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शुगर मिल घोटोले में काबू सुब्रत खन्ना का 7 व अरूण का 5 दिन का रिमांड मंजूर
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अंबाला। शहजादपुर शुगर मिल में 98 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में मिल निदेशक राहुल आनंद के बाद उसके दो साथी सुब्रत खन्ना व अरुण को काबू कर लिया गया है। आर्थिक अपराध शाखा अंबाला के पुलिस दल ने दोनों को शनिवार कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया। कोर्ट में अमृतसर निवासी सुब्रत खन्ना का सात व संगरूर के फरीदनगर निवासी अरुण का 5 दिन का रिमांड मंजूर हुआ। पुलिस पूछताछ में पता लगाएगी कि आखिर कौन-कौन इस घोटाले में उनके साथ हैं और उनसो रिकवरी भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि सुब्रत खन्ना वर्ब बायोमास कंपनी तो अरुण अजोट्रिक कंपनी के डायरेक्टर है। 13 नवंबर 2015 को मैनेजिंग डायरेक्टर ने आपसी मिलीभगत कर षडयंत्र रचकर रुपये का दुरुपयोग व जाली दस्तावेजों को असल रूप में प्रयोग कर एक बड़ी रकम हड़पने की धोखाधड़ी की थी।
दि अंबाला सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक के जनरल मैनेजर (जीएम) की शिकायत पर 21 दिसंबर को एमडी राहुल आनंद पर शहजादपुर थाना पुलिस ने केस दर्ज हुआ था। मामले की गंभीरता से जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) एएसपी पूजा डाबला, सीआईए वन व आर्थिक अपराध शाखा को दी गई थी। एमडी राहुल आनंद पर आरोप था कि करोड़ों रुपये का लोन लेकर जहां फर्जी खरीद फरोख्त की गई है। इस राशि का इस्तेमाल व्यवसायिक तौर पर न करके निजी कार्यों के लिए किया गया है।
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कृषि विभाग की ऑडिट में हुआ था खुलासा
मिल को यह लोन हरको बैक/डीसीसीबी द्वारा दिए गए थे। इसी को लेकर कृषि विभाग द्वारा भी आडिट किया गया था। जैसे ही ऑडिट शुरू हुई तो इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। एक के बाद एक मामले खुलते गए। मामले की जांच में पता चला था कि राहुल आनंद द्वारा करीब 20 फर्जी कपनियां तैयार की गई है और सभी को अपने रिश्तेदारों के नाम से तैयार कर रखा है। बैंक ने 2014-15 में 34.10 करोड़ रुपए, 2015-16 में 11.11 करोड़ और 2018- 19 में 60 करोड़ रुपए का लोन दिया। बाद में लोन वापस ही नहीं किया गया।
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उल्लेखनीय है कि सुब्रत खन्ना वर्ब बायोमास कंपनी तो अरुण अजोट्रिक कंपनी के डायरेक्टर है। 13 नवंबर 2015 को मैनेजिंग डायरेक्टर ने आपसी मिलीभगत कर षडयंत्र रचकर रुपये का दुरुपयोग व जाली दस्तावेजों को असल रूप में प्रयोग कर एक बड़ी रकम हड़पने की धोखाधड़ी की थी।
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दि अंबाला सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक के जनरल मैनेजर (जीएम) की शिकायत पर 21 दिसंबर को एमडी राहुल आनंद पर शहजादपुर थाना पुलिस ने केस दर्ज हुआ था। मामले की गंभीरता से जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) एएसपी पूजा डाबला, सीआईए वन व आर्थिक अपराध शाखा को दी गई थी। एमडी राहुल आनंद पर आरोप था कि करोड़ों रुपये का लोन लेकर जहां फर्जी खरीद फरोख्त की गई है। इस राशि का इस्तेमाल व्यवसायिक तौर पर न करके निजी कार्यों के लिए किया गया है।
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कृषि विभाग की ऑडिट में हुआ था खुलासा
मिल को यह लोन हरको बैक/डीसीसीबी द्वारा दिए गए थे। इसी को लेकर कृषि विभाग द्वारा भी आडिट किया गया था। जैसे ही ऑडिट शुरू हुई तो इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। एक के बाद एक मामले खुलते गए। मामले की जांच में पता चला था कि राहुल आनंद द्वारा करीब 20 फर्जी कपनियां तैयार की गई है और सभी को अपने रिश्तेदारों के नाम से तैयार कर रखा है। बैंक ने 2014-15 में 34.10 करोड़ रुपए, 2015-16 में 11.11 करोड़ और 2018- 19 में 60 करोड़ रुपए का लोन दिया। बाद में लोन वापस ही नहीं किया गया।