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Ambala News: नए पार्षदों के समक्ष होंगी कई चुनाैतियां
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अंबाला। वार्ड स्तर पर मूलभूत सुविधाओं में कमी का खामियाजा इस बार नगर परिषद सदर के चुनावों में खड़े प्रत्याशियों को झेलना पड़ेगा।
वार्ड स्तर पर अधूरे पड़े कार्य, जैसे टूटी सड़कें, गंदगी से अटी नालियां, सीवर पाइप डालने के बाद सड़कों का अधूरा निर्माण, स्ट्रीट लाइटों की कमी के कारण लोगों मतदान में खुलकर हिस्सा नहीं लिया और मतदान न करके रोष जाहिर किया है।
वहीं अब वार्डों में यह भी चर्चा होने लगी है कि अगर सत्तापक्ष का उम्मीदवार जीतकर पार्षद बनता है तो उसे वायदा याद करवाया जाएगा। जब वो वोट मांगने के लिए आया था कि जीत के बाद वो धरातल पर उतरकर काम करेंगे। अगर वो अपने वायदे पर खरे न उतरे तो लोग जीते पार्षद का बहिष्कार करने के लिए भी तैयार बैठे हैं।
छह वर्ष से मिल रहा आश्वासन : वार्ड 7 व 8 के निवासी मदन, रितू, कुसुम, गोपाल, पंकज व सुरजीत आदि ने बताया कि सत्तापक्ष के लोगों ने उनके क्षेत्र में नाममात्र विकास कार्य करवाए और वो भी अपने चाहने वालों के। इसका अंदाजा वार्ड की सड़कों व नालियों आदि को देखकर लगाया जा सकता है। फोटो में चमकने वाले क्षेत्र आज भी गंदगी से अटे पड़े हैं। पिछले छह वर्ष से वो इन समस्याओं के समाधान को लेकर दर्जनों शिकायतें दे चुके हैं। बावजूद इनका आजतक स्थाई समाधान नहीं हो पाया।
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12 मार्च को खुलेगा पिटारा : नगर परिषद सदर के चुनावों का पिटारा 12 मार्च को खुलेगा। अंबाला छावनी की छोटी सरकार का ताज किसके सिर सजेगा और किसी शिकस्त मिलेगी। यह कुछ घंटों में ही स्पष्ट हो जाएगा। कम मतदान का असर सत्तापक्ष के उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है। जबकि आजाद प्रत्याशियों को साधने के लिए अभी से जी जोड़-तोड़ का गणित शुरु हो गया है।
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वार्ड स्तर पर अधूरे पड़े कार्य, जैसे टूटी सड़कें, गंदगी से अटी नालियां, सीवर पाइप डालने के बाद सड़कों का अधूरा निर्माण, स्ट्रीट लाइटों की कमी के कारण लोगों मतदान में खुलकर हिस्सा नहीं लिया और मतदान न करके रोष जाहिर किया है।
वहीं अब वार्डों में यह भी चर्चा होने लगी है कि अगर सत्तापक्ष का उम्मीदवार जीतकर पार्षद बनता है तो उसे वायदा याद करवाया जाएगा। जब वो वोट मांगने के लिए आया था कि जीत के बाद वो धरातल पर उतरकर काम करेंगे। अगर वो अपने वायदे पर खरे न उतरे तो लोग जीते पार्षद का बहिष्कार करने के लिए भी तैयार बैठे हैं।
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छह वर्ष से मिल रहा आश्वासन : वार्ड 7 व 8 के निवासी मदन, रितू, कुसुम, गोपाल, पंकज व सुरजीत आदि ने बताया कि सत्तापक्ष के लोगों ने उनके क्षेत्र में नाममात्र विकास कार्य करवाए और वो भी अपने चाहने वालों के। इसका अंदाजा वार्ड की सड़कों व नालियों आदि को देखकर लगाया जा सकता है। फोटो में चमकने वाले क्षेत्र आज भी गंदगी से अटे पड़े हैं। पिछले छह वर्ष से वो इन समस्याओं के समाधान को लेकर दर्जनों शिकायतें दे चुके हैं। बावजूद इनका आजतक स्थाई समाधान नहीं हो पाया।
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12 मार्च को खुलेगा पिटारा : नगर परिषद सदर के चुनावों का पिटारा 12 मार्च को खुलेगा। अंबाला छावनी की छोटी सरकार का ताज किसके सिर सजेगा और किसी शिकस्त मिलेगी। यह कुछ घंटों में ही स्पष्ट हो जाएगा। कम मतदान का असर सत्तापक्ष के उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है। जबकि आजाद प्रत्याशियों को साधने के लिए अभी से जी जोड़-तोड़ का गणित शुरु हो गया है।