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हमारी शर्तों पर दो ओआरओपी, वरना जंग को रहो तैयार
ब्यूरो/अमर उजाला,अंबाला
Updated Mon, 16 Nov 2015 12:19 AM IST
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वन रैंक-वन पेंशन (ओआरओपी) के लिए बरसों से संघर्षरत पूर्व सैनिकों के सब्र का बांध दिन-ब-दिन टूटता जा रहा है। इसी मसले पर रणनीति तय करने के संदर्भ में रविवार को पूर्व सैनिकों ने अंबाला में महासंग्राम रैली का आयोजन कर केंद्र सरकार के खिलाफ फिर हुुंकार भरी। इस रैली में हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब और उत्तराखंड के हजारों पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों ने शिरकत की।
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उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, पूर्व फौजी वन रैंक-वन पेंशन अपनी मांग के अनुरूप ही लेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार चुनाव में पूर्व फौजियों से किया वादा पूरा करती है तो ठीक है, वरना पूर्व फौजियों से आंदोलन रूपी जंग के लिए तैयार रहे। क्योंकि अब वन रैंक-वन पेंशन अपनी शर्तों के अनुसार लिए बिना पूर्व फौजी पीछे हटने वाले नहीं है।
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पीएम, डीएम, राष्ट्रपति से मांगा मिलने का समय
महासंग्राम रैली का आयोजन एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन अंबाला की ओर से किया गया था। इसकी अध्यक्षता अंबाला के प्रधान सूबेदार अतर सिंह मुल्तानी ने की। रैली ओआरओपी आंदोलन के संस्थापक कर्नल इंद्रजीत व यूनाइटेड फ्रंट ऑफ एक्स-सर्विसमैन के नेशनल चेयरमैन मेजर जनरल सतबीर सिंह के नेतृत्व में आयोजित की गई। कर्नल इंद्रजीत रैली में भाग लेने के लिए व्हीलचेयर पर अंबाला पहुंचे।
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चेयरमैन मेजर जनरल सतबीर सिंह ने बताया कि इस कड़ी में फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पारीकर व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने के लिए वक्त मांगा गया है। ताकि उनसे मिलकर पूर्व सैनिक सरकार का फाइनल मूड जान लें और फिर आंदोलन का अगला चरण शुरू कर दें।
पूर्व सैनिक चाहते हैं यें सात मांगें हों पूरी
सरकार ने 05 सितंबर को ओआरओपी के संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर पूर्व सैनिकों को इसका लाभ दिए जाने की घोषणा की थी। लेकिन ये नोटिफिकेशन पूर्व सैनिकों को मंजूर नहीं है। पूर्व सैनिक इसमें सात त्रुटियों को दूर कराना चाहते हैं, इसलिए पूर्व सैनिकों ने इस नोटिफिकेशन को नकली ओआरओपी बताया है।
पहली मांग- पुराने और नए रिटायर्ड फौजियों को बराबर पेंशन देने के लिए जरूरी है कि पेंशन का रिव्यू हर एक साल बाद हो। यह ओआरओपी के सिद्धांत की जान है। सरकार इसे 5 साल में एक बार रिव्यू करना चाहती है। यह तो वन रैंक-पांच पेंशन बन जाएगा, इसलिए यह मंजूर नहीं। कंप्यूटर युग में सरकार का यह कहना कि सालाना रिव्यू संभव नहीं मात्र बहानेबाजी है।
दूसरी मांग- ओआरओपी सरकार के संसद में दिए बयान के मुताबिक 1 अप्रैल 2014 से जारी होनी थी। अब सरकार इंकार कर 1 जुलाई 2014 से जारी करना चाहती है। तीन महीने देरी क्यों? इससे सरकार गरीब फौजियों और वीर नारियों का 2100 करोड़ रुपये हड़पना चाहती है, जो पूर्व सैनिकों को मंजूर नहीं।
तीसरी मांग-ओआरओपी लागू करते समय उसी समय (यानि वित्त वर्ष 2013-14) के पेंशन आंकड़े लेने चाहिए। सरकार कैलेंडर वर्ष 2013 के औसत आंकड़े पर ओआरओपी को निर्धारित करना चाहती है। यह असमंजस में डालने वाला कदम है। इसके अमल से पेंशनर को 1000 से 3000 रुपये का नुकसान होगा और ओआरओपी की परिभाषा ही टूट जाएगी। ये पूर्व सैनिक नहीं होने देंगे।
चौथी मांग- इस घोषणा में वीआरएस के रूप में एक नया जाल बिछाया गया है। वीआरएस फौजी शब्दावली में कोई मायने नहीं रखता। यह सिविल कंपनियों का शब्द है, अपने कर्मचारियों की छंटनी करने के लिए एक मोटी रकम देकर कंपनियों कर्मचारी को हटा देती हैं। हमें शक है कि सरकार दुर्भावनापूर्ण इसको प्रीमेच्योर रिटायर्ड (पीएमआर) से जोड़ने की कोशिश करेगी, जिससे 60 फीसदी पेंशनर (अफसर, जेसीओ, ओआर) को ओआरओपी प्रतिक्रिया से वंचित किया जा सकता है। इस वीआरएस का अचानक ओआरओपी से जोड़ा जाना सरकार का षड्यंत्र है। जो बरदाश्त नहीं होगा।
पांचवीं मांग- ओआरओपी संबंधित मतभेद सुलझाने के लिए 5 सदस्यों का आयोग होना चाहिए, जिसमें सेवारत और रिटायर्ड फौजी हों। सरकार ने केवल एक जज के आयोग का ऐलान किया है। अभी तक सरकार ने जितने आयोग बैठाए हैं, उनमें केवल बाबू होते हैं और उनके फैसले फौजियों के खिलाफ ही रहे हैं। इसलिए सरकार के इस आयोग में फौजी प्रतिनिधि चाहिए।
छठी मांग- ओआरओपी अनंत काल का सिद्धांत है- केवल अभी एक-दो वर्षों के लिए नहीं। इसलिए सरकार इसे जारी करते हुए चालाकी न करे।
सातवी मांग-ओआरओपी वेतन आयोग से किसी भी तरह जुड़ा हुआ नहीं है। इसे वेतन आयोग से भी जोड़ा जाए, ताकि इसका लाभ पूर्व फौजियों को मिलता रहे।
197 दिन से दिल्ली में जारी है भूख हड़ताल
दिल्ली से आए पूर्व सैनिकों के नेताओं ने बताया कि दिल्ली में 197 दिन से लगातार भूख हड़ताल जारी है और आगे भी संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा। रोजाना वहां विभिन्न राज्यों से आए पूर्व फौजियों का जत्था भूख हड़ताल पर बैठ रहा है। रैली में आह्वान किया गया कि सभी राज्यों से विभिन्न शहरों के लोग दिल्ली में भूख हड़ताल के लिए निरंतर पहुंचते रहें।
जयकारों से गूंजती रही महासंग्राम रैली
महासंग्राम रैली में सैनिक एकता और भारत माता के जयघोष गूंजते रहे। साडा हक ऐत्थे रख का नारा बार-बार बुलंद होता रहा। जिससे पूर्व सैनिकों में पूरा जोश भरा रहा। इस दौरान कर्नल इंद्रजीत व मेजर जनरल सतबीर सिंह के अलावा, सूबेदार अतर सिंह मुल्तानी, जेपी मेहता, खुशबीर सिंह दत्त, ग्रुप कैप्टन वीके गांधी, बिग्रेडियर जेएस संधू, कर्नल अमरजीत सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल कमलेश्वर पांडे, ग्रुप कैप्टन वीके गांधी, कर्नल अनिल कौल, ब्रिगेडियर केके शर्मा, कर्नल रोहित कुमार, कैप्टन जेएस राठी, ब्रिगेडियर बीएस बाजवा, कर्नल एसजे सिंह, कैप्टन केजेएस भुट्टर, मेजर बीएन बालगू, कैप्टन बाली, सुरेंद्र भाटिया, कर्नल खैरा, कर्नल बलबीर सिंह, कर्नल पुष्पेंद्र, हवलदार मेजर सिंह समेत अन्य पूर्व सैनिक नेताओं ने महासंग्राम रैली में पहुंचे पूर्व फौजियों में जोश भरा।
सामाजिक संस्थाओं का मिल रहा सहयोग
भूतपूर्व सैनिकों के आंदोलन को देखते हुए सामाजिक संस्थाओं ने भी भागीदारी निभानी शुरू कर दी है और संस्था से जुड़ी महिलाएं रैली में शामिल होकर भूतपूर्व सैनिकों का खुलकर समर्थन कर रही हैं। रैली में शामिल जालंधर से हरप्रीत कौर ने बताया कि वह जालंधर में सामाजिक संस्था से जुड़ी हैं। वे भूतपूर्व सैनिकों के वन रैंक-वन पेंशन को उनका हक बताती हैं और उन्हें उनका हक दिलवाने के लिए ही सहयोग कर रही हैं।
युद्ध के मैदान के बाद अब हक की लड़ाई
रोपड़ निवासी कर्नल दीदार सिंह ने बताया कि पहले युद्ध के मैदान पर दुश्मनों के खिलाफ लड़ा करते थे। परंतु अब भूतपूर्व सैनिक अपने हक की लड़ाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से भूतपूर्व सैनिकों के जज्बे व उनके हक को नजरअंदाज कर रही है। जो सरासर गलत है। ऐसे में वह इस आंदोलन में पांच जत्थों को लीड कर अपनी भागीदारी निभा रहे है।
साइकिल पर पंजाब से दिल्ली पहुंचकर दिया समर्थन
एक्स सिपाही जोगिंद्र सिंह का कहना है कि वह बतौर सिपाही भर्ती हुए और 1971 में पूर्वी पाकिस्तान की लड़ाई में बंगाल में भी भाग लिया। लेकिन आज सरकार भूतपूर्व सैनिकों का सम्मान नहीं कर रही है और उन्हें उनके हक से दूर रखा जा रहा है। इसलिए वह गुरदासपुर से दिल्ली में जंतर मंतर पर साइकिल पर पहुंचकर समर्थन कर चुके हैं। अगर सरकार ऐसे ही वन रैंक-वन पेंशन के बारे में अटकलें लगाती रहेगी तो इस आंदोलन को तेज किया जाएगा।
बाइक पर पहुंचे दिल्ली
प्राचार्य एवं रिटायर्ड हवलदार हरजिंद्र सिंह मालोवाल भी बाइक पर फतेहगढ़ से दिल्ली में भूख हड़ताल पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत में खोट आ गई है। वे पूर्व सैनिकों की भावना के साथ खिलवाड़ करना चाहती है। लेकिन ये बरदाश्त नहीं होगा। पूर्व सैनिक हक लेकर ही रहेंगे और अपनी शर्तों पर वन रैंक-वन पेंशन लेेंगे।