{"_id":"6aa4640a84599f814305d5a6","slug":"that-which-evokes-a-sense-of-divine-creation-within-the-heart-that-alone-is-the-bhagavat-hari-chaitanya-puri-ambala-news-c-36-1-amb1001-169387-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"मन में जो भाव सृजन कर दे वही भागवत : हरि चैतन्य पुरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मन में जो भाव सृजन कर दे वही भागवत : हरि चैतन्य पुरी
विज्ञापन
अंबाला सिटी के पंचायत भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रवचन करते स्वामी हरि चैतन्य पुरी महाराज। प
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर स्वामी हरि चैतन्य पुरी महाराज ने कहा कि जीवन में भक्ति, प्रेम और संस्कारों का समावेश ही सच्चा धर्म है। जो मन में पवित्र भावों का सृजन कर दे, वही भागवत है। पंचायत भवन में आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने भागवत शब्द की व्याख्या की।
उन्होंने बताया कि भा का अर्थ भाव सृजन, ग का अर्थ गर्व का नाश, व का अर्थ वर्ण-भेद की समाप्ति और त का अर्थ तपस्वी जीवन है। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्राप्ति के लिए वनों में जाने की जरूरत नहीं है, गृहस्थ जीवन को ही तपोवन बनाएं। श्रीराम-भरत के मिलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने प्रेम और समर्पण को ही रिश्तों की असली शक्ति बताया।
महाराज ने कहा कि धर्म ढकोसला नहीं, बल्कि पूर्णतः विज्ञान सम्मत है। धर्म से विज्ञान दूर होने पर ही अंधविश्वास और पाखंड पनपता है। उन्होंने समाज में घटती नैतिकता पर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय एकता, आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया। इससे पूर्व, अंबाला पहुंचने पर हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वामी महाराज का स्वागत किया। पूरे परिसर में श्री गुरु महाराज और कामां के कन्हैया के जयकारे गूंजते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला। श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर स्वामी हरि चैतन्य पुरी महाराज ने कहा कि जीवन में भक्ति, प्रेम और संस्कारों का समावेश ही सच्चा धर्म है। जो मन में पवित्र भावों का सृजन कर दे, वही भागवत है। पंचायत भवन में आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने भागवत शब्द की व्याख्या की।
उन्होंने बताया कि भा का अर्थ भाव सृजन, ग का अर्थ गर्व का नाश, व का अर्थ वर्ण-भेद की समाप्ति और त का अर्थ तपस्वी जीवन है। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्राप्ति के लिए वनों में जाने की जरूरत नहीं है, गृहस्थ जीवन को ही तपोवन बनाएं। श्रीराम-भरत के मिलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने प्रेम और समर्पण को ही रिश्तों की असली शक्ति बताया।
विज्ञापन
महाराज ने कहा कि धर्म ढकोसला नहीं, बल्कि पूर्णतः विज्ञान सम्मत है। धर्म से विज्ञान दूर होने पर ही अंधविश्वास और पाखंड पनपता है। उन्होंने समाज में घटती नैतिकता पर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय एकता, आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया। इससे पूर्व, अंबाला पहुंचने पर हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वामी महाराज का स्वागत किया। पूरे परिसर में श्री गुरु महाराज और कामां के कन्हैया के जयकारे गूंजते रहे।
विज्ञापन

अंबाला सिटी के पंचायत भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रवचन करते स्वामी हरि चैतन्य पुरी महाराज। प