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Ambala News: अमरनाथ यात्रा से पहले समाजसेवी ने चढ़ाई चांदी की छड़ी
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अंबाला। 19 साल से अनूठी परंपरा को बरकरार रखते हुए इस साल भी अंबाला के समाजसेवी राजिंद्र पाल से अमरनाथ यात्रा के शुरू होने से पहले बर्फानी बाबा को चांदी की छड़ी चढ़ाई। अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था एक जुलाई से रवाना होगा, लेकिन राजिंद्वि विशेष अनुमति मिलने पर बालटाल के रास्ते 26 जून की देर शाम अमरनाथ गुफा में पहुंचे।
राजिंद्र पाल सिंह मिन्नी के अलावा अंबाला से कृष्ण कुमार, विरेंद्र शर्मा, राजीव शामिल रहे। वे 25 जून को सुबह नौ बजे अंबाला कैंट से यात्रा के लिए अपनी गाड़ी में रवाना हुए थे। करीब 800 ग्राम चांदी से छड़ी 90 हजार रुपये की लागत से तैयार की गई थी। राजिंद्र पाल सिंह का दावा है कि बर्फानी बाबा के चरणों में सबसे पहली छड़ी अंबाला से चढ़ाई गई है। इतना ही नहीं अंबाला से वहां भंडारे की तैयारी कर रहे भक्तों व आसपास के लोगों में करीब दो हजार गुलाब जामुन भी वितरित किए गए व भंडारे में भी सामान दिया गया। राजिंद्र पाल सिंह ने बताया रास्ते में श्री नगर के पास लैंड स्लाइड व मौसम काफी खराब था। बावजूद यात्रा जारी रखी।
छड़ मुबारक परंपरा के तहत चढ़ाई जाती है छड़ी
राजिद्र पाल ने बताया कि अमरनाथ की यात्रा के अंतिम दिन वहां के लोगों द्वारा एक छड़ मुबारक परंपरा निभाई जाती है जिसमें गुफा के अंदर श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार लकड़ी, तांबे व अन्य किस्म की छड़ी चढ़ाते हैं। वे परिवार की सुख शांति के मन्नतें मांगते हैं। इस परंपरा को देखते हुए उनमें भी छड़ चढ़ाने की इच्छा जागी थी। 2001 में पहली बार चढ़ी चढ़ाने का निर्णय लिया और आज तक वह श्रद्धानुसार चढ़ी चढ़ाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि ये परंपरा यात्रा के अंतिम दिनों में निभाई जाती है, परंतु वह यात्रा से पहले ही चांदी की छड़ी चढ़ाकर वापस लौट आते हैं और यह गुफा खुलने के बाद पहली ही छड़ी मानी जाती है। 20 दिन पहले ही पवित्र छड़ी की पूजा अर्चना शुरू कर दी जाती है।
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राजिंद्र पाल सिंह मिन्नी के अलावा अंबाला से कृष्ण कुमार, विरेंद्र शर्मा, राजीव शामिल रहे। वे 25 जून को सुबह नौ बजे अंबाला कैंट से यात्रा के लिए अपनी गाड़ी में रवाना हुए थे। करीब 800 ग्राम चांदी से छड़ी 90 हजार रुपये की लागत से तैयार की गई थी। राजिंद्र पाल सिंह का दावा है कि बर्फानी बाबा के चरणों में सबसे पहली छड़ी अंबाला से चढ़ाई गई है। इतना ही नहीं अंबाला से वहां भंडारे की तैयारी कर रहे भक्तों व आसपास के लोगों में करीब दो हजार गुलाब जामुन भी वितरित किए गए व भंडारे में भी सामान दिया गया। राजिंद्र पाल सिंह ने बताया रास्ते में श्री नगर के पास लैंड स्लाइड व मौसम काफी खराब था। बावजूद यात्रा जारी रखी।
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छड़ मुबारक परंपरा के तहत चढ़ाई जाती है छड़ी
राजिद्र पाल ने बताया कि अमरनाथ की यात्रा के अंतिम दिन वहां के लोगों द्वारा एक छड़ मुबारक परंपरा निभाई जाती है जिसमें गुफा के अंदर श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार लकड़ी, तांबे व अन्य किस्म की छड़ी चढ़ाते हैं। वे परिवार की सुख शांति के मन्नतें मांगते हैं। इस परंपरा को देखते हुए उनमें भी छड़ चढ़ाने की इच्छा जागी थी। 2001 में पहली बार चढ़ी चढ़ाने का निर्णय लिया और आज तक वह श्रद्धानुसार चढ़ी चढ़ाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि ये परंपरा यात्रा के अंतिम दिनों में निभाई जाती है, परंतु वह यात्रा से पहले ही चांदी की छड़ी चढ़ाकर वापस लौट आते हैं और यह गुफा खुलने के बाद पहली ही छड़ी मानी जाती है। 20 दिन पहले ही पवित्र छड़ी की पूजा अर्चना शुरू कर दी जाती है।
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