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आबोहवा हुई जहरीली, एक्यूआई 366 पर
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अंबाला सिटी। अंबाला की आबोहवा और ज्यादा जहरीली हो गई है। दिवाली के बाद एक दिन को छोड़ दे तो तीन दिनों में एक्यूआई 300 से अधिक ही रहा है और सोमवार को तो सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए हैं। सोमवार को अंबाला का एक्यूआई 366 तक पहुंच गया है जो बहुत ही खराब श्रेणी में आता है। अस्पतालों में भी सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
डॉक्टरों का मानना है कि अगर सांस की बीमारी से संबंधित मरीज ऐसी हवा में सांस लेते हैं तो उनके लिए स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब हो सकती है। प्रदूषित होती हवा का असर अस्पताल में भी दिखाई देने लगा है। सिविल अस्पताल और टीबी अस्पताल में औसतन 100 मरीज आते थे लेकिन इस समय इनकी संख्या करीब डेढ़ सौ हो गई है।
दूसरी ओर, छोटे बच्चों के लिए भी ऐसी हवा में सांस लेना घातक हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी हवा में सांस लेने से बचाव के लिए या तो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए या फिर मास्क का प्रयोग करना चाहिए। तभी इतनी प्रदूषित हवा से बचा जा सकता है।
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दिखने लगा है पटाखों का असर
दिवाली पर चले पटाखों से होने वाले प्रदूषण का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है। उसी का परिणाम है कि एक्यूआई सीधे ही 366 तक पहुंच गया है। वहीं इससे पहले अंबाला में पराली जलाने की हुई 49 घटनाओं ने भी कहीं न कहीं वायु प्रदूषण की वृद्धि करने में सहयोग किया है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार दिवाली पर चले पटाखे और पराली जलाने का असर अभी आने वाले समय में ओर अधिक दिखाई देगा और इससे एक्यूआई की स्थिति और अधिक खराब होने की आशंका है।
करीब डेढ़ माह से खांसी व सांस की समस्या है। मगर, दिवाली के बाद स्थिति ज्यादा खराब हो रही है। इसी कारण अस्पताल में उपचार करवाने आया हूं। मैं तो अधिकतर समय मास्क लगाकर रखता हूं और डाक्टर भी मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं। - राजेश कुमार, गांधीनगर, अंबाला कैंट।
करीब एक महीने से इलाज करवा रहा हूं। कुछ दिनों पहले बुखार था। सिटी के नागरिक अस्पताल से इलाज करवा रहा था परंतु इलाज होने के बावजूद भी कुछ खास फर्क नहीं पड़ा। अब दिवाली के बाद तो खांसी व सांस की समस्या बहुत अधिक बढ़ गई है। - ओमप्रकाश, गांव सौंडा निवासी।
कुछ दिनों पहले खांसी-जुकाम आदि की दिक्कत शुरू हुई थी। दवाइयां लेने के बाद भी बीमारी ठीक नहीं हुई। गांव के नजदीकी डाक्टरों से अपना इलाज करवा रहा था लेकिन आराम नहीं मिला। फिलहाल अंबाला सिटी नागरिक अस्पताल में इलाज करवा रहा हूं। -रणजीत सिंह, गांव धनकौर।
सांस को लेकर दिक्कत है। दिवाली के बाद से खांसी और सांस की दिक्कत ओर ज्यादा बढ़ गई यह सारा प्रदूषण का ही असर है। अब अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आया हूं। उम्मीद है कि यहां कि दवाई खाने से यह दिक्कत दूर हो जाएगी। - सिमरन जीत सिंह, गांव सरीफगढ़।
बीते तीन महीने से टीबी का इलाज करवा रहा हूं। पहले तो खांसी की ही दिक्कत अब सांस ने भी परेशान कर दिया है। इसका इलाज करवा रहा हूं, डॉक्टर ने सलाह दी है कि जब तक प्रदूषण कम नहीं हो जाता है मास्क का लगातार प्रयोग करना है। - सोमनाथ, शहजादपुर।
बुखार ठीक न होने के कारण अंबाला कैंट के चिकित्सकों ने सिटी के अस्पताल रेफर कर दिया था। अब यहां से इलाज चल रहा है दिवाली के बाद से खांसी की स्थिति ज्यादा खराब है क्योंकि खराब हवा सांस के साथ फेफड़ों में जा रही है। - सरोज बाला, गोविंद नगर, अंबाला कैंट।
सांस व खांसी की दिक्कत है। किसी ने सलाह दी तो यहां शहर के अस्पताल आए हैं। पिछले दो तीन दिन से तो स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। अभी दवाई लेने आया हूं। देखते हैं कि क्या कुछ असर होता है। - साईनदार, पुराना हमींदा निवासी, यमुनानगर।
लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है, इसी कारण खांसी व सांस वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। मरीजों को यही सलाह दे रहे हैं कि वह मास्क का प्रयोग करें क्योंकि अभी लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हमारी ओर से भी पूरा प्रयास है कि मरीजों को अच्छे से अच्छा उपचार दिया जाए।
- डाक्टर पवन कुमार, डिप्टी सर्जन, टीबी अस्पताल, अंबाला सिटी।
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डॉक्टरों का मानना है कि अगर सांस की बीमारी से संबंधित मरीज ऐसी हवा में सांस लेते हैं तो उनके लिए स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब हो सकती है। प्रदूषित होती हवा का असर अस्पताल में भी दिखाई देने लगा है। सिविल अस्पताल और टीबी अस्पताल में औसतन 100 मरीज आते थे लेकिन इस समय इनकी संख्या करीब डेढ़ सौ हो गई है।
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दूसरी ओर, छोटे बच्चों के लिए भी ऐसी हवा में सांस लेना घातक हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी हवा में सांस लेने से बचाव के लिए या तो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए या फिर मास्क का प्रयोग करना चाहिए। तभी इतनी प्रदूषित हवा से बचा जा सकता है।
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दिखने लगा है पटाखों का असर
दिवाली पर चले पटाखों से होने वाले प्रदूषण का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है। उसी का परिणाम है कि एक्यूआई सीधे ही 366 तक पहुंच गया है। वहीं इससे पहले अंबाला में पराली जलाने की हुई 49 घटनाओं ने भी कहीं न कहीं वायु प्रदूषण की वृद्धि करने में सहयोग किया है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार दिवाली पर चले पटाखे और पराली जलाने का असर अभी आने वाले समय में ओर अधिक दिखाई देगा और इससे एक्यूआई की स्थिति और अधिक खराब होने की आशंका है।
करीब डेढ़ माह से खांसी व सांस की समस्या है। मगर, दिवाली के बाद स्थिति ज्यादा खराब हो रही है। इसी कारण अस्पताल में उपचार करवाने आया हूं। मैं तो अधिकतर समय मास्क लगाकर रखता हूं और डाक्टर भी मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं। - राजेश कुमार, गांधीनगर, अंबाला कैंट।
करीब एक महीने से इलाज करवा रहा हूं। कुछ दिनों पहले बुखार था। सिटी के नागरिक अस्पताल से इलाज करवा रहा था परंतु इलाज होने के बावजूद भी कुछ खास फर्क नहीं पड़ा। अब दिवाली के बाद तो खांसी व सांस की समस्या बहुत अधिक बढ़ गई है। - ओमप्रकाश, गांव सौंडा निवासी।
कुछ दिनों पहले खांसी-जुकाम आदि की दिक्कत शुरू हुई थी। दवाइयां लेने के बाद भी बीमारी ठीक नहीं हुई। गांव के नजदीकी डाक्टरों से अपना इलाज करवा रहा था लेकिन आराम नहीं मिला। फिलहाल अंबाला सिटी नागरिक अस्पताल में इलाज करवा रहा हूं। -रणजीत सिंह, गांव धनकौर।
सांस को लेकर दिक्कत है। दिवाली के बाद से खांसी और सांस की दिक्कत ओर ज्यादा बढ़ गई यह सारा प्रदूषण का ही असर है। अब अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आया हूं। उम्मीद है कि यहां कि दवाई खाने से यह दिक्कत दूर हो जाएगी। - सिमरन जीत सिंह, गांव सरीफगढ़।
बीते तीन महीने से टीबी का इलाज करवा रहा हूं। पहले तो खांसी की ही दिक्कत अब सांस ने भी परेशान कर दिया है। इसका इलाज करवा रहा हूं, डॉक्टर ने सलाह दी है कि जब तक प्रदूषण कम नहीं हो जाता है मास्क का लगातार प्रयोग करना है। - सोमनाथ, शहजादपुर।
बुखार ठीक न होने के कारण अंबाला कैंट के चिकित्सकों ने सिटी के अस्पताल रेफर कर दिया था। अब यहां से इलाज चल रहा है दिवाली के बाद से खांसी की स्थिति ज्यादा खराब है क्योंकि खराब हवा सांस के साथ फेफड़ों में जा रही है। - सरोज बाला, गोविंद नगर, अंबाला कैंट।
सांस व खांसी की दिक्कत है। किसी ने सलाह दी तो यहां शहर के अस्पताल आए हैं। पिछले दो तीन दिन से तो स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। अभी दवाई लेने आया हूं। देखते हैं कि क्या कुछ असर होता है। - साईनदार, पुराना हमींदा निवासी, यमुनानगर।
लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है, इसी कारण खांसी व सांस वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। मरीजों को यही सलाह दे रहे हैं कि वह मास्क का प्रयोग करें क्योंकि अभी लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हमारी ओर से भी पूरा प्रयास है कि मरीजों को अच्छे से अच्छा उपचार दिया जाए।
- डाक्टर पवन कुमार, डिप्टी सर्जन, टीबी अस्पताल, अंबाला सिटी।