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Ambala News: मटहेड़ी शेखा गांव में चल रहे थे दो नशा मुक्ति केंद्र
Thu, 12 Oct 2023 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Thu, 12 Oct 2023 01:33 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। मटहेड़ी शेखा गांव में संचालित श्री बालाजी फाउंडेशन के नशा मुक्ति केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की छापामारी के अगले दिन पटियाला में तीन युवकों की लाश नदी से मिली थी। ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा था कि छापेमारी की पूर्व सूचना पर श्री बालाजी फाउंडेशन के नशा मुक्ति केंद्र से ही नशेड़ी और केंद्र से जुड़े लोग पंजाब के पटियाला भागे होंगे। भागने के दौरान उनकी नदी में गिरने से मौत हो गई होगी।
बाद में सामने आया है कि मटहेड़ी शेखा गांव में एक नहीं बल्कि दो केंद्र थे। एक केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापामारी की थी तो दूसरा सेंटर एक प्रयास के नाम से है। दोनों के संचालक अलग-अलग और दोनों ही पंजाब के रहने वाले हैं। इसमें श्री बालाजी फाउंडेशन का संचालक प्रिंस राजपुरा का रहने वाला था और एक प्रयास संस्था के केंद्र का सुपरवाइजर पटियाला का निवासी विक्की नाम का व्यक्ति है।
मामले में प्रबल संभावना है कि जब स्वास्थ्य विभाग ने श्री बालाजी फाउंडेशन के सेंटर पर छापामारी की तो इसकी सूचना एक प्रयास नशामुक्ति में देखरेख करन वालों को भी भनक लग गई होगी। तभी वह जल्दबाजी में पटियाला की तरफ भाग लिए, इसी दौरान नदी में गिरने से हादसा हुआ होगा। हालांकि अब यह पहेली दोनों ही राज्यों की पुलिस के लिए जांच का विषय बन गई है।
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संचालक 20 हजार रुपये महीने देता था किराया
जिस भवन में श्री बालाजी फाउंडेशन का नशा मुक्ति केंद्र चल रहा था। उस भवन के मालिक विनोद बंसल से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि एक साल पहले राजपुरा का प्रिंस उनके पास आया था और कहा था नशा मुक्ति केंद्र के लिए भवन चाहिए, तब भवन में मैरिज पैलेस था। प्रिंस से 20 हजार रुपये मासिक किराए पर बात हुई थी और बाकायदा एग्रीमेंट भी कराया था। एग्रीमेंट कराने के साथ संचालक प्रिंस की शर्त थी कि भवन मालिक उसे भवन के चारों तरफ चार दीवार और चार शौचालय बनाकर दे। इस कार्य में भवन संचालक ने ढाई लाख रुपये दिया था। उन्हें बिल्कुल भी आभास नहीं था कि संचालक इस प्रकार की गतिविधियां कर रहा है। वहीं कुछ दूरी पर विक्की नाम का पटियाला का व्यक्ति भी एक सेंटर चला रहा था। वह दो दिनों से अब बंद है।
दूसरा केंद्र 500 मीटर दूर स्थित
मटहेड़ी शेखा में जिस स्थान पर स्वास्थ्य विभाग ने रेड की उससे लगभग 500 मीटर की दूरी पर ही एक प्रयास नाम से दूसरा केंद्र था। इसको बनाने के लिए भी चार दीवार लगाई गई थी। इसके भवन पर संस्था या केंद्र का कोई नाम ही अंकित नहीं था। यहां तक कि यह सेंटर गांव के मुख्य चौक के पास संचालित हाे रहे थे।
यह उठ रहे सवाल
स्वास्थ्य विभाग का कहना है मटहेड़ी शेखा के एक प्रयास सेंटर ने लाइसेंस के लिए उनके यहां आवेदन किया था, उन्हें प्रोविजनरी लाइसेंस दिया था। इस दौरान वह मरीज नहीं भर्ती कर सकते थे। यह सेंटर अक्सर नशे के आदी लोगों को नशा छोड़ने के बाद ही दिया जाता है। इस कारण से घबराकर वह भाग गए होंगे। मगर दूसरी तरफ पटियाला में जो लोग मरे हैं उनके परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे अंबाला के एक प्रयास सेंटर में भर्ती थे। अब जब मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता था तो कैसे वहां पर नशा करने वाले लोग थे।
अंबाला के मटहेड़ी शेखा गांव में संचालित एक प्रयास नाम के सेटर में मृतकों के परिजनों ने अपने बच्चों को नशे के उपचार के लिए भेजा था। इस सेंटर को विक्की चलाता था। जब आरोपी पकड़े जाएंगे तो पूरी घटना का खुलासा हो सकेगा। - सुखविंदर सिंह, इंस्पेक्टर, थाना कोतवाली, पटियाला पंजाब।
हमने छापामारी के समय 32 लोगों को रिकवर किया था। पटियाला की घटना काे लेकर वहां के पुलिस अधिकारी से बात हुई है वह दूसरे सेंटर लोग बताए जा रहे हैं। - सुनीता ढाका, इंस्पेक्टर, नग्गल थाना।
मटहेड़ी शेखा में दूसरा केंद्र खुलना था। इसके लिए हमने प्रोविजनरी लाइसेंस दिया था। नियमों को पूरा करने के बाद ही केंद्र संचालक को स्थाई लाइसेंस दिया जाता है। तब तक वहां पर मरीज भर्ती नहीं किए जा सकते हैं। कई बार नशा छोड़ चुके लोगों को देखभाल के लिए छोड़ दिया जाता है। वह छापामारी की सूचना पाकर भागे होंगे। - डॉ राजिंद्र राय, एसएमओ, स्वास्थ्य विभाग, अंबाला।
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अंबाला सिटी। मटहेड़ी शेखा गांव में संचालित श्री बालाजी फाउंडेशन के नशा मुक्ति केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की छापामारी के अगले दिन पटियाला में तीन युवकों की लाश नदी से मिली थी। ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा था कि छापेमारी की पूर्व सूचना पर श्री बालाजी फाउंडेशन के नशा मुक्ति केंद्र से ही नशेड़ी और केंद्र से जुड़े लोग पंजाब के पटियाला भागे होंगे। भागने के दौरान उनकी नदी में गिरने से मौत हो गई होगी।
बाद में सामने आया है कि मटहेड़ी शेखा गांव में एक नहीं बल्कि दो केंद्र थे। एक केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापामारी की थी तो दूसरा सेंटर एक प्रयास के नाम से है। दोनों के संचालक अलग-अलग और दोनों ही पंजाब के रहने वाले हैं। इसमें श्री बालाजी फाउंडेशन का संचालक प्रिंस राजपुरा का रहने वाला था और एक प्रयास संस्था के केंद्र का सुपरवाइजर पटियाला का निवासी विक्की नाम का व्यक्ति है।
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मामले में प्रबल संभावना है कि जब स्वास्थ्य विभाग ने श्री बालाजी फाउंडेशन के सेंटर पर छापामारी की तो इसकी सूचना एक प्रयास नशामुक्ति में देखरेख करन वालों को भी भनक लग गई होगी। तभी वह जल्दबाजी में पटियाला की तरफ भाग लिए, इसी दौरान नदी में गिरने से हादसा हुआ होगा। हालांकि अब यह पहेली दोनों ही राज्यों की पुलिस के लिए जांच का विषय बन गई है।
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संचालक 20 हजार रुपये महीने देता था किराया
जिस भवन में श्री बालाजी फाउंडेशन का नशा मुक्ति केंद्र चल रहा था। उस भवन के मालिक विनोद बंसल से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि एक साल पहले राजपुरा का प्रिंस उनके पास आया था और कहा था नशा मुक्ति केंद्र के लिए भवन चाहिए, तब भवन में मैरिज पैलेस था। प्रिंस से 20 हजार रुपये मासिक किराए पर बात हुई थी और बाकायदा एग्रीमेंट भी कराया था। एग्रीमेंट कराने के साथ संचालक प्रिंस की शर्त थी कि भवन मालिक उसे भवन के चारों तरफ चार दीवार और चार शौचालय बनाकर दे। इस कार्य में भवन संचालक ने ढाई लाख रुपये दिया था। उन्हें बिल्कुल भी आभास नहीं था कि संचालक इस प्रकार की गतिविधियां कर रहा है। वहीं कुछ दूरी पर विक्की नाम का पटियाला का व्यक्ति भी एक सेंटर चला रहा था। वह दो दिनों से अब बंद है।
दूसरा केंद्र 500 मीटर दूर स्थित
मटहेड़ी शेखा में जिस स्थान पर स्वास्थ्य विभाग ने रेड की उससे लगभग 500 मीटर की दूरी पर ही एक प्रयास नाम से दूसरा केंद्र था। इसको बनाने के लिए भी चार दीवार लगाई गई थी। इसके भवन पर संस्था या केंद्र का कोई नाम ही अंकित नहीं था। यहां तक कि यह सेंटर गांव के मुख्य चौक के पास संचालित हाे रहे थे।
यह उठ रहे सवाल
स्वास्थ्य विभाग का कहना है मटहेड़ी शेखा के एक प्रयास सेंटर ने लाइसेंस के लिए उनके यहां आवेदन किया था, उन्हें प्रोविजनरी लाइसेंस दिया था। इस दौरान वह मरीज नहीं भर्ती कर सकते थे। यह सेंटर अक्सर नशे के आदी लोगों को नशा छोड़ने के बाद ही दिया जाता है। इस कारण से घबराकर वह भाग गए होंगे। मगर दूसरी तरफ पटियाला में जो लोग मरे हैं उनके परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे अंबाला के एक प्रयास सेंटर में भर्ती थे। अब जब मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता था तो कैसे वहां पर नशा करने वाले लोग थे।
अंबाला के मटहेड़ी शेखा गांव में संचालित एक प्रयास नाम के सेटर में मृतकों के परिजनों ने अपने बच्चों को नशे के उपचार के लिए भेजा था। इस सेंटर को विक्की चलाता था। जब आरोपी पकड़े जाएंगे तो पूरी घटना का खुलासा हो सकेगा। - सुखविंदर सिंह, इंस्पेक्टर, थाना कोतवाली, पटियाला पंजाब।
हमने छापामारी के समय 32 लोगों को रिकवर किया था। पटियाला की घटना काे लेकर वहां के पुलिस अधिकारी से बात हुई है वह दूसरे सेंटर लोग बताए जा रहे हैं। - सुनीता ढाका, इंस्पेक्टर, नग्गल थाना।
मटहेड़ी शेखा में दूसरा केंद्र खुलना था। इसके लिए हमने प्रोविजनरी लाइसेंस दिया था। नियमों को पूरा करने के बाद ही केंद्र संचालक को स्थाई लाइसेंस दिया जाता है। तब तक वहां पर मरीज भर्ती नहीं किए जा सकते हैं। कई बार नशा छोड़ चुके लोगों को देखभाल के लिए छोड़ दिया जाता है। वह छापामारी की सूचना पाकर भागे होंगे। - डॉ राजिंद्र राय, एसएमओ, स्वास्थ्य विभाग, अंबाला।