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Ambala News: 1.22 करोड़ की धोखाधड़ी में आरोपी महिला को नहीं मिली जमानत
Tue, 18 Nov 2025 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Tue, 18 Nov 2025 01:48 AM IST
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अंबाला सिटी। ओटीटी एप में निवेश के नाम पर 1.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता महिला के अधिवक्ता ने आरोपों को झूठा व मनगढ़ंत बताया। आगे बताया कि यह मामला व्यापार में हुए नुकसान से जुड़ा है। जिसे साझा किया जाना था। वहीं शिकायतकर्ता के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता पूरी धोखाधड़ी में सक्रिय रूप से शामिल थीं।
मामले को उजागर करने के लिए याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी को अग्रिम जमानत का विवेकाधीन लाभ नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के व्यक्तियों को अग्रिम जमानत पर रिहा करना न्याय के हित में नहीं होगा क्योंकि यह चल रही जांच के लिए हानिकारक होगा। न्यायालय ने अपने फैसले में कुछ मुख्य बातों पर ध्यान दिलाया, जिसमें बताया गया कि एफआईआर के अनुसार, याचिकाकर्ता महिला ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर भारी मुनाफे का लालच देकर शिकायतकर्ता नेहा शर्मा से 1.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
अभियोजन पक्ष द्वारा दाखिल जवाब के मुताबिक, सह-आरोपी और उनके पति विक्रम कुमार ने याचिकाकर्ता के खाते में 72 लाख ट्रांसफर किए थे। कोर्ट ने माना कि सच्चे तथ्यों का पता लगाने के लिए याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ बहुत आवश्यक है और कथित अपराधों के बारे में सच्चाई उजागर करने के लिए मामले में गहरी जांच की आवश्यकता है। यह मामला धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है, जोकि अंबाला सिटी के सेक्टर 9 पुलिस स्टेशन में 10 अक्तूबर को दर्ज किया गया था।
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मामले को उजागर करने के लिए याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी को अग्रिम जमानत का विवेकाधीन लाभ नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के व्यक्तियों को अग्रिम जमानत पर रिहा करना न्याय के हित में नहीं होगा क्योंकि यह चल रही जांच के लिए हानिकारक होगा। न्यायालय ने अपने फैसले में कुछ मुख्य बातों पर ध्यान दिलाया, जिसमें बताया गया कि एफआईआर के अनुसार, याचिकाकर्ता महिला ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर भारी मुनाफे का लालच देकर शिकायतकर्ता नेहा शर्मा से 1.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
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अभियोजन पक्ष द्वारा दाखिल जवाब के मुताबिक, सह-आरोपी और उनके पति विक्रम कुमार ने याचिकाकर्ता के खाते में 72 लाख ट्रांसफर किए थे। कोर्ट ने माना कि सच्चे तथ्यों का पता लगाने के लिए याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ बहुत आवश्यक है और कथित अपराधों के बारे में सच्चाई उजागर करने के लिए मामले में गहरी जांच की आवश्यकता है। यह मामला धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है, जोकि अंबाला सिटी के सेक्टर 9 पुलिस स्टेशन में 10 अक्तूबर को दर्ज किया गया था।
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