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हड़ताल : दूसरे दिन भी गरजे बैंक कर्मचारी और अधिकारी
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अंबाला सिटी के पॉलिटेक्निक चौक के नजदीक बैंक शाखा के सामने सरकार विरोधी नारेबाजी करते बैंक कर्म?
- फोटो : Ambala
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर देशभर के लगभग दस लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। शुक्रवार को पॉलिटेक्निक चौक अंबाला शहर के पास लगभग डेढ़ सौ कर्मचारी और अधिकारियों ने एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह हड़ताल सरकार द्वारा प्रस्तावित सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण करने के लिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन के खिलाफ रही। इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा प्रस्तावित बैंकों के निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग की।
धरने प्रदर्शन पर हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव राजेश बंसल ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार देश के सार्वजनिक क्षेत्रों को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर रही है। इससे इस देश की आम जनता को बड़ा खतरा है। यह हड़ताल देश की अस्मिता को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। इसकी मुख्य वजह यह थी कि निजी पूंजीपति घराने बैंकों को चलाते थे और आम जनता का पैसा डूब जाता था।
राष्ट्रीयकरण के बाद गांव-गांव में शाखाएं खोली गई और आम जनता तक बैंकिंग सेवा उपलब्ध करवाई गई। आज देशभर की आम जनता की जमा पूंजी सार्वजनिक बैंकों में सुरक्षित है। निजीकरण के बाद आम जनता की जमा पूंजी की कोई गारंटी नहीं रहेगी। उन्होंने आह्वान किया कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को निजीकरण को रोकने के लिए एक लंबे संघर्ष की तैयारी करनी होगी और सरकार के इरादे को विफल करना होगा। इस मौके पर विकास मल्होत्रा, रूपचंद, रमनदीप सिंह विर्क, ईश्वर सिंह, जुझार सिंह, संजय कुमार, राजेश कुमार, अभिषेक शर्मा, अमीचंद, जसबिंदर सिंह मक्कर आदि ने विचार रखे।
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धरने प्रदर्शन पर हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव राजेश बंसल ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार देश के सार्वजनिक क्षेत्रों को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर रही है। इससे इस देश की आम जनता को बड़ा खतरा है। यह हड़ताल देश की अस्मिता को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। इसकी मुख्य वजह यह थी कि निजी पूंजीपति घराने बैंकों को चलाते थे और आम जनता का पैसा डूब जाता था।
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राष्ट्रीयकरण के बाद गांव-गांव में शाखाएं खोली गई और आम जनता तक बैंकिंग सेवा उपलब्ध करवाई गई। आज देशभर की आम जनता की जमा पूंजी सार्वजनिक बैंकों में सुरक्षित है। निजीकरण के बाद आम जनता की जमा पूंजी की कोई गारंटी नहीं रहेगी। उन्होंने आह्वान किया कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को निजीकरण को रोकने के लिए एक लंबे संघर्ष की तैयारी करनी होगी और सरकार के इरादे को विफल करना होगा। इस मौके पर विकास मल्होत्रा, रूपचंद, रमनदीप सिंह विर्क, ईश्वर सिंह, जुझार सिंह, संजय कुमार, राजेश कुमार, अभिषेक शर्मा, अमीचंद, जसबिंदर सिंह मक्कर आदि ने विचार रखे।
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