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Ambala News: फूल बरसाए, लंगर भी लाए फिर इरादे न डिगा पाए
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अंबाला। शंभू बॉर्डर पर किसानों का दिल्ली कूच का दूसरा प्रयास भी रविवार को असफल रहा। पौने चार घंटे तक किसानों और पुलिस फोर्स के बीच संघर्ष चला, जिसमें छह किसान घायल हो गए। दिनभर जहां किसानों ने शंभू पर बैरिकेडिंग पर लगी जालियों को हटाने के लिए कई तरीके अपनाए तो पुलिस भी अपनी रणनीति के तहत कभी फूल तो कभी लंगर लाकर किसानों को मनाने में जुटी दिखाई दी। इस दौरान बार-बार पुलिस को आंसू गैस के गोलों और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
दरअसल 101 किसानों का पहला जत्था दोपहर 12 बजे शंभू से दिल्ली कूच को रवाना हुआ। किसान जब पीछे नहीं हटे तो पुलिस लंगर में चाय और बिस्किट लेकर आई जिससे किसान मान जाएं मगर वह दिल्ली जाने की कहने लगे। इसके बाद कुछ किसानों ने बैरिकेडिंग के पास लगी जालियों को कुंडी और रस्सी की मदद से उखाड़ने की कोशिश की तो पुलिस को आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा।
किसान नेता पंधेर के आने पर शांत हुए किसान
अंत में चार बजे किसान नेता सरवन सिंह पंधेर किसानों के जत्थे को वापस ले गए और दूसरे दिन के संघर्ष को शांत कराया। वहीं, सुबह पंजाब पुलिस ने मीडियाकर्मियों को शंभू जाने से रोका तो किसान शंभू चौकी पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद पुलिस को नरमी बरतनी पड़ी।
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पुलिस का आरोप शरारती तत्वों को जत्थेबंदियों की आड़ में भेजा
बैरिकेडिंग पर किसानों को रोक रहे पुलिस अधिकारियों ने किसानों की 101 जत्थेबंदियों की सूची पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि जिन जत्थेबंदियों की सूची दी गई उसमें से चार पांच ही किसान हैं बाकी 200 से अधिक किसान कोई और हैं। इसमें कुछ शरारती तत्व भी हैं। एक किसान नेता का तो नाम लेते ही पुलिस ने सीधे आरोप लगाए कि वह भीड़ को भड़का रहे थे और हाथों में हथियार लिए थे। हालांकि इन आरोपों का किसान नेताओं ने खंडन किया और कहा पुलिस किसानों के पहचान पत्र देख ले।
पुलिस पर एक तरफ फूल दूसरी तरफ आंसू गैस दागने का आरोप
इधर किसानों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस एक तरफ तो फूल बरसाने का दिखावा कर रही है दूसरी तरफ आंसू गैस के गोले और केमिकल स्प्रे कर किसानों को घायल कर रही है। उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली नहीं जाने दिया जा रहा।
डीसीएसपी बोले : शहीद होने नहीं आए हम
किसानों और पुलिस के संघर्ष के बीच डीएसपी रामकुमार कुछ पत्रकारों से बात करते हुए काफी मुखर दिखे। उन्होंने कहा कि आपके परिवार पर हमला हो तो आप क्या करेंगे, पुलिस और किसान भी मेरा परिवार है। मैं चाय बिस्किट इसलिए ही दे रहा हूं कि आप हमारे साथ संघर्ष न करो हम आपके साथ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम यहां शहीद होने नहीं आए हैं। उन्होंने किसानों पर जाली तोड़ने, पत्थर फैंकने के आरोप लगाए।
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दरअसल 101 किसानों का पहला जत्था दोपहर 12 बजे शंभू से दिल्ली कूच को रवाना हुआ। किसान जब पीछे नहीं हटे तो पुलिस लंगर में चाय और बिस्किट लेकर आई जिससे किसान मान जाएं मगर वह दिल्ली जाने की कहने लगे। इसके बाद कुछ किसानों ने बैरिकेडिंग के पास लगी जालियों को कुंडी और रस्सी की मदद से उखाड़ने की कोशिश की तो पुलिस को आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा।
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किसान नेता पंधेर के आने पर शांत हुए किसान
अंत में चार बजे किसान नेता सरवन सिंह पंधेर किसानों के जत्थे को वापस ले गए और दूसरे दिन के संघर्ष को शांत कराया। वहीं, सुबह पंजाब पुलिस ने मीडियाकर्मियों को शंभू जाने से रोका तो किसान शंभू चौकी पर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद पुलिस को नरमी बरतनी पड़ी।
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पुलिस का आरोप शरारती तत्वों को जत्थेबंदियों की आड़ में भेजा
बैरिकेडिंग पर किसानों को रोक रहे पुलिस अधिकारियों ने किसानों की 101 जत्थेबंदियों की सूची पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि जिन जत्थेबंदियों की सूची दी गई उसमें से चार पांच ही किसान हैं बाकी 200 से अधिक किसान कोई और हैं। इसमें कुछ शरारती तत्व भी हैं। एक किसान नेता का तो नाम लेते ही पुलिस ने सीधे आरोप लगाए कि वह भीड़ को भड़का रहे थे और हाथों में हथियार लिए थे। हालांकि इन आरोपों का किसान नेताओं ने खंडन किया और कहा पुलिस किसानों के पहचान पत्र देख ले।
पुलिस पर एक तरफ फूल दूसरी तरफ आंसू गैस दागने का आरोप
इधर किसानों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस एक तरफ तो फूल बरसाने का दिखावा कर रही है दूसरी तरफ आंसू गैस के गोले और केमिकल स्प्रे कर किसानों को घायल कर रही है। उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली नहीं जाने दिया जा रहा।
डीसीएसपी बोले : शहीद होने नहीं आए हम
किसानों और पुलिस के संघर्ष के बीच डीएसपी रामकुमार कुछ पत्रकारों से बात करते हुए काफी मुखर दिखे। उन्होंने कहा कि आपके परिवार पर हमला हो तो आप क्या करेंगे, पुलिस और किसान भी मेरा परिवार है। मैं चाय बिस्किट इसलिए ही दे रहा हूं कि आप हमारे साथ संघर्ष न करो हम आपके साथ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम यहां शहीद होने नहीं आए हैं। उन्होंने किसानों पर जाली तोड़ने, पत्थर फैंकने के आरोप लगाए।