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रेलवे स्टेशन पर बच्चों को बनाया जा रहा नशेड़ी
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला
Updated Mon, 28 Jul 2014 12:19 AM IST
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वर्ल्ड क्लास स्टेशन का दर्जा पा चुके अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर अंजान बच्चों का जमावड़ा लगा हुआ है। इन बच्चों को नशे का आदी बनाकर कुछ लोग अपना काम करवा रहे हैं।
इसके बदले इन बच्चों को थोड़ा बहुत भोजन और नशा दिया जाता है। यह बच्चे भी काफी समय से इसी रेलवे स्टेशन पर अपना जीवन बिता रहे हैं। लेकिन बच्चों को काम करने वाली संस्थाएं तक अभी तक इस ओर कार्रवाई नहीं कर पा रहीं।
यह है इन बच्चों की स्थिति
कैंट रेलवे स्टेशन पर ऐसे बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है, जिनको न तो अपने माता-पिता का पता है और न ही अपने घर का। लंबे समय से यह बच्चे इसी रेलवे स्टेशन पर समय बिता रहे हैं। सूत्रों की मानें, तो इन बच्चों को कुछ लोग अपना काम निकलवाने के लिए इन बच्चाें का इस्तेमाल कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह बच्चे नशे के आदी हो चुके हैं और जिला की सामाजिक संस्थाएं अभी तक इनके कल्याण को लेकर गंभीर नहीं हैं। धीरे-धीरे ऐसे बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है। यह बच्चे कहां से आते हैं और कौन हैं, इनके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है।
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कौन दे रहा है इन बच्चों को नशा
कैंट स्टेशन पर इन बच्चों को नशेड़ी तो बनाया जा रहा है, लेकिन अभी तक इस मामले में कार्रवाई तक नहीं हुई। आरपीएफ की पोस्ट स्टेशन पर है, जबकि जीआरपी कर्मचारी भी स्टेशन पर तैनात रहते हैं। फिर नशे का सामान कौन इन बच्चों तक पहुंचा रहा है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कैंट के रहने वाले धर्मपाल धनगर, सन्नी कुमार, पंकज, सुरेंद्र सिंह, राजेश कुमार का कहना है कि स्टेशन पर ऐसे बच्चों का जमावड़ा लगना और फिर किसी भी संस्था अथवा प्रशासन द्वारा कार्रवाई न करना गलत है। एक तरह से यह भी बच्चों का शोषण ही है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को भी आगे आना चाहिए।
वर्जन
‘संस्था पूरी तरह से बच्चों को समर्पित है। किसी भी सूरत में बच्चों का शोषण रोकने के लिए कार्य किया जाता है। इस संबंध में संस्था के पास यदि कोई शिकायत आई है मेरी जानकारी में नहीं है। फिर भी इस बारे में पूछताछ करता हूं और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो स्टेशन पर ऐसे बच्चों को लेकर कुछ न कुछ तो अवश्य किया जाएगा।’
- परमजीत सिंह बडौला, डायरेक्टर चाइल्डलाइन
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इसके बदले इन बच्चों को थोड़ा बहुत भोजन और नशा दिया जाता है। यह बच्चे भी काफी समय से इसी रेलवे स्टेशन पर अपना जीवन बिता रहे हैं। लेकिन बच्चों को काम करने वाली संस्थाएं तक अभी तक इस ओर कार्रवाई नहीं कर पा रहीं।
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यह है इन बच्चों की स्थिति
कैंट रेलवे स्टेशन पर ऐसे बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है, जिनको न तो अपने माता-पिता का पता है और न ही अपने घर का। लंबे समय से यह बच्चे इसी रेलवे स्टेशन पर समय बिता रहे हैं। सूत्रों की मानें, तो इन बच्चों को कुछ लोग अपना काम निकलवाने के लिए इन बच्चाें का इस्तेमाल कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह बच्चे नशे के आदी हो चुके हैं और जिला की सामाजिक संस्थाएं अभी तक इनके कल्याण को लेकर गंभीर नहीं हैं। धीरे-धीरे ऐसे बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है। यह बच्चे कहां से आते हैं और कौन हैं, इनके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है।
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कौन दे रहा है इन बच्चों को नशा
कैंट स्टेशन पर इन बच्चों को नशेड़ी तो बनाया जा रहा है, लेकिन अभी तक इस मामले में कार्रवाई तक नहीं हुई। आरपीएफ की पोस्ट स्टेशन पर है, जबकि जीआरपी कर्मचारी भी स्टेशन पर तैनात रहते हैं। फिर नशे का सामान कौन इन बच्चों तक पहुंचा रहा है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कैंट के रहने वाले धर्मपाल धनगर, सन्नी कुमार, पंकज, सुरेंद्र सिंह, राजेश कुमार का कहना है कि स्टेशन पर ऐसे बच्चों का जमावड़ा लगना और फिर किसी भी संस्था अथवा प्रशासन द्वारा कार्रवाई न करना गलत है। एक तरह से यह भी बच्चों का शोषण ही है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को भी आगे आना चाहिए।
वर्जन
‘संस्था पूरी तरह से बच्चों को समर्पित है। किसी भी सूरत में बच्चों का शोषण रोकने के लिए कार्य किया जाता है। इस संबंध में संस्था के पास यदि कोई शिकायत आई है मेरी जानकारी में नहीं है। फिर भी इस बारे में पूछताछ करता हूं और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो स्टेशन पर ऐसे बच्चों को लेकर कुछ न कुछ तो अवश्य किया जाएगा।’
- परमजीत सिंह बडौला, डायरेक्टर चाइल्डलाइन