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शिव महापुराण सप्ताह में सुनाई ज्योतिर्लिंग की कथा
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अंबाला सिटी। श्री कबीर जन कल्याण सेवाश्रम नगर खेड़ा मोती नगर में द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव महापुराण सप्ताह अमर कथा के पांचवें दिन की शुरूआत पंडित रविंद्र नाथ तिवारी ने मंत्रोच्चारण से की। उसके उपरांत सभी भक्तों ने कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य महाराज को पुष्पमालाएं पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद चैतन्य महाराज ने द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान शिव भक्तों के कल्याणार्थ बारह जगहों पर ज्योतिर्लिंग रूप में प्रगट हुए। तीसरा ज्योतिर्लिंग छिप्रा नदी के तट अवन्तीकापुरी उज्जैन में महाकाल के रूप में विराजमान है। उज्जैन में वेदप्रिय नाम के शिवाराधक पंडित रहते थे।
वेदप्रिय के चार पुत्र थे। वे सभी भगवान शिव के अनन्य भक्त हुए। वे यज्ञ करते हुए शिवलिंग की पूजा करते थे। वहीं पास के जंगल में दूषण नाम का असुर रहता था। वह क्रोधित होकर उज्जैन में आया और नगर वासियों को परेशान करने लगा। जहां चारों ब्राह्मण शिवपूजन कर रहे थे, वहां पहुंचकर उसने शिव लिंग के ऊपर वज्र से प्रहार कर दिया। उसी समय भगवान शिव महाकाल बनकर प्रगट हुए और दूषण दैत्य का वध कर दिया। चारों शिवभक्त शिव जी की स्तुति करने लगे और ऋषि, मुनी, देवता पुष्प वर्षा कर भगवान से प्रार्थना कर बोले कि हे प्रभु भक्तों के कल्याणार्थ आप यहां विराजमान हो जाएं। भगवान प्रसन्न होकर वहीं महाकाल ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए।
कैथल से आए कलाकारों ने शिव-पार्वती जी की सुंदर झांकियां निकाली। झांकियां संजय कुमार के निवास स्थान से प्रारंभ की गई। शिव भक्त ढोल नगाड़ों के साथ आतिशबाजी व नाचते गाते हर-हर महादेव का जयघोष लगाते हुए कथा स्थल पर पहुंचे। इस दौरान शिव बने विकाश कुुमार चीका ने तांडव नृत्य प्रस्तुत किया जोकि मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
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वेदप्रिय के चार पुत्र थे। वे सभी भगवान शिव के अनन्य भक्त हुए। वे यज्ञ करते हुए शिवलिंग की पूजा करते थे। वहीं पास के जंगल में दूषण नाम का असुर रहता था। वह क्रोधित होकर उज्जैन में आया और नगर वासियों को परेशान करने लगा। जहां चारों ब्राह्मण शिवपूजन कर रहे थे, वहां पहुंचकर उसने शिव लिंग के ऊपर वज्र से प्रहार कर दिया। उसी समय भगवान शिव महाकाल बनकर प्रगट हुए और दूषण दैत्य का वध कर दिया। चारों शिवभक्त शिव जी की स्तुति करने लगे और ऋषि, मुनी, देवता पुष्प वर्षा कर भगवान से प्रार्थना कर बोले कि हे प्रभु भक्तों के कल्याणार्थ आप यहां विराजमान हो जाएं। भगवान प्रसन्न होकर वहीं महाकाल ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए।
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कैथल से आए कलाकारों ने शिव-पार्वती जी की सुंदर झांकियां निकाली। झांकियां संजय कुमार के निवास स्थान से प्रारंभ की गई। शिव भक्त ढोल नगाड़ों के साथ आतिशबाजी व नाचते गाते हर-हर महादेव का जयघोष लगाते हुए कथा स्थल पर पहुंचे। इस दौरान शिव बने विकाश कुुमार चीका ने तांडव नृत्य प्रस्तुत किया जोकि मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
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