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9 माह में एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी नगर निगम द्वारा बनाई जाने वाली गोशाला का प्रपोजल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jul 2022 01:42 AM IST
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The proposal of the Gaushala to be built by the Municipal Corporation could not move forward in 9 months
नगर निगम की ओर से अंबाला शहर में पांच एकड़ की गोशाला बनाए जाने की तैयारी लंबे समय से चल रही है। नवंबर 2021 की बैठक में इस योजना को अमलीजामा पहनाने पर सहमति बनी थी, मगर अभी तक यह सिरे नहीं चढ़ी है। दूसरी ओर बेसहारा गोवंश की वजह से सड़क हादसों का सिलसिला जारी है।
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अंबाला में करीब तीन एकड़ में सुल्लर गोशाला (200 से ज्यादा गोवंश ), करीब चार एकड़ में केवल कृष्ण मिगलानी गोशाला (करीब 750 गोवंश ), दो एकड़ में मोखा माजरा गोशाला (150 से 200 गोवंश) और करीब साढ़े तीन एकड़ में स्पाटू रोड स्थित गोशाला (करीब 500 गोवंश) में गोवंश को रखा जाता है, लेकिन यहां पर्याप्त जगह न होने के कारण बड़ी संख्या में बेसहारा गोवंश सड़कों पर घूमते रहते हैं। इसी देखते हुए पिछले वर्ष नगर निगम हाउस की बैठक में पांच एकड़ भूमि पर गोशाला बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। नगर निगम अंबाला की ओर से गोशाला बनाए जाने तक सुल्लर गोशाला को मासिक मदद राशि प्रदान की जा रही है। इसके बावजूद गली, बाजार, कालोनियों और लिंक रोड से लेकर नेशनल हाईवे तक हजारों की संख्या में बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं।
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नगर निगम के मनोनीत सदस्य एवं श्री केवल कृष्ण मिगलानी गोशाला के सदस्य संदीप सचदेवा का कहना है कि सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश शहर की बड़ी समस्या है। इसके लिए एक बड़ी गोशाला बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। कृष्ण मिगलानी गोशाला के संचालकों द्वारा चंडीगढ़ से हिसार की ओर निकाले गए हाईवे के समीप एक जगह को भी चिह्नित किया गया था। अगर निगम यह जगह संस्था को देती तो सरकार के सहयोग से इस जगह पर एक बड़ी गोशाला का निर्माण किया जा सकता है। हालांकि मामले में एक उच्चाधिकारी ने इस प्रस्ताव को दरकिनार कर स्वयं नगर निगम द्वारा गोशाला बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अभी तक न नगर निगम की ओर से गोशाला का निर्माण किया गया और न ही किसी संस्था की मदद से गोशाला की रूपरेखा तैयार की गई। इसका असर गोवंश और नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
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निगम पार्षद संदीप सचदेवा के मुताबिक गोशाला के लिए चिह्नित की गई नगर निगम की जगह हर लिहाज से कारगर है, मगर जगह के अलावा जो बड़ा बजट खर्च होना है, वह शेड बनाने, मैन पावर, चारदीवारी, पशु डिस्पेंसरी, गोबर के डिस्पोजल, नंदी शाला के लिए अलग ब्लाक आदि पर होगा। इन कार्यों के लिए करीब तीन से चार करोड़ का बजट चाहिए।

इस विषय पर वार्ता चल रही है और संबंधित विभाग को भी इस संबंध में जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गये हैं। जल्द ही गोशाला वाली योजना पर काम शुरू हो जाएगा। हमारा प्रयास है कि शहर वासियों को किसी तरह से परेशानी न हो।
- वीरेंद्र लाठर, नगर निगम आयुक्त
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