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छात्र-छात्राओं ने पराली एवं भूसे से बनाए सिलिका एवं अन्य रसायन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 02:21 AM IST
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Students made silica and other chemicals from straw and straw
उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा के अंतर्गत श्रीमती अरुणा आसफ अली स्नातकोत्तर महाविद्यालय कालका में अंतर जिला विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन 23 और 24 नवंबर 2021 को हुआ। इसमें हरियाणा के विभिन्न जिलों के महाविद्यालयों से आए विज्ञान के विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों भाग लिया। सनातन धर्म महाविद्यालय अंबाला छावनी के रसायन शास्त्र विभाग के विद्यार्थियों की टीम ने इस अंतर जिला विज्ञान प्रदर्शनी के अंतर्गत केमिस्ट्री संकाय की प्रदर्शनी में प्रथम स्थान हासिल किया। महाविद्यालय की बीएससी द्वितीय वर्ष की नॉन मेडिकल छात्रा आकृति ठुकराल एवं प्रिया ठाकुर ने ‘एक्सट्रैक्शन ऑफ सिलिका फ्राम राइस हस्क’ पर एक वर्किंग मॉडल तैयार किया। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने चावल की फसल से उत्पन्न पराली एवं चावल के भूसे से सिलिका एवं अन्य उपयोगी रसायनों का निर्माण करके दिखाया है।
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महाविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के तृतीय वर्ष की छात्रा शकंदा भारद्वाज एवं प्रथम वर्ष के छात्र पार्थ चोपड़ा को विज्ञान प्रदर्शनी में ‘ट्रीप डॉट इट’ नामक विषय में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। इन दोनों मॉडल का चयन आगामी दिनों में होने वाली राज्य सत्र विज्ञान प्रदर्शनी के लिए किया गया है। महाविद्यालय की केमिस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष डा जोगिंद्र रोहिल्ला की प्रेरणा, मार्ग दर्शन एवं तकनीकी सलाह से इन विद्यार्थियों ने यह मुकाम हासिल किया है। इस सफलता का श्रेय केमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डा सुशील गोस्वामी, डा जयपाल सहारण, डा गुलशन कुमार एवं लैब अटेंडेंट रविंद्र कुमार को जाता है। रसायन संकाय के अन्य विद्यार्थी माधव दुआ एवं प्रांजल गुलाटी का भी मॉडल को तैयार करवाने में अहम योगदान रहा है। महाविद्यालय के प्राचार्य डा राजेन्द्र सिंह ने इस अवसर पर दोनों विभागों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने बताया की आज पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए सभी तरह के जैविक अपशिष्टों का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए, जिससे की पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। सनातन धर्म के केमिस्ट्री संकाय के इन विद्यार्थियों का यह प्रयास निसंदेह सराहनीय है और इस मॉडल में अभी और मूलभूत परिवर्तन करके पर्यावरण एवं सामाजिक आर्थिक विकास की दृष्टि से उपयोगी बनाया जा सकता है।
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