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Ambala News: कलायत में बाधित विकास कार्यों के मुद्दे चुनाव में रहेंगे प्रभावी
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कलायत। विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और इनेलो अपने प्रत्याशी उतार चुकी है। भाजपा ने कलायत से पूर्व में विधायक व प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रही कमलेश ढांडा पर ही भरोसा जताया है। भाजपा का मानना है कि कलायत में पिछले 10 साल में हुए विकास कार्यों पर मतदाताओं की मुहर लगेगी।
वास्तविक धरातल पर चुनावों की घंटी बजते ही कलायत नगर के बड़े मुद्दों ने रंग पकड़ लिया है। पिछले 10 वर्षों में मुख्यमंत्री की घोषणा वाले कार्य भी पूरे नहीं हो पाए हैं। हुक्का चौपालों व पार्कोंं में होने वाली चर्चाओं में इस समय कलायत में लंबित मुद्दे ही चर्चा का केंद्र बिंदु बने हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पहले कार्यकाल में घोषित अग्रसेन पार्क, भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र, महाराणा प्रताप सामुदायिक केंद्र अभी तक भी अधूरे ही पड़े हैं।
करीब पांच करोड़ की लागत से बनने वाला अग्रसेन पार्क दस साल में भी पूरा नहीं हो पाया। इस पार्क में मुख्यद्वार ही नहीं लगाए जा सके जिससे यह पार्क केवल आवारा पशुओं की शरणस्थली बन कर रह गया। पार्क निर्माण में प्रस्तावित पेयजल, शौचालय, प्लांटेशन, ओपन जिम, बिजली, बच्चों के झूले कुछ भी नहीं लगाए गए और पांच करोड़ खर्च होने के बाद भी कार्य अधूरा ही है। वार्ड नंबर 11 में बनने वाला भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र दो करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी पिछले दो प्लान से अधूरा ही पड़ा है । यह अब जर्जर हालत में पहुंच गया।
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महाराणा प्रताप सामुदायिक केंद्र लोगों के प्रयोग में तो आ गया पर मूलभूत सुविधाएं 10 सालों में भी पूरी नहीं हो सकीं। पानी की निकासी से जूझ रहे कलायत को बचाने के लिए कलायत से अमीन ड्रेन तक जाने वाली 18 करोड़ से डाली जा रही सीवरेज पाइपों का कार्य बीच में बंद पड़ा है। करोड़ों रुपयों की लागत से होने वाली कपिल मुनि जीर्णोद्वार की प्रस्तावित परियोजना सिरे ही नहीं चढ़ पाई। कलायत सहित आठ गांवों को भाखड़ा का पानी मिलने की परियोजना लंबित ही पड़ी है।
बेशक कलायत को नगर का दर्जा मिल गया पर जर्जर बिजली व्यवस्था आज भी दशकों पुराने ढर्रे पर ही है उसमें कोई बदलाव नहीं हो पाया। भाजपा की पहली पारी में घोषित करोड़ों रुपये की लागत से नागरिक अस्पताल तो बना दिया गया पर उसमें चिकित्सक व मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। पिछले दो दशकों से कलायत के युवा वर्ग की स्टेडियम की मांग को आज तक पूरा नहीं किया गया। जिसके कारण से बच्चों को सड़कों या नहर की पटरियों पर ही पूर्वाभ्यास करना पड़ रहा है। कलायत नगर की जनता में इस समय उपरोक्त मुद्दे पूरी तरह से प्रभावी हैं और जनता भाजपा प्रत्याशी से इनका जवाब मांगने की प्रतीक्षा में है।
तकनीकी बाधाओं के कारण से ही कई कार्य रह गए अधूरे
फोटो नंबर-31
कलायत जनप्रतिनिधि कमलेश ढांडा ने कहा कि भाजपा ने अपने दोनों कार्यकाल में कलायत नगर सहित पूरे विधानसभा में विकास कार्यों को पूर्णता दी है। कुछ विकास कार्य तकनीकी कारणों से समय पर पूरे नहीं हो पाए। आने वाले समय में उनको प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
- कमलेश ढांडा, विधायक कलायत।
हुए अनेक विकास कार्य-
फोटो नंबर-32
10 साल में कायाकल्प हो गई नगर की हरियाणा बनने से लेकर वर्ष 2014 कलायत नगर पूरी तरह से विकास की बाट ही जोह रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2016 में कलायत के विकास के लिए जो पिटारा खोला उससे नगर का स्वरूप ही बदल गया। नागरिक अस्पताल, पार्क, सामुदायिक केंद्र जैसी सुविधाओं का इस कार्यकाल में सूत्रपात हुआ।
मैनपाल राणा पूर्व नगरपालिका प्रधान कलायत।
विकास कार्यों से बदली कलायत की रंगत-
फोटो नंबर-33
पिछले 10 साल के कार्यकाल में कलायत का चहुंमुखी विकास हुआ। लघु सचिवालय, विश्रामगृह, नगरपालिका भवन, नगर की सभी गलियां पक्की, स्ट्रीट लाइटेंं सभी जनता की सुविधा के लिए उपलब्ध हुआ है। कुछ कार्य अर्थाभाव के चलते अधूरे रह गए वे भी पैसा आने के बाद शीघ्र पूरे होंगे।
- राजू कौशिक, भाजपा नेता, कलायत।
कलायत के विकास को लगा ताला-
फोटो नंबर-34
भाजपा के पिछले कार्यकाल में तो विकास कार्य हुए पर दूसरे कार्यकाल में चल रहे घोषित कार्यों को भी पूरा नहीं किया जा सका। भ्रष्टाचार, भाई भतीजा वाद बढ़ा और विकास कार्य गए बट्टेखाते में। थोड़ी सी बरसात में ही नगर जलमग्न हो जाता है। निकासी न होने के कारण कुछ मुख्यमार्गों पर तो यह केवल धूप में सूखता ही है। नगर की अधिकांश गलियां टूटी हैं। चुनाव में जनता प्रतिनिधि से हर हिसाब लेगी।
- दीपक निर्मल।
शिक्षा जगत में हुई नाइंसाफी-
फोटो नंबर-35
कलायत की सामाजिक संस्था ने 16 वर्षों तक चला कर महिला काॅलेज सरकार को इस भरोसे पर दिया था कि छात्राओं को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। हालात यहां तक खराब हो गए कि कालेज परिसर में जमा होने वाले पानी की बदबू से वहां से निकलना भी दूभर हो जाता है। कालेज में स्टाफ की भारी कमी है और छात्राओं पर नियंत्रण नहीं है। केवल सरकारी दर्जा मिला है सुविधाएं नहीं। इसी तरह से कलायत में माडल संस्कृति स्कूल तो घोषित हुआ पर उसको भवन आज तक भी नहीं मिल पाया।
- सुरेश राणा समाजसेवी, कलायत।
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वास्तविक धरातल पर चुनावों की घंटी बजते ही कलायत नगर के बड़े मुद्दों ने रंग पकड़ लिया है। पिछले 10 वर्षों में मुख्यमंत्री की घोषणा वाले कार्य भी पूरे नहीं हो पाए हैं। हुक्का चौपालों व पार्कोंं में होने वाली चर्चाओं में इस समय कलायत में लंबित मुद्दे ही चर्चा का केंद्र बिंदु बने हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पहले कार्यकाल में घोषित अग्रसेन पार्क, भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र, महाराणा प्रताप सामुदायिक केंद्र अभी तक भी अधूरे ही पड़े हैं।
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करीब पांच करोड़ की लागत से बनने वाला अग्रसेन पार्क दस साल में भी पूरा नहीं हो पाया। इस पार्क में मुख्यद्वार ही नहीं लगाए जा सके जिससे यह पार्क केवल आवारा पशुओं की शरणस्थली बन कर रह गया। पार्क निर्माण में प्रस्तावित पेयजल, शौचालय, प्लांटेशन, ओपन जिम, बिजली, बच्चों के झूले कुछ भी नहीं लगाए गए और पांच करोड़ खर्च होने के बाद भी कार्य अधूरा ही है। वार्ड नंबर 11 में बनने वाला भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र दो करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी पिछले दो प्लान से अधूरा ही पड़ा है । यह अब जर्जर हालत में पहुंच गया।
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महाराणा प्रताप सामुदायिक केंद्र लोगों के प्रयोग में तो आ गया पर मूलभूत सुविधाएं 10 सालों में भी पूरी नहीं हो सकीं। पानी की निकासी से जूझ रहे कलायत को बचाने के लिए कलायत से अमीन ड्रेन तक जाने वाली 18 करोड़ से डाली जा रही सीवरेज पाइपों का कार्य बीच में बंद पड़ा है। करोड़ों रुपयों की लागत से होने वाली कपिल मुनि जीर्णोद्वार की प्रस्तावित परियोजना सिरे ही नहीं चढ़ पाई। कलायत सहित आठ गांवों को भाखड़ा का पानी मिलने की परियोजना लंबित ही पड़ी है।
बेशक कलायत को नगर का दर्जा मिल गया पर जर्जर बिजली व्यवस्था आज भी दशकों पुराने ढर्रे पर ही है उसमें कोई बदलाव नहीं हो पाया। भाजपा की पहली पारी में घोषित करोड़ों रुपये की लागत से नागरिक अस्पताल तो बना दिया गया पर उसमें चिकित्सक व मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। पिछले दो दशकों से कलायत के युवा वर्ग की स्टेडियम की मांग को आज तक पूरा नहीं किया गया। जिसके कारण से बच्चों को सड़कों या नहर की पटरियों पर ही पूर्वाभ्यास करना पड़ रहा है। कलायत नगर की जनता में इस समय उपरोक्त मुद्दे पूरी तरह से प्रभावी हैं और जनता भाजपा प्रत्याशी से इनका जवाब मांगने की प्रतीक्षा में है।
तकनीकी बाधाओं के कारण से ही कई कार्य रह गए अधूरे
फोटो नंबर-31
कलायत जनप्रतिनिधि कमलेश ढांडा ने कहा कि भाजपा ने अपने दोनों कार्यकाल में कलायत नगर सहित पूरे विधानसभा में विकास कार्यों को पूर्णता दी है। कुछ विकास कार्य तकनीकी कारणों से समय पर पूरे नहीं हो पाए। आने वाले समय में उनको प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
- कमलेश ढांडा, विधायक कलायत।
हुए अनेक विकास कार्य-
फोटो नंबर-32
10 साल में कायाकल्प हो गई नगर की हरियाणा बनने से लेकर वर्ष 2014 कलायत नगर पूरी तरह से विकास की बाट ही जोह रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2016 में कलायत के विकास के लिए जो पिटारा खोला उससे नगर का स्वरूप ही बदल गया। नागरिक अस्पताल, पार्क, सामुदायिक केंद्र जैसी सुविधाओं का इस कार्यकाल में सूत्रपात हुआ।
मैनपाल राणा पूर्व नगरपालिका प्रधान कलायत।
विकास कार्यों से बदली कलायत की रंगत-
फोटो नंबर-33
पिछले 10 साल के कार्यकाल में कलायत का चहुंमुखी विकास हुआ। लघु सचिवालय, विश्रामगृह, नगरपालिका भवन, नगर की सभी गलियां पक्की, स्ट्रीट लाइटेंं सभी जनता की सुविधा के लिए उपलब्ध हुआ है। कुछ कार्य अर्थाभाव के चलते अधूरे रह गए वे भी पैसा आने के बाद शीघ्र पूरे होंगे।
- राजू कौशिक, भाजपा नेता, कलायत।
कलायत के विकास को लगा ताला-
फोटो नंबर-34
भाजपा के पिछले कार्यकाल में तो विकास कार्य हुए पर दूसरे कार्यकाल में चल रहे घोषित कार्यों को भी पूरा नहीं किया जा सका। भ्रष्टाचार, भाई भतीजा वाद बढ़ा और विकास कार्य गए बट्टेखाते में। थोड़ी सी बरसात में ही नगर जलमग्न हो जाता है। निकासी न होने के कारण कुछ मुख्यमार्गों पर तो यह केवल धूप में सूखता ही है। नगर की अधिकांश गलियां टूटी हैं। चुनाव में जनता प्रतिनिधि से हर हिसाब लेगी।
- दीपक निर्मल।
शिक्षा जगत में हुई नाइंसाफी-
फोटो नंबर-35
कलायत की सामाजिक संस्था ने 16 वर्षों तक चला कर महिला काॅलेज सरकार को इस भरोसे पर दिया था कि छात्राओं को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। हालात यहां तक खराब हो गए कि कालेज परिसर में जमा होने वाले पानी की बदबू से वहां से निकलना भी दूभर हो जाता है। कालेज में स्टाफ की भारी कमी है और छात्राओं पर नियंत्रण नहीं है। केवल सरकारी दर्जा मिला है सुविधाएं नहीं। इसी तरह से कलायत में माडल संस्कृति स्कूल तो घोषित हुआ पर उसको भवन आज तक भी नहीं मिल पाया।
- सुरेश राणा समाजसेवी, कलायत।