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Ambala News: कोर्ट ने अस्थायी निषेधाज्ञा याचिका पर दोबारा सुनवाई का दिया आदेश
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। पटेल रोड स्थित संपत्ति को लेकर कोर्ट ने फैसला सुनाया है, जिसमें निचली अदालत के वर्ष 2021 के आदेश को रद्द कर दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अमित शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें वादी कमलप्रीत कौर आनंद की अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी खारिज कर दी गई थी।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि निचली अदालत प्रतिवादियों के लिखित बयान पर विचार करने के बाद, दायर निषेधाज्ञा की अर्जी पर एक महीने के भीतर गुण-दोष के आधार पर दोबारा सुनवाई करे और फैसला सुनाए।
यह था पूरा मामला : सिटी नवासी कमलप्रीत कौर आनंद ने घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए एक दीवानी मुकदमा दायर किया था। यह मामला पटेल रोड स्थित एक डबल स्टोरी मकान से जुड़ा है। वादी कमलप्रीत कौर का दावा है कि उनके ससुर रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद, एक मौखिक पारिवारिक समझौता हुआ था।
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इस समझौते के तहत, यह तय हुआ था कि चूंकि वह और उनके बच्चे मकान के कब्जे में हैं, इसलिए यह संपत्ति उन्हीं की रहेगी। उन्हें अन्य कानूनी वारिसों को उनके हिस्से का भुगतान किस्तों में करना था। वादी का कहना है कि उन्होंने सभी कानूनी वारिसों का पूरा हिस्सा चुका दिया है।
कमलप्रीत कौर को बाद में पता चला कि प्रतिवादियों ने मिलकर 7 सितंबर 2016 को एक ट्रांसफर डीड के जरिए घर को प्रतिवादी हरबंस कौर के नाम पर स्थानांतरित कर दिया है। वादी ने आरोप लगाया कि इस ट्रांसफर डीड से पहले कानूनी वारिस प्रमाणपत्र बनवाते समय उनके (कमलप्रीत कौर) और उनके बेटों के साथ-साथ कुछ प्रतिवादियों के नाम छिपाए गए।
वादी के अनुसार, यह कार्य धोखाधड़ी है और ट्रांसफर डीड शून्य और अमान्य है। इसीलिए कमलप्रीत कौर ने मुकदमे के साथ ही घर में कब्जा बनाए रखने और संपत्ति को बेचने से रोकने के लिए एक अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी दायर की थी। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने 13 मई 2021 को यह अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद, कमलप्रीत कौर ने इस आदेश के खिलाफ अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में सिविल मिसलेनियस अपील दायर की।
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अंबाला सिटी। पटेल रोड स्थित संपत्ति को लेकर कोर्ट ने फैसला सुनाया है, जिसमें निचली अदालत के वर्ष 2021 के आदेश को रद्द कर दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अमित शर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें वादी कमलप्रीत कौर आनंद की अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी खारिज कर दी गई थी।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि निचली अदालत प्रतिवादियों के लिखित बयान पर विचार करने के बाद, दायर निषेधाज्ञा की अर्जी पर एक महीने के भीतर गुण-दोष के आधार पर दोबारा सुनवाई करे और फैसला सुनाए।
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यह था पूरा मामला : सिटी नवासी कमलप्रीत कौर आनंद ने घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए एक दीवानी मुकदमा दायर किया था। यह मामला पटेल रोड स्थित एक डबल स्टोरी मकान से जुड़ा है। वादी कमलप्रीत कौर का दावा है कि उनके ससुर रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद, एक मौखिक पारिवारिक समझौता हुआ था।
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इस समझौते के तहत, यह तय हुआ था कि चूंकि वह और उनके बच्चे मकान के कब्जे में हैं, इसलिए यह संपत्ति उन्हीं की रहेगी। उन्हें अन्य कानूनी वारिसों को उनके हिस्से का भुगतान किस्तों में करना था। वादी का कहना है कि उन्होंने सभी कानूनी वारिसों का पूरा हिस्सा चुका दिया है।
कमलप्रीत कौर को बाद में पता चला कि प्रतिवादियों ने मिलकर 7 सितंबर 2016 को एक ट्रांसफर डीड के जरिए घर को प्रतिवादी हरबंस कौर के नाम पर स्थानांतरित कर दिया है। वादी ने आरोप लगाया कि इस ट्रांसफर डीड से पहले कानूनी वारिस प्रमाणपत्र बनवाते समय उनके (कमलप्रीत कौर) और उनके बेटों के साथ-साथ कुछ प्रतिवादियों के नाम छिपाए गए।
वादी के अनुसार, यह कार्य धोखाधड़ी है और ट्रांसफर डीड शून्य और अमान्य है। इसीलिए कमलप्रीत कौर ने मुकदमे के साथ ही घर में कब्जा बनाए रखने और संपत्ति को बेचने से रोकने के लिए एक अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी दायर की थी। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने 13 मई 2021 को यह अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद, कमलप्रीत कौर ने इस आदेश के खिलाफ अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में सिविल मिसलेनियस अपील दायर की।