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जिस देह पर इतराते हो, वो साथ न जाएगी : तरुण सागर

Fri, 01 Jul 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सीटी।
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सीटी। Updated Fri, 01 Jul 2016 12:31 AM IST
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नायब सैनी
अंबाला सिटी। अंबाला छावनी के लॉर्ड महावीर जैन पब्लिक स्कूल के प्रांगण में क्रांतिकारी संत मुनि श्री 108 तरुण सागर जी महाराज ने 5 दिवसीय प्रवचन की श्रृखंला के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।
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राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ विशिष्ट अतिथि के रुप में नीता खेड़ा, सदस्य वित्त आयोग, ललित चौधरी  शुभादेश मित्तल इत्यादि मौजूद रहे। राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी व विशिष्ट अतिथियों का कार्यकारिणी समिति के सदस्यों ने स्वागत किया और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
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नायब सिंह सैनी ने मुनि जी के श्री चरणों में श्री फल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने 2 लाख 51 हजार की राशि दिगंबर जैन सभा को प्रदान की और आश्वासन दिया कि आगे भी वह हर संभव सहायता के लिए तैयार हैं।
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इस अवसर पर कार्यकारिणी समिति के सदस्यों द्वारा भक्तों को स्मृति चिह्न भेंट कर समानित किया गया। साथ ही तरुण क्रांति मंच की सदस्यता लेने वाले सदस्यों के प्रतिनिधियों ने गुरु जी के चरणों मे श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने मुनि श्री के चरणों में नमन कर मंगलाचरण प्रस्तुत किया। जबलपुर से पधारी संगीता जैन जी ने गुरु भक्ति व ईश्वर आराधना से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वीरवार को णमोकार मंत्र के उच्चारण के साथ मुनि जी ने प्रवचनों का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आज मानव धन के पीछे भाग रहा है परंतु बुढ़ापे में न ही धन काम आता और न ही जिस सुंदर काया पर वह अभिमान करता वह भी साथ देती हैं। अगर मनुष्य के काम आता हैं तो वह उसकी प्रभु भक्ति व सुकर्म ही होते हैं। उसे धन पर अंहकार नहीं होना चाहिए। अंत समय में केवल प्रभु भक्ति ही काम आती है चाहे वह अल्प मात्रा में ही की जाए परंतु करने का भाव शुद्ध होना चाहिए।


प्रार्थना बिना डाकिए के पत्र के समान है जो सीधे अपने आराध्य तक पहुंचती है। मनुष्य को अहंकार का त्याग कर संस्कार व उच्च चरित्र से अपने जीवन को सार्थक करना चाहिए। कभी भी किसी के प्रति कोई गलत धारणा नही बनानी चाहिए क्योंकि गलत धारणा स्वयं का अहित करती हैं।
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