, वहीं तहसील आने वाले लोगों को भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों की परेशानी भी बढ़ रही है। अब यह जानकारी भी सामने आई है कि इन दो ऑपरेटरों में से भी एक को दूसरी जगह पर लगाने की तैयारी चल रही है। अगर ऐसा हुआ तो तहसील में काम के लिए घंटों नहीं कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा।
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तहसील में काम कराने आए गौरव, संतोष, किरण, प्रवीण और दीपक ने बताया कि सुबह से इंतकाल कराने के लिए खड़े हैं, लेकिन ऑपरेटरों के पास इंतकाल के ढेर लगे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत पोर्टल को लेकर है, जब भी इंतकाल की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की जाती है, तब सर्वर डाउन हो जाता है या फिर साइट बंद हो जाती है।
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जमाबंदी का आलम भी ऐसा ही है, दिन के समय भीड़ रहने के कारण ऑपरेटरों को जमाबंदी निकालने में काफी दिक्कत होती है। इस वजह से लोग रजिस्ट्री और इंतकाल के लिए कई बार दुर्व्यवहार पर उतर आते हैं। इसलिए इंतकाल निकालने का काम भी दोपहर बाद यानी तीन से शाम पांच बजे तक किया जा सकता है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंबाला कैंट की तहसील अलग होने के बाद जो सुविधाएं विधानसभा क्षेत्र के लोगों को मिलनी चाहिए थी, वो कर्मचारियों की कमी की वजह से अभी भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
दूसरी ड्यूटी से परेशान पटवारी
कहने को अंबाला कैंट तहसील में तीन से चार पटवारी हैं, लेकिन वे भी दूसरे प्रशासनिक कार्यों में लगे हैं। इससे आमजन को काम के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ता है। अगर पटवारी सीट पर मिल जाए तो दस्तावेज ढूंढने और फिर ऑनलाइन इंतकाल चढ़ाने में ही कई दिन निकल जाते हैं। ऐसे में लोग भी बार-बार चक्कर मारकर थक जाते हैं।
सुविधाओं के नाम पर टूटी कुर्सी, एकमात्र जनरेटर
ऑनलाइन पोर्टल में दिक्कत आना रोजाना की बात है, वहीं दूसरी बड़ी परेशानी बैठने की है। जिस जगह पर रजिस्ट्री और इंतकाल सहित जमाबंदी का कार्य हो रहा है, वहां बड़ी मुश्किल से आठ से दस लोगों के बैठने के लिए ही कुर्सियां हैं, जबकि यहां रोजाना आने वाले लोगों की संख्या 100 से अधिक है, मजबूरन उन्हें या तो गैलरी में या फिर नीचे फर्श पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। अगर इस दौरान बिजली चली गई तो फिर काम चौपट हो जाता है क्योंकि तहसील में एक ही जनरेटर है, जिस पर तहसील में कार्यरत लगभग 20 से अधिक विभागों का लोड है, प्राप्त जानकारी अनुसार जनरेटर में डीजल डलवाने के लिए भी अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
पटवारी को मिले कंप्यूटर तो बेहतर हो काम
जमीन का इंतकाल और जमाबंदी के दोनों काम पटवारी के सुपुर्द हैं, ऐसे में अगर उनकी सीट पर ही एक कंप्यूटर लग जाए और ऑपरेटर मिल जाए तो फिर लोगों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी और उनके सारे काम एक ही सीट पर हो जाएंगे। नाम न छापने की शर्त पर पटवारियों ने बताया कि अगर ऐसा हो जाए तो उनकी आधी से ज्यादा परेशानी खत्म हो जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी।
वर्जन
दो ऑपरेटरों पर काम का काफी बोझ है। ऑपरेटरों की संख्या बढ़ाने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उल्टा अब दोनों ऑपरेटरों में से भी एक ऑपरेटर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। अगर ऐसा हुआ तो लोगों की परेशानी काफी बढ़ जाएगी। अन्य सुविधाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा।
सुनील कुमार, नायब तहसीलदार, कैंट तहसील।

अंबाला छावनी तहसील में टूटी कुर्सियां। संवाद