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कामयाबी कमाए धन से नहीं, दूसरे से प्राप्त प्रेम से आंकों : तरुण सागर
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Mon, 04 Jul 2016 12:35 AM IST
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तरुण सागर की पूजा करते राम बिलास शर्मा
- फोटो : Amar Ujala
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अंबाला छावनी के लॉर्ड महावीर जैन पब्लिक स्कूल के प्रांगण में विश्व विख्यात क्रांतिकारी राष्ट्र संत मुनि श्री 108 तरुण सागर जी महाराज के कड़वे प्रवचन की पांच दिवसीय शृंखला के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का अपार जन समूह मुनि के प्रवचनों का श्रवण और दर्शन के लिए पहुंचा।
हरियाणा के शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री प्रो. रामविलास शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में पांचवें दिन के प्रवचनों से पूर्व दीपशिखा प्रज्वलित करके और जैन ध्वज फहराया। उनका स्वागत स्कूल बैंड की धुन के साथ पुष्प गुच्छ देकर किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उप प्रधान कैंटोनमेंट बोर्ड सुरेंद्र तिवारी, सदस्य वित्त आयोग नीता खेड़ा पधारे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने ध्वजारोहण किया गया। दिगंबर जैन सभा के सदस्यों ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जैन मुनि तरुण सागर राष्ट्रीय संत हैं और भारतीय संस्कृति के मोबाइल अंबेसडर हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में लाखों देशवासियों को भगवान महावीर जैन की शिक्षाओं का ज्ञान दिया और सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में तरुण सागर जी के समागम के दौरान उन्होंने मुनि जी से इस वर्ष चैत्र मास चंडीगढ में आयोजित करने का अनुरोध किया है और उन्होंने अनुरोध को स्वीकार किया।
लार्ड महावीर जैन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने भक्तिमय कोरियोग्राफी की प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बना दिया। साथ ही जबलपुर से आई संगीता जैन के भजनों ने आनंद की सरिता प्रवाहित कर दिगंबर जैन सभा रजि. के सदस्यों द्वारा गुरु चरणों में श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।
कड़वे प्रवचनों में मुनि जी ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में कष्ट व परेशानियां आती हैं। महापुरुषों के जीवन कष्टों से भरे हुए होते हैं। मनुष्य को उनके जीवन से शिक्षा लेकर कभी भी धैर्य और आत्मविश्वास नही खोना चाहिए। धन जाने के बाद फिर से प्राप्त किया जा सकता है लेकिन धैर्य खो जाने पर मनुष्य जीवन में सब कुछ हार जाता है। मनुष्य को अपनी महानता और कामयाबी कमाए हुए धन से नहीं अपितु दूसरे से प्राप्त प्रेम से आंकनी चाहिए। जीवन में धन नही अपितु प्रभु भक्ति ही मनुष्य के काम आती है। यह जीवन के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति कराने में सहायक है।
मनुष्य को कभी भी मिट्टी के खिलौने की भांति गिरकर बिखरना नहीं चाहिए, अपितु गेंद की भांति गिरकर पूरे वेग से वापस आना चाहिए। जीवन में मनुष्य के कर्म ही उसे याति प्राप्त करवाते हैं ऐसे मनुष्य जन-जन के हृदय में युग-युग तक राज करते हैं। मनुष्य के दिल और दिमाग में हमेशा द्वंद्व चलता रहता है और जिसमें मनुष्य का दिमाग विजय प्राप्त कर लेता है।
मनुष्य को अपने हृदय पर अंकुश रखना चाहिए। मेरे वचन लोगों को कड़वे लगते हैं क्योंकि सत्य से अवगत करवाते हैं और सत्य हमेशा ही कड़वा होता है। मीठी वाणी मनुष्य के कानों को आनंदित करती हैं परंतु कड़वे वचन हृदय तक पहुंचते हैं और जीवन में परिवर्तन लाते हैं।
इस अवसर पर श्री महावीर जैन सभा के अध्यक्ष वीके जैन, महासचिव अशोक जैन, प्रबंधक राजन जैन, रमन जैन, धर्मवीर जैन, संजीव जैन गोपचा, नीता खेड़ा, सुरेंद्र तिवारी, ललित चौधरी, बीएस बिंद्रा, मुनिया देवी सहित अन्य गण्यमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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हरियाणा के शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री प्रो. रामविलास शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में पांचवें दिन के प्रवचनों से पूर्व दीपशिखा प्रज्वलित करके और जैन ध्वज फहराया। उनका स्वागत स्कूल बैंड की धुन के साथ पुष्प गुच्छ देकर किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उप प्रधान कैंटोनमेंट बोर्ड सुरेंद्र तिवारी, सदस्य वित्त आयोग नीता खेड़ा पधारे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने ध्वजारोहण किया गया। दिगंबर जैन सभा के सदस्यों ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि जैन मुनि तरुण सागर राष्ट्रीय संत हैं और भारतीय संस्कृति के मोबाइल अंबेसडर हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में लाखों देशवासियों को भगवान महावीर जैन की शिक्षाओं का ज्ञान दिया और सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
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उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में तरुण सागर जी के समागम के दौरान उन्होंने मुनि जी से इस वर्ष चैत्र मास चंडीगढ में आयोजित करने का अनुरोध किया है और उन्होंने अनुरोध को स्वीकार किया।
लार्ड महावीर जैन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने भक्तिमय कोरियोग्राफी की प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बना दिया। साथ ही जबलपुर से आई संगीता जैन के भजनों ने आनंद की सरिता प्रवाहित कर दिगंबर जैन सभा रजि. के सदस्यों द्वारा गुरु चरणों में श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।
कड़वे प्रवचनों में मुनि जी ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में कष्ट व परेशानियां आती हैं। महापुरुषों के जीवन कष्टों से भरे हुए होते हैं। मनुष्य को उनके जीवन से शिक्षा लेकर कभी भी धैर्य और आत्मविश्वास नही खोना चाहिए। धन जाने के बाद फिर से प्राप्त किया जा सकता है लेकिन धैर्य खो जाने पर मनुष्य जीवन में सब कुछ हार जाता है। मनुष्य को अपनी महानता और कामयाबी कमाए हुए धन से नहीं अपितु दूसरे से प्राप्त प्रेम से आंकनी चाहिए। जीवन में धन नही अपितु प्रभु भक्ति ही मनुष्य के काम आती है। यह जीवन के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति कराने में सहायक है।
मनुष्य को कभी भी मिट्टी के खिलौने की भांति गिरकर बिखरना नहीं चाहिए, अपितु गेंद की भांति गिरकर पूरे वेग से वापस आना चाहिए। जीवन में मनुष्य के कर्म ही उसे याति प्राप्त करवाते हैं ऐसे मनुष्य जन-जन के हृदय में युग-युग तक राज करते हैं। मनुष्य के दिल और दिमाग में हमेशा द्वंद्व चलता रहता है और जिसमें मनुष्य का दिमाग विजय प्राप्त कर लेता है।
मनुष्य को अपने हृदय पर अंकुश रखना चाहिए। मेरे वचन लोगों को कड़वे लगते हैं क्योंकि सत्य से अवगत करवाते हैं और सत्य हमेशा ही कड़वा होता है। मीठी वाणी मनुष्य के कानों को आनंदित करती हैं परंतु कड़वे वचन हृदय तक पहुंचते हैं और जीवन में परिवर्तन लाते हैं।
इस अवसर पर श्री महावीर जैन सभा के अध्यक्ष वीके जैन, महासचिव अशोक जैन, प्रबंधक राजन जैन, रमन जैन, धर्मवीर जैन, संजीव जैन गोपचा, नीता खेड़ा, सुरेंद्र तिवारी, ललित चौधरी, बीएस बिंद्रा, मुनिया देवी सहित अन्य गण्यमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।