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Ambala News: बेसहारा गोवंश और कुत्ते बने राहगीरों के लिए मुसीबत
Fri, 07 Jun 2024 03:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 07 Jun 2024 03:48 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। बेसहारा गोवंश को सहारा देने के लिए नगर परिषद ने बेशक निविदा जारी कर दी है, बावजूद इसके गोवंश को पकड़ने का कार्य शुरु नहीं हो पाया है। इसका सबसे बड़ा कारण गोशाला में जगह न होना बताया गया है। ऐसे में एक बार फिर अंबाला छावनी के निवासियाें की मुसीबत बढ़ गई है। रही-सही कसर कुत्तों की नसंबदी को लेकर चौथी बार जारी की निविदा भी सिरे नहीं चढ़ पाई है।
इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। छावनी की सड़कों पर लगातार बेसहारा गोवंश की संख्या बढ़ती जा रही है। सड़क पर बेसहारा गोवंश घूमने के कारण हादसे होने का अंदेशा बना रहता है। ऐसी कई घटनाएं पूर्व में भी हो चुकी हैं। वहीं सड़कों पर घूम रहे गोवंश पेड़-पौधों को भी क्षति पहुंचा रहे हैं।
दूसरी बड़ी परेशानी कुत्तों को लेकर है, जिनकी संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। एक-एक गली में ही 15 से 20 कुत्ते देखे जा सकते हैं। इनकी मौजूदगी में दिन के उजाले में ही गली-मोहल्ले से निकलना मुश्किल हो जाता है, वहीं रात के समय तो यह कुत्ते काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं।
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स्थानीय गोशालाओं में बेसहारा गोवंश के लिए जगह नही है। अगर जगह है भी तो गोशाला संचालक बेसहारा गोवंश को रखने से इंकार कर देते हैं। उनका तर्क होता है कि गोशाला में पल रहे पहले पशुओं के चारे व अन्य सुविधाओं का खर्च कई गुना है, ऐसे में अगर अतिरिक्त पशु आ जाएंगे तो गोशाला पर आर्थिक भार पड़ जाएगा।
जब तक सरकार व प्रशासन आर्थिक मदद नहीं देगा, तब तक बेसहारा गोवंश को सहारा देना नामुमकिन है। इस समस्या के समाधान को लेकर हरियाणा के पूर्व गृहमंत्री ने भी नप को निर्देश दिए थे कि वो खुद की गोशाला बनाएं,जहां बेसहारा गोवंश को रखा जा सके। इस संबंध में बाड़ा गांव के पास जमीन भी देखी गई, लेकिन यह योजना भी आजतक सिरे नहीं चढ़ पाई।
कुत्तों की नसबंदी को लेकर भी एक ठेकेदार रुचि दिखा रहा, जबकि नियमानुसार तीन ठेकेदारों का निविदा में शामिल होना जरूरी है। ऐसे में नियमों का हवाला देकर कुत्तों के नसबंदी की निविदा अधूरी पड़ी हुई। अब पांचवीं बार कुत्तों की नसंबदी को लेकर नगर परिषद ने कार्रवाई आरंभ की है ताकि गली-मोहल्लों में लगातार बढ़ रही कुत्तों की संख्या पर विराम लगाया जा सके।
बेसहारा गोवंश के लिए गोशाला और कुत्तों की नसबंदी बेहद जरूरी है। लगातार शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में इन दोनों समस्याओं से निपटने के पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही दोनों निविदाओं से जुड़ा कार्य पूरा हो जाएगा। - जरनैल सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर।
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अंबाला। बेसहारा गोवंश को सहारा देने के लिए नगर परिषद ने बेशक निविदा जारी कर दी है, बावजूद इसके गोवंश को पकड़ने का कार्य शुरु नहीं हो पाया है। इसका सबसे बड़ा कारण गोशाला में जगह न होना बताया गया है। ऐसे में एक बार फिर अंबाला छावनी के निवासियाें की मुसीबत बढ़ गई है। रही-सही कसर कुत्तों की नसंबदी को लेकर चौथी बार जारी की निविदा भी सिरे नहीं चढ़ पाई है।
इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। छावनी की सड़कों पर लगातार बेसहारा गोवंश की संख्या बढ़ती जा रही है। सड़क पर बेसहारा गोवंश घूमने के कारण हादसे होने का अंदेशा बना रहता है। ऐसी कई घटनाएं पूर्व में भी हो चुकी हैं। वहीं सड़कों पर घूम रहे गोवंश पेड़-पौधों को भी क्षति पहुंचा रहे हैं।
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दूसरी बड़ी परेशानी कुत्तों को लेकर है, जिनकी संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हो गई है। एक-एक गली में ही 15 से 20 कुत्ते देखे जा सकते हैं। इनकी मौजूदगी में दिन के उजाले में ही गली-मोहल्ले से निकलना मुश्किल हो जाता है, वहीं रात के समय तो यह कुत्ते काटने के लिए दौड़ पड़ते हैं।
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स्थानीय गोशालाओं में बेसहारा गोवंश के लिए जगह नही है। अगर जगह है भी तो गोशाला संचालक बेसहारा गोवंश को रखने से इंकार कर देते हैं। उनका तर्क होता है कि गोशाला में पल रहे पहले पशुओं के चारे व अन्य सुविधाओं का खर्च कई गुना है, ऐसे में अगर अतिरिक्त पशु आ जाएंगे तो गोशाला पर आर्थिक भार पड़ जाएगा।
जब तक सरकार व प्रशासन आर्थिक मदद नहीं देगा, तब तक बेसहारा गोवंश को सहारा देना नामुमकिन है। इस समस्या के समाधान को लेकर हरियाणा के पूर्व गृहमंत्री ने भी नप को निर्देश दिए थे कि वो खुद की गोशाला बनाएं,जहां बेसहारा गोवंश को रखा जा सके। इस संबंध में बाड़ा गांव के पास जमीन भी देखी गई, लेकिन यह योजना भी आजतक सिरे नहीं चढ़ पाई।
कुत्तों की नसबंदी को लेकर भी एक ठेकेदार रुचि दिखा रहा, जबकि नियमानुसार तीन ठेकेदारों का निविदा में शामिल होना जरूरी है। ऐसे में नियमों का हवाला देकर कुत्तों के नसबंदी की निविदा अधूरी पड़ी हुई। अब पांचवीं बार कुत्तों की नसंबदी को लेकर नगर परिषद ने कार्रवाई आरंभ की है ताकि गली-मोहल्लों में लगातार बढ़ रही कुत्तों की संख्या पर विराम लगाया जा सके।
बेसहारा गोवंश के लिए गोशाला और कुत्तों की नसबंदी बेहद जरूरी है। लगातार शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में इन दोनों समस्याओं से निपटने के पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही दोनों निविदाओं से जुड़ा कार्य पूरा हो जाएगा। - जरनैल सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर।