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Ambala News: रेलवे प्रशासन की बेरुखी का खामियाजा भुगत रहे सीवन माजरा गांव के लोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jan 2025 01:45 AM IST
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The people of Siwan Majra village are bearing the brunt of the indifference of the railway administration
बराड़ा। रेलवे प्रशासन की बेरुखी के चलते वीरवार को सीवन माजरा गांव के लोगों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और रास्ता खुलवाने की मांग की है। गांव के लोग जान जोखिम में डालकर रेल लाइन पार करने को मजबूर हैं। रेलवे अंडरब्रिज के अंदर जलभराव के कारण यह समस्या पिछले लगभग एक साल से बनी हुई है। ग्रामीणों की तरफ से मंडल रेल प्रबंधक को शिकायत देने के बाद भी समस्या का समाधान आजतक नहीं हो पाया है। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरन रेल लाइन पार करके जाना पड़ रहा है और इस वजह से उन्हें ट्रेन की चपेट में आने का डर सता रहा है।
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बराड़ा रेलवे स्टेशन के समीप सहारनपुर की तरफ रेल लाइन के किनारे बसे गांव के पास ऐसे हालात हैं। इस गांव के दर्जनों किसानों की कई एकड़ जमीन लाइन के दूसरी तरफ है। वहीं गांव की पंचायती जमीन भी इसी तरफ है। इसके अलावा लाइन के दूसरी तरफ दर्जनों लोगों के घर हैं जो कई वर्षों से यहीं रह रहे हैं। सीवन माजरा गांव से लाइन पार क्षेत्र में जाने के लिए रेलवे लाइन के नीचे बनी पुलिया से लोग आवागमन करते थे। यहां रहने वाले लोगों और किसानों के लिए यही एकमात्र रास्ता है। लेकिन कुछ समय पहले रेल विभाग ने पुलिया के एक तरफ पाइप लगाकर इसे बंद कर दिया क्योंकि पुलिया के अंदर जलभराव है और इससे हादसे हो सकता है। इस कारण वाहन सहित खेतों को जाने वाले किसानों को कई किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
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रेल लाइन के पार जमीन
सीवन माजरा के किसान नंबरदार अमरजीत सिंह ने बताया कि लाइन के एक तरफ उनका गांव है जबकि लाइन की दूसरी तरफ उन लोगों की जमीन है। उन्होंने बताया कि उनके अलावा गांव के ही किसान सतविंदर सिंह, अवतार सिंह, हरभजन, जगीर सिंह, तरलोक सिंह सहित अन्य की जमीन है। फिलहाल वह कई किलोमीटर तय करके अन्य किसानों के खेतों से अपनी मशीनें और वाहन निकालते हैं, लेकिन यदि उन किसानों ने मना कर दिया तो वह कहां जाएंगे। विभाग की इस कारगुजारी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
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गांव से कटा संपर्क
वहीं लाइन के दूसरी तरफ रहने वाले चानन राम ने बताया कि उनके अलावा राजकुमार, जगिंदर, कर्मचंद, जगीर, राजू, हाकम चंद, बचन लाल, बाबू राम, सोहन आदि वर्षों से घर बनाकर यहां रह रहे हैं। पुलिया के बंद होने से वो परेशानी झेल रहे हैं। इसके अलावा यहां पंचायती जमीन में गरीबों के लिए 100 गज के प्लाट काटे गए थे और यहां बिजली एवं पानी आदि की सुविधाएं भी प्रदान की गई थी, लेकिन रास्ता ना होने के कारण सब बेकार है।

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इस बारे में कई बार अंबाला डीआरएम को लिखित में शिकायत दे चुके हैं। लेकिन आज तक उनकी सुनवाई नहीं हुई। मजबूरी में स्कूल के बच्चे, बुुजुर्ग, महिलाएं एवं अन्य लोग रेललाइन पार करते हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
धर्म सिंह, सरपंच प्रतिनिधि
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यह मामला कंस्ट्रक्शन विभाग का है। जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकूंगा।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।
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