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एक मंच पर आए सभी धर्मों के संत
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अंबाला सिटी। सामाजिक समरता दिवस पर रविवार को खन्ना पैलेस में हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाई धर्म के संत एकजुट हुए। एक मंच पर जुटे सभी धर्मों व संप्रदायों के अनुयायियों ने एक साथ मिलकर राष्ट्र की एकता, अखंडता तथा संप्रभुता की रक्षा करने का संदेश दिया। साथ ही देश को विश्वगुरु का सम्मानित दर्जा दिलवाने के उद्देश्य से आपसी भेदभाव व संकीर्णता को खत्म कर वसुधैव कुटुंबकम का भी संकल्प लिया। संतों ने कहा कि सारी पृथ्वी को अपने परिवार के समान मानना चाहिए ताकि सभी धर्मों व संप्रदायों में प्रेम तथा भाईचारे की भावना जागृत हो और जातीय सांप्रदायिक भेदभावों से ऊपर उठकर प्राणी मात्र में समान आत्म तत्व का दर्शन करने की प्रेरणा मिल सके। इस दौरान पीकेआर जैन शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
सामाजिक समरता दिवस का आयोजन एसएस जैन महासभा की ओर से जैनाचार्य आत्माराम महाराज एवं वाचनाचार्य मनोहर मुनि महाराज की जन्म जयंती के मौके पर किया गया। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय जैन कांफ्रेंस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नेमीचंद जैन चोपड़ा पाली, ध्वजारोहण हरियाणा वेयर हाउसिंग के निदेशक अनुभव अग्रवाल ने किया। स्वामी अवधेशानंद गिरि, स्वामी ज्ञानानंद, सत्गुरु उदय सिंह, स्वामी शांता नंद, संपूर्णानंद ब्रहम्चारी, बौद्ध गुरु आचार्य कर्मा, हजरत ए हिंद मौलाना हबीबुर्र रहमान क़ाबली, मौलाना कोकब, साध्वी त्रिपता भारती ने प्रवचन किए। कार्यक्रम के दौरान उप प्रर्वतक पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों को अपनी भौतिक उपलब्धियों पर गर्व है, परंतु हमारे देश को अपनी समृद्ध गौरवपूर्ण, अध्यात्मिक विरासत पर नाज है। हीरों में कोहिनूर, सौरमंडल में सूर्य, नदियों में गंगा, समुद्रों में क्षीर सागर फूलों में शतपत्र कमल की तरह भारतीय संस्कृति विश्व में सिरमौर है। हमारी संस्कृति कर्तव्य को निभाने को भी धर्म कहती है परंतु कर्तव्य के साथ पवित्रता, श्रद्धा तथा विश्वास को भी महत्व देती है। धर्म उत्कृष्ट मंगल है, अहिंसा, संयम तथा तप धर्म है, जिसके मन में धर्म विद्यमान रहता है, देवता भी उसे नमस्कार करते हैं। किसी को दुख न देना सबसे बड़ा धर्म है, तथा दूसरों की निंदा करना सबसे बड़ा पाप है। प्रत्येक धर्म उन सब गुणों पर जोर देता है जो हर व्यक्ति में होने चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म के अभाव में जीवन दूषित हो जाता है। तभी भगवान महावीर ने मनुष्य की एक जाति बतलाई है। वर्ण व्यवस्था सारे व्यवहारों को सुचारु रूप से चलने के लिए स्थापित की गई थी। परंतु मौलिक रूप से सभी मानव समान है। इस मौके पर विनोद जैन, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना, प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रचारक प्रेम गोयल, किशोर कांत, जैन सभा के चातुर्मास प्रबन्धन समिति ने शहर के अध्यक्ष धर्मपाल जैन, चातुर्मास समिति के चेयरमैन जिनेश जैन, सभी पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, महिला संगठन एवं युवक मंडल व अन्य मौजूद रहे।
इस दौरान अग्नि अखाड़ा के सचिव स्वामी संपूर्णानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है, इसलिए हर किसी को मानवता धर्म निभाना चाहिए, उन्होंने कहा कि संत की कोई जाति नहीं होती, संत जिस भी जगह जाते हैं उन्हीं के हो जाते हैं। उन्हें खुशी है कि आज वह वहां पर हैं जहां पर हरि का आना जाना जाता है और वह प्रदेश हरियाणा है। जब इंद्रदेवता क्रोधित हुए और तेज बरसात होने लगी तो भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। उस समय भगवान ने किसी को निमंत्रण नहीं दिया था कि कौन-कौन से जाति या धर्म के लोग गोवर्धन पर्वत के नीचे आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि उस समय आने वाले लोगों से न धर्म पूछा गया न ही जाती, केवल मानवता को महत्व देते हुए सभी को एक सम्मान समझा। यही सामाजिक समरसता है।
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सामाजिक समरता दिवस का आयोजन एसएस जैन महासभा की ओर से जैनाचार्य आत्माराम महाराज एवं वाचनाचार्य मनोहर मुनि महाराज की जन्म जयंती के मौके पर किया गया। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय जैन कांफ्रेंस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नेमीचंद जैन चोपड़ा पाली, ध्वजारोहण हरियाणा वेयर हाउसिंग के निदेशक अनुभव अग्रवाल ने किया। स्वामी अवधेशानंद गिरि, स्वामी ज्ञानानंद, सत्गुरु उदय सिंह, स्वामी शांता नंद, संपूर्णानंद ब्रहम्चारी, बौद्ध गुरु आचार्य कर्मा, हजरत ए हिंद मौलाना हबीबुर्र रहमान क़ाबली, मौलाना कोकब, साध्वी त्रिपता भारती ने प्रवचन किए। कार्यक्रम के दौरान उप प्रर्वतक पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों को अपनी भौतिक उपलब्धियों पर गर्व है, परंतु हमारे देश को अपनी समृद्ध गौरवपूर्ण, अध्यात्मिक विरासत पर नाज है। हीरों में कोहिनूर, सौरमंडल में सूर्य, नदियों में गंगा, समुद्रों में क्षीर सागर फूलों में शतपत्र कमल की तरह भारतीय संस्कृति विश्व में सिरमौर है। हमारी संस्कृति कर्तव्य को निभाने को भी धर्म कहती है परंतु कर्तव्य के साथ पवित्रता, श्रद्धा तथा विश्वास को भी महत्व देती है। धर्म उत्कृष्ट मंगल है, अहिंसा, संयम तथा तप धर्म है, जिसके मन में धर्म विद्यमान रहता है, देवता भी उसे नमस्कार करते हैं। किसी को दुख न देना सबसे बड़ा धर्म है, तथा दूसरों की निंदा करना सबसे बड़ा पाप है। प्रत्येक धर्म उन सब गुणों पर जोर देता है जो हर व्यक्ति में होने चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म के अभाव में जीवन दूषित हो जाता है। तभी भगवान महावीर ने मनुष्य की एक जाति बतलाई है। वर्ण व्यवस्था सारे व्यवहारों को सुचारु रूप से चलने के लिए स्थापित की गई थी। परंतु मौलिक रूप से सभी मानव समान है। इस मौके पर विनोद जैन, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना, प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रचारक प्रेम गोयल, किशोर कांत, जैन सभा के चातुर्मास प्रबन्धन समिति ने शहर के अध्यक्ष धर्मपाल जैन, चातुर्मास समिति के चेयरमैन जिनेश जैन, सभी पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, महिला संगठन एवं युवक मंडल व अन्य मौजूद रहे।
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इस दौरान अग्नि अखाड़ा के सचिव स्वामी संपूर्णानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है, इसलिए हर किसी को मानवता धर्म निभाना चाहिए, उन्होंने कहा कि संत की कोई जाति नहीं होती, संत जिस भी जगह जाते हैं उन्हीं के हो जाते हैं। उन्हें खुशी है कि आज वह वहां पर हैं जहां पर हरि का आना जाना जाता है और वह प्रदेश हरियाणा है। जब इंद्रदेवता क्रोधित हुए और तेज बरसात होने लगी तो भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। उस समय भगवान ने किसी को निमंत्रण नहीं दिया था कि कौन-कौन से जाति या धर्म के लोग गोवर्धन पर्वत के नीचे आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि उस समय आने वाले लोगों से न धर्म पूछा गया न ही जाती, केवल मानवता को महत्व देते हुए सभी को एक सम्मान समझा। यही सामाजिक समरसता है।
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