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हाईटैक शराब तस्कर : हर दो सौ मीटर पर बदला जाना था ड्राइवर, मिलता था नया फोन व सिम
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अंबाला में पकड़े इस कैंटर में धान के भूसे के कट्टों के नीचे से पकड़ी गई थी शराब की पेटियां
अंशु शर्मा
अंबाला। अमृतसर से कैंटर में ड्राई सिटी बिहार पहुंचाई जा रही 450 शराब की पेटियों के मामले में एसआईटी की जांच में एक के बाद एक परतें खुलती जा रही है। जांच में सामने आया है कि हाईटेक शराब तस्कर खुद को पुलिस से बचाने के लिए हर दो सौ मीटर की दूरी पर कैंटर का ड्राइवर बदल दिया करते थे।
बदले में उन्हें पहले पांच हजार रुपये मिलते थे और डिलिवरी होने के बाद करीब 15 से 20 हजार रुपये की राशि देना तय होता था। इतना ही नहीं ड्राइवरों के कैंटर पर चढ़ने से पहले ही उनसे मोबाइल ले लिए जाते थे और तस्कर खुद के द्वारा खरीदा गया नया मोबाइल व सिम देते थे ताकि किसी नाके पर आरोपी पकड़ा जाता है तो पुलिस कॉल हिस्ट्री से उन तक पहुंच न सके। साथ ही व्हाट्सअप कॉल का भी इस्तेमाल किया जाता था। बता दें कि अंबाला पुलिस ने कैंटर में लदे धान के भूसों के कट्टे के नीचे से शराब की अवैध 450 पेटियां बरामद की थी। 31 मार्च को इसमें वाहन पकड़ा था।
रोहतक के शराब कारोबारी का नाम आया सामने
शराब तस्करी के मामले की आंच अब रोहतक के एक शराब कारोबारी तक भी पहुंच गई है। हालांकि अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। अगर यह गिरफ्तारी होती है तो वह इस मामले को सुलझाने में अहम कड़ी बन सकती है। इसके जरिए ही पुलिस पता लगा पाएगी कि आखिर यह शराब अमृतसर व उसके आसपास किस फैक्ट्री व ठेके से ली गई है। बिहार में कहां पहुंचाई जानी थी। अभी तक इस मामले में अंबाला सदर थाना पुलिस ने मौके से कैंटर चालक जींद निवासी आशीष को काबू किया था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने ट्रक को अमृतसर से केवल रोहतक तक पहुंचा था। आगे से किसी दूसरे ड्राइवर ने जाना था। आशीष के जरिए पुलिस दलाल व दूसरे ड्राइवर तक पहुंची थी। पुलिस ने दो ओर आरोपी हिसार निवासी अजय व रोहतक निवासी संजय को काबू किया है।
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बारकोड हटाकर होती थी तस्करी
जांच में यह भी सामने आया है कि अमृतसर से लाखों रुपये में खरीदी गई शराब गुजरात व बिहार में कई गुणा दाम पर बिकती थी। शराब तस्कर बीच रास्ते पकड़े जाने से बचने के लिए शराब की पेटियों व बोतलों से बारकोड ही हटा देते थे ताकि यह पता न चल सके कि शराब कहां की है। एसआईटी गठित होने के बाद पुलिस की टीमें अमृतसर सहित हरियाणा में कई जगह दबिश दे रही है।
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अंबाला। अमृतसर से कैंटर में ड्राई सिटी बिहार पहुंचाई जा रही 450 शराब की पेटियों के मामले में एसआईटी की जांच में एक के बाद एक परतें खुलती जा रही है। जांच में सामने आया है कि हाईटेक शराब तस्कर खुद को पुलिस से बचाने के लिए हर दो सौ मीटर की दूरी पर कैंटर का ड्राइवर बदल दिया करते थे।
बदले में उन्हें पहले पांच हजार रुपये मिलते थे और डिलिवरी होने के बाद करीब 15 से 20 हजार रुपये की राशि देना तय होता था। इतना ही नहीं ड्राइवरों के कैंटर पर चढ़ने से पहले ही उनसे मोबाइल ले लिए जाते थे और तस्कर खुद के द्वारा खरीदा गया नया मोबाइल व सिम देते थे ताकि किसी नाके पर आरोपी पकड़ा जाता है तो पुलिस कॉल हिस्ट्री से उन तक पहुंच न सके। साथ ही व्हाट्सअप कॉल का भी इस्तेमाल किया जाता था। बता दें कि अंबाला पुलिस ने कैंटर में लदे धान के भूसों के कट्टे के नीचे से शराब की अवैध 450 पेटियां बरामद की थी। 31 मार्च को इसमें वाहन पकड़ा था।
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रोहतक के शराब कारोबारी का नाम आया सामने
शराब तस्करी के मामले की आंच अब रोहतक के एक शराब कारोबारी तक भी पहुंच गई है। हालांकि अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। अगर यह गिरफ्तारी होती है तो वह इस मामले को सुलझाने में अहम कड़ी बन सकती है। इसके जरिए ही पुलिस पता लगा पाएगी कि आखिर यह शराब अमृतसर व उसके आसपास किस फैक्ट्री व ठेके से ली गई है। बिहार में कहां पहुंचाई जानी थी। अभी तक इस मामले में अंबाला सदर थाना पुलिस ने मौके से कैंटर चालक जींद निवासी आशीष को काबू किया था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने ट्रक को अमृतसर से केवल रोहतक तक पहुंचा था। आगे से किसी दूसरे ड्राइवर ने जाना था। आशीष के जरिए पुलिस दलाल व दूसरे ड्राइवर तक पहुंची थी। पुलिस ने दो ओर आरोपी हिसार निवासी अजय व रोहतक निवासी संजय को काबू किया है।
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बारकोड हटाकर होती थी तस्करी
जांच में यह भी सामने आया है कि अमृतसर से लाखों रुपये में खरीदी गई शराब गुजरात व बिहार में कई गुणा दाम पर बिकती थी। शराब तस्कर बीच रास्ते पकड़े जाने से बचने के लिए शराब की पेटियों व बोतलों से बारकोड ही हटा देते थे ताकि यह पता न चल सके कि शराब कहां की है। एसआईटी गठित होने के बाद पुलिस की टीमें अमृतसर सहित हरियाणा में कई जगह दबिश दे रही है।