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Ambala News: जिले का सरकारी नशा मुक्ति बजट के अभाव में झेल रहा बदहाली
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अंबाला सिटी। जिले के एक मात्र सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में सुविधाओं के नाम सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। केंद्र के लिए मिलने वाला 60 लाख रुपए का बजट अभी तक जारी नहीं हुआ है। इस कारण सिर्फ भवन बदल कर नशा मुक्ति केंद्र को चलाया जा रहा है। बजट न तो केंद्र को मिला है और न ही नागरिक अस्पताल को मिला है। इसी कारण भी सुविधाओं में सुधार के लिए संशय बना हुआ है। अस्पताल की ओर फिलहाल मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दी गई है।
नहीं बने शौचालय, बेड का कमरा भी खाली
नशा मुक्ति केंद्र में अभी तक चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के लिए सही तरीके से शौचालय भी नहीं बने हैं। इसके साथ ही गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड वाला कमरा भी अभी खाली पड़ा हुआ है। जबकि यहां पर पांच से छह बेड की व्यवस्था होनी चाहिए।
सुरक्षा को लेकर भी केंद्र में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। ओएसटी सेंटर में रोजाना 200 से अधिक मरीज नशा छोड़ने की दवा लेने के लिए आते हैं। यहांं पर तीन महिला कर्मचारी काम करती हैं। ऐसे में सुरक्षा के लिए यहां पर कोई सुरक्षा कर्मी तैनात न होने के कारण खतरा बना रहता है।
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पहले अलग से बनना था केंद्र
एम्स की ओर से पहले जिला अंबाला में अलग से केंद्र का भवन बनने वाला था, लेकिन लंबे पत्राचार के बाद भी निदेशालय से कोई जवाब नहीं आया। इसलिए यह काम ठप हो गया। जबकि इसके लिए विभाग ने अलग से खाता भी खुलवाया था। जिसमें बजट की राशि आनी थी। मजबूरन जिला स्वास्थ्य विभाग को केंद्र को अपने पुराने भवन में ही शिफ्ट करना पड़ा।
नशा मुक्ति केंद्र के लिए जो पैसा आना था वह अभी तक नहीं आया है। बजट का भी स्पष्टीकरण नहीं है। इसलिए अस्पताल की ओर से सिर्फ मूलभूत सुविधाएं ही दुरूस्त करवाई जा रही हैं। जब बजट आएगा तो उसके आधार पर आगे के कार्य करवाएं जाएंगे।
-डॉ. पूनम चौधरी, पीएमओ सिटी नागरिक अस्पताल।
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नहीं बने शौचालय, बेड का कमरा भी खाली
नशा मुक्ति केंद्र में अभी तक चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के लिए सही तरीके से शौचालय भी नहीं बने हैं। इसके साथ ही गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड वाला कमरा भी अभी खाली पड़ा हुआ है। जबकि यहां पर पांच से छह बेड की व्यवस्था होनी चाहिए।
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सुरक्षा को लेकर भी केंद्र में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। ओएसटी सेंटर में रोजाना 200 से अधिक मरीज नशा छोड़ने की दवा लेने के लिए आते हैं। यहांं पर तीन महिला कर्मचारी काम करती हैं। ऐसे में सुरक्षा के लिए यहां पर कोई सुरक्षा कर्मी तैनात न होने के कारण खतरा बना रहता है।
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पहले अलग से बनना था केंद्र
एम्स की ओर से पहले जिला अंबाला में अलग से केंद्र का भवन बनने वाला था, लेकिन लंबे पत्राचार के बाद भी निदेशालय से कोई जवाब नहीं आया। इसलिए यह काम ठप हो गया। जबकि इसके लिए विभाग ने अलग से खाता भी खुलवाया था। जिसमें बजट की राशि आनी थी। मजबूरन जिला स्वास्थ्य विभाग को केंद्र को अपने पुराने भवन में ही शिफ्ट करना पड़ा।
नशा मुक्ति केंद्र के लिए जो पैसा आना था वह अभी तक नहीं आया है। बजट का भी स्पष्टीकरण नहीं है। इसलिए अस्पताल की ओर से सिर्फ मूलभूत सुविधाएं ही दुरूस्त करवाई जा रही हैं। जब बजट आएगा तो उसके आधार पर आगे के कार्य करवाएं जाएंगे।
-डॉ. पूनम चौधरी, पीएमओ सिटी नागरिक अस्पताल।