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Ambala News: वैष्णो देवी जाने वाले भक्तों की राह होगी आसान, रावी नदी का पुल संख्या-17 दुरुस्त
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जम्मू मंडल में पुन: तैयार किया गया क्षतिग्रस्त पुल। रेलवे
अंबाला। जम्मू-कश्मीर जाने वाले रेल यात्रियों और माता वैष्णो देवी के भक्तों को राहत मिलेगी। वर्ष 2025 की भीषण बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए पुल संख्या-17 को उत्तर रेलवे ने रिकॉर्ड समय में बहाल कर दिया है। जिस पुल को बनाने में विशेषज्ञों ने दो साल का समय लगने की आशंका जताई थी, उसे रेलवे के इंजीनियरों ने दिन-रात एक कर महज 8 महीनों में तैयार कर दिया है।
पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण जम्मू जाने वाली दो वंदे भारत एक्सप्रेस सहित करीब 20 महत्वपूर्ण ट्रेनों को 30 मई तक के लिए रद्द कर दिया गया था। पुल बहाल होने के बाद अब इन ट्रेनों का संचालन जल्द शुरू होगा। इससे न केवल जम्मू मंडल बल्कि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडे ने बताया कि कठुआ और माधोपुर सेक्शन के बीच रावी नदी पर स्थित यह पुल रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इस पुल में 45 मीटर स्पैन वाले नॉन-स्टैंडर्ड गर्डर डिजाइन का इस्तेमाल किया गया था, जो तकनीकी रूप से काफी जटिल था। रेलवे की टीम ने इनोवेटिव इंजीनियरिंग और सूक्ष्म प्लानिंग के जरिए असंभव को संभव कर दिखाया।
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बाढ़ से बिगड़े थे हालात
वर्ष 2025 में आई बाढ़ और बारिश ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भारी तबाही मचाई थी। रेलवे के पांच मुख्य पुल इसकी चपेट में आए थे। उत्तर रेलवे के अनुसार, पुल संख्या-17 की बहाली के साथ ही अब बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए सभी पांचों प्रमुख पुल पूरी तरह दुरुस्त हो चुके हैं। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि ट्रैक टेस्टिंग का काम अंतिम चरण में है और बहुत जल्द वंदे भारत समेत अन्य ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर पटरी पर लौट आएंगी।
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पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण जम्मू जाने वाली दो वंदे भारत एक्सप्रेस सहित करीब 20 महत्वपूर्ण ट्रेनों को 30 मई तक के लिए रद्द कर दिया गया था। पुल बहाल होने के बाद अब इन ट्रेनों का संचालन जल्द शुरू होगा। इससे न केवल जम्मू मंडल बल्कि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
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उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडे ने बताया कि कठुआ और माधोपुर सेक्शन के बीच रावी नदी पर स्थित यह पुल रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इस पुल में 45 मीटर स्पैन वाले नॉन-स्टैंडर्ड गर्डर डिजाइन का इस्तेमाल किया गया था, जो तकनीकी रूप से काफी जटिल था। रेलवे की टीम ने इनोवेटिव इंजीनियरिंग और सूक्ष्म प्लानिंग के जरिए असंभव को संभव कर दिखाया।
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बाढ़ से बिगड़े थे हालात
वर्ष 2025 में आई बाढ़ और बारिश ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भारी तबाही मचाई थी। रेलवे के पांच मुख्य पुल इसकी चपेट में आए थे। उत्तर रेलवे के अनुसार, पुल संख्या-17 की बहाली के साथ ही अब बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए सभी पांचों प्रमुख पुल पूरी तरह दुरुस्त हो चुके हैं। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि ट्रैक टेस्टिंग का काम अंतिम चरण में है और बहुत जल्द वंदे भारत समेत अन्य ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर पटरी पर लौट आएंगी।