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Ambala News: संकट में 2162 विद्यार्थियों का भविष्य, आधार नहीं होना बना वजह
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अंबाला सिटी। राजकीय और निजी स्कूलों में विद्यार्थियों को दाखिले में दिक्कत आ रही है। इस वजह आधार और परिवार पहचान पत्र का न होना है। अभी तक राजकीय स्कूलों में दो हजार 162 दाखिले ऑफलाइन हैं।
इन विद्यार्थियों के पास दाखिले के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। इनमें परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। ऐसी ही समस्या निजी स्कूलों में भी देखने को मिल रही है। वहीं, दूसरी तरफ स्कूलों की ओर से ऐसे विद्यार्थियों का दाखिला ऑफलाइन किया जा रहा है, मगर ऑनलाइन न होने से यह बच्चे सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हैं। इन बच्चों का दस्तावेज न होने से आगे क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है
प्रवासी विद्यार्थियों को आ रही दिक्कत
असल में राजकीय और निजी स्कूलों में उन प्रवासी बच्चों को ज्यादा दिक्कत आ रही है, जिनके पास आधार कार्ड व परिवार पहचान पत्र नहीं हैं। ऐसे विद्यार्थियों को पहले स्कूल, सरपंच, पार्षद की ओर से फार्म सत्यापित करने पर और शपथ-पत्र देकर भी आधार कार्ड बन जाते थे, लेकिन अब बिना जन्म-प्रमाण पत्र के आधार कार्ड नहीं बन रहा और परिवार पहचान पत्र बनने में भी दिक्कत आ रही है।
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राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ उठा चुका मुद्दा
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने बताया कि पहले स्कूल स्तर पर शिक्षक फार्म पर हस्ताक्षर कर देते थे। जिससे बच्चे का आधार कार्ड बन जाता था। मगर दो वर्ष से यह सरकार की ओर से बंद कर दिया गया है। संघ ने निदेशालय में भी लिखित में दिया था कि स्कूल में दाखिला नंबर के आधार पर स्कूल रजिस्ट्रेशन नंबर बन जाए ताकि बच्चे की हाजिरी लग जाए। उनको किताबें, छात्रवृत्ति और वर्दी मिल सकें।
अभी तक इन कक्षा में हुए इतने दाखिले
कक्षा दाखिल बच्चे
बालवाटिका 2084
पहली 3497
दूसरी 3549
तीसरी 3748
चौथी 5036
पांचवीं 6179
छठी 6291
सातवीं 6955
आठवीं 7699
नौवीं 6690
दसवीं 6607
ग्यारहवीं 377
बारहवीं 5982
वर्जन
जिले में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 67 हजार विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है। इसी तरह दो हजार 162 दाखिले ऑफलाइन हुए हैं। किसी भी बच्चे को दाखिले से वंचित नहीं रखा जाएगा। दस्तावेज न होने पर भी दाखिले किए जा रहे हैं।
सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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इन विद्यार्थियों के पास दाखिले के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। इनमें परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। ऐसी ही समस्या निजी स्कूलों में भी देखने को मिल रही है। वहीं, दूसरी तरफ स्कूलों की ओर से ऐसे विद्यार्थियों का दाखिला ऑफलाइन किया जा रहा है, मगर ऑनलाइन न होने से यह बच्चे सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हैं। इन बच्चों का दस्तावेज न होने से आगे क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है
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प्रवासी विद्यार्थियों को आ रही दिक्कत
असल में राजकीय और निजी स्कूलों में उन प्रवासी बच्चों को ज्यादा दिक्कत आ रही है, जिनके पास आधार कार्ड व परिवार पहचान पत्र नहीं हैं। ऐसे विद्यार्थियों को पहले स्कूल, सरपंच, पार्षद की ओर से फार्म सत्यापित करने पर और शपथ-पत्र देकर भी आधार कार्ड बन जाते थे, लेकिन अब बिना जन्म-प्रमाण पत्र के आधार कार्ड नहीं बन रहा और परिवार पहचान पत्र बनने में भी दिक्कत आ रही है।
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राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ उठा चुका मुद्दा
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने बताया कि पहले स्कूल स्तर पर शिक्षक फार्म पर हस्ताक्षर कर देते थे। जिससे बच्चे का आधार कार्ड बन जाता था। मगर दो वर्ष से यह सरकार की ओर से बंद कर दिया गया है। संघ ने निदेशालय में भी लिखित में दिया था कि स्कूल में दाखिला नंबर के आधार पर स्कूल रजिस्ट्रेशन नंबर बन जाए ताकि बच्चे की हाजिरी लग जाए। उनको किताबें, छात्रवृत्ति और वर्दी मिल सकें।
अभी तक इन कक्षा में हुए इतने दाखिले
कक्षा दाखिल बच्चे
बालवाटिका 2084
पहली 3497
दूसरी 3549
तीसरी 3748
चौथी 5036
पांचवीं 6179
छठी 6291
सातवीं 6955
आठवीं 7699
नौवीं 6690
दसवीं 6607
ग्यारहवीं 377
बारहवीं 5982
वर्जन
जिले में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 67 हजार विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है। इसी तरह दो हजार 162 दाखिले ऑफलाइन हुए हैं। किसी भी बच्चे को दाखिले से वंचित नहीं रखा जाएगा। दस्तावेज न होने पर भी दाखिले किए जा रहे हैं।
सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।