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अंबाला से भड़की थी विद्रोह की आग, कोतवाल को था आभास

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Aug 2022 12:39 AM IST
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The fire of rebellion was raging from Ambala, the Kotwal was aware
राजेश शांडिल्य
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अंबाला। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को अंग्रेजों के खिलाफ पहली गोली चलाई थी। उससे कई दिन पहले अंबाला के सैनिकों में विद्रोह की ज्वाला भड़क चुकी थी। इस दौरान अंबाला छावनी की मेस, अस्तबलों सहित कई अधिकारियों और अंग्रेजों के प्रति वफादारी रखने वाले सैनिकों के घर जला दिए गए थे। भारतीय सैनिकों द्वारा रचे जा रहे विद्रोह कि सारी सूचना अंबाला के तत्कालीन कोतवाल ज्वाला नाथ ने एक सैनिक से प्राप्त की थी। उन्होंने उस समय के जनरल कमांडिंग अंबाला डिवीजन तक यह सूचना पहुंचाई थी। इसके बाद सूचना कमांडर इन चीफ तक पहुंची, लेकिन रेजिमेंट के आफिसर कमांडिंग ने इस सूचना को हलके में लेते हुए कोई महत्व नहीं दिया। इसके बाद जो बवाल अंबाला में हुआ वह तारीख दर तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।
राजकीय पीजी कॉलेज छावनी के एसोसिएट प्रोफेसर अतुल यादव के मुताबिक तब छावनी में नए कारतूसों को लेकर भारतीय सैनिकों में गुस्सा पनप रहा था। इसके परिणामस्वरूप भारतीय सैनिकों और अन्य लोगों ने छावनी के अंग्रेज अधिकारियों और उनके सहायकों के मकान आदि जला दिए थे। ऐसे ही कुछ घरों को आग लगाने का प्रयास किया गया था। छावनी में 26 मार्च 1857 से लेकर एक मई 1857 तक हुए विद्रोह के बाद 10 मई को शाम पौने पांच बजे विद्युत तार सेवा भारत द्वारा एक संदेश अंबाला के तत्कालीन डीसी ने रावलपिंडी में पंजाब के चीफ कमिश्नर को भेजा था।
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26 मार्च 1857 को शस्त्रागार में कार्यरत नेटिव इन्फेंट्री की 36वीं रेजीमेंट के सूबेदार हरबंस सिंह के मकान को जलाने का प्रयास किया था। इसके बाद 13 अप्रैल 1857 को यूरोपियन शस्त्रागार का छप्पर जलाया गया। 15 अप्रैल 1857 को नेटिव इन्फेंट्री की 60वीं रेजिमेंट के बैरक प्रशिक्षक बूचर के नौकरों के मकानों में आग लगाई गई। 16 अप्रैल 1857 को अस्पताल (28वीं बटालियन स्वदेशी पैदल सेना) जिसमें यूरोपियनों के शस्त्र भंडार में आग लगाने का प्रयास किया गया। नंबर नौ स्वदेशी पैदल सेना के बैरक में यूरोपियन सिपाहियों के लिए रखे हुए बीयर के 442 पीपे भी जला दिए गए।
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वहीं 17 अप्रैल 1857 को 50वीं बटालियन स्वदेशी पैदल सेना की बैरकें और लेफ्टिनेंट व्हीटिंग के बंगले को आग के हवाले किया गया। इसके बाद 19 अप्रैल 1857 को 60वीं बटालियन स्वदेशी पैदल सेना की बैरकें, लेफ्टिनेंट क्रैंगल का आवास, 36वीं रेजीमेंट रौस, 9वीं रेजीमेंट कॉर्नफील्ड व तीसरी रेजीमेंट के शस्त्रगारों से संबंधित अधिकारियों के अस्तबल जला दिए गए थे। श्योनारायण सिंह, सूबे तीसरी कंपनी, पांचवीं रेजीमेंट, स्वदेशी पैदल सेना के मकान को आग लगाई गई और ग्रांट ट्रंक रोड (जीटी रोड) की सिविल पुलिस चौकी को भी जलाने का प्रयत्न किया गया था।
20 अप्रैल 1857 को पांचवीं बटालियन स्वदेशी पैदल सेना बैरकों के जमादारों और हवलदारों के घरों को जलाने का प्रयास किया। यह दोनों शस्त्रागार में कार्यरत थे। 21 अप्रैल 1857 को 60वीं रेजीमेंट स्वदेशी पैदल सेना की छठी कंपनी के सात मकान आग के हवाले कर दिए गए। इनमें उन सिपाहियों का सामान था, जोकि छुट्टियों पर गए हुए थे। 22 अप्रैल 1857 को पांचवीं बटालियन स्वदेशी पैदल सेना की मेस को आग लगाई गई। साथ ही यूरोपियन पैदल सेना के मेजर लाफ्टन के अस्तबल को जलाने का प्रयास किया गया। 23 अप्रैल 1857 को 9वीं लांसर सैनिक बैरक शस्त्रागार में कार्यरत 41वीं रेजिमेंट स्वदेशी पैदल सेना के कैप्टन सांडर्स के मकान को जलाने का प्रयास किया गया। 25 अप्रैल 1857 को 9वीं लांसर बैरक बैंड मास्टर का आवास और 9वीं लांसर की संपत्ति जला दी गई। 26 अप्रैल 1857 को नौवीं घुड़सवार सेना के क्षेत्र के प्रशिक्षक और लेफ्टिनेंट शॉ के मकान को जलाने का प्रयत्न किया गया। एक मई 1857 को पांचवीं रेजिमेंट स्वदेशी पैदल के सिपाही बैजनाथ के मकान को जलाया गया।
रावलपिंडी भेजा 136 शब्दों का संदेश
10 मई 1857 को अंबाला के तत्कालीन डीसी ने रावलपिंडी में पूरे हालात पर 136 शब्दों का एक विद्युत तार संदेश चीफ कमिश्नर पंजाब को भेजा था। अंग्रेजी में भेजे गए इस तार संदेश की प्रति के साथ इसके हिंदी अनुवाद की प्रति भी रिकॉर्ड में रखी गई है।

हरियाणा क्षेत्र को कब्जाया तो दो भागों में बांट दिया
अंग्रेजों ने जब 1803 में वर्तमान हरियाणा (तब संयुक्त पंजाब) के क्षेत्र पर कब्जा किया तो उसे दो भागों में बांट दिया था। इसमें यमुना नदी के साथ लगते क्षेत्र को असाइंड टेरिटरी का नाम दिया। यह क्षेत्र दिल्ली में बैठे ब्रिटिश ऑफिसर के अधीन था, जबकि दूसरा क्षेत्र स्वामी भक्त राजाओं में बांट दिया, जिसे बफर जोन कहा जाता था। बफर जोन का सीधा मतलब यह था कि अगर इन क्षेत्रों में किसी प्रकार का हमला हो तो ब्रिटिश केंद्र सुरक्षित रहे।
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