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युद्ध भूमि में कोई रिश्ते नहीं होते : गीता मनीषी
Sun, 21 Dec 2025 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sun, 21 Dec 2025 01:34 AM IST
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सत्संग सुनती महिलाएं। संवाद
समालखा। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि युद्ध की भूमि है और युद्ध भूमि में कोई रिश्ते नहीं होते इसलिए युद्ध कर पार्थ और यह युद्ध केवल गुरु द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह के वध के लिए नहीं है। पार्थ यह युद्ध धर्म की विजय और अधर्म की पराजय के लिए है।
उन्होंने प्रवचन शनिवार को समालखा नई अनाज मंडी में चल रहे दिव्य गीता सत्संग एवं भजन रस वर्षा के दूसरे दिन कहे। उन्होंने कहा कि यह युद्ध तो अर्जुन मेरे अवतार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए है क्योंकि मैं इस धरा पर आया ही इसीलिए हूं। सज्जनों का यह श्राद्ध वृत्तियों का संरक्षण करने के लिए प्रोत्साहन करने के लिए उन्हें सुरक्षित रखने के लिए और दुष्ट जनों का दुष्कृतियों का संहार करने के लिए उन्हें समाप्त करने के लिए और फिर से धर्म की ध्वजा जय हो एक ओर धर्म का पक्ष एक ओर अधर्म का पक्ष मैं धर्म की तरफ हूं। देव असुर संपत्ति विभाग योग देवी सद्गुण और आश्रित दुर्गुण दोनों का भेद किया गया है कि मनुष्य शरीर में कौन से लक्षण आ जाने पर मनुष्य देव तुल्य बन सकता है और मनुष्य जीवन में कौन से दुर्गुण आ जाने पर मनुष्य पशु और सुर राक्षस भी बन जाता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता पाठ किया करो। इसका पाठ करने से व्यक्ति के सब दुख खत्म हो जाते हैं।
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उन्होंने प्रवचन शनिवार को समालखा नई अनाज मंडी में चल रहे दिव्य गीता सत्संग एवं भजन रस वर्षा के दूसरे दिन कहे। उन्होंने कहा कि यह युद्ध तो अर्जुन मेरे अवतार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए है क्योंकि मैं इस धरा पर आया ही इसीलिए हूं। सज्जनों का यह श्राद्ध वृत्तियों का संरक्षण करने के लिए प्रोत्साहन करने के लिए उन्हें सुरक्षित रखने के लिए और दुष्ट जनों का दुष्कृतियों का संहार करने के लिए उन्हें समाप्त करने के लिए और फिर से धर्म की ध्वजा जय हो एक ओर धर्म का पक्ष एक ओर अधर्म का पक्ष मैं धर्म की तरफ हूं। देव असुर संपत्ति विभाग योग देवी सद्गुण और आश्रित दुर्गुण दोनों का भेद किया गया है कि मनुष्य शरीर में कौन से लक्षण आ जाने पर मनुष्य देव तुल्य बन सकता है और मनुष्य जीवन में कौन से दुर्गुण आ जाने पर मनुष्य पशु और सुर राक्षस भी बन जाता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता पाठ किया करो। इसका पाठ करने से व्यक्ति के सब दुख खत्म हो जाते हैं।

सत्संग सुनती महिलाएं। संवाद
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