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जमीन एक, दावे दो : निगम ने कहा- प्राइवेट जमीन, अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण बोला-तालाब
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नगर निगम ने कहा- जमीन प्राइवेट, अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण का दावा- तालाब की जमीन
- सेक्टर-7 की करोड़ाें की 32 एकड़ जमीन के मामले में एनजीटी में हुई सुनवाई
वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। हरियाणा सरकार के दो विभाग, एक ही जमीन के दो अलग-अलग दावे कर रहे हैं। यह दावे किसी सरकारी दस्तावेज में नहीं बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पटल पर किए गए हैं। इन दावों ने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और गंभीरता को उजागर कर दिया है।
एनजीटी में सेक्टर-7 की करोड़ों की तालाब की जमीन का मामला विचाराधीन है। इस जमीन के एक हिस्से पर आलीशान बहुमंजिला परियोजना बनना था। सुनवाई के दौरान जमीन को एक तरफ तो हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण ने तालाब बताकर हलफनामा दे दिया है। वहीं अब नगर निगम ने इस जमीन को निजी संपत्ति बता दिया है। ऐसे में सरकार की दो एजेंसियों की अब आगामी सुनवाई में मुसीबत बढ़ने वाली दिखाई दे रही है।
सेक्टर-7 निवासी अखिलेश चोपड़ा ने एनजीटी में अप्रैल 2025 में याचिका दायर की थी। इस दौरान उन्होंने याचिका दायर करते हुए बताया था कि सेक्टर-7 के पीछे 32.69 एकड़ जगह एचएसवीपी के निस्तारण के लिए प्रस्तावित है। इस जमीन के कुछ हिस्से को निजी लोगों को सौंपकर तालाब को मिट्टी से भरने का काम किया जा रहा है। जबकि हर साल बारिश में सेक्टर के इलाके जलभराव की समस्या से डूबते हैं। तब से एनजीटी में जमीन तालाब की है या नहीं इस पर सभी विभागों से जवाब लिया जा रहा था।
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प्राधिकरण के प्रधान सलाहकार ने 25 अप्रैल 2025 को नगर निगम अंबाला के कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखकर इस मामले में मौके का निरीक्षण करने और 15 दिनों के भीतर वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। हालांकि, समय पर अपेक्षित प्रतिक्रिया न मिलने पर प्राधिकरण ने 24 सितंबर 2025 को अंबाला के नगर निगम आयुक्त को कड़े निर्देश जारी किए थे।
महावीर पार्क तालाब के रूप में दर्ज है भूमि : प्राधिकरण
एनजीटी के निर्देश पर दाखिल तालाब प्राधिकरण के जवाब से यह साफ हो गया है कि जमीन तालाब की थी। एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज के मुताबिक, हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के तालाब डाटा प्रबंधन प्रणाली (पीडीएमएस) में यह जल निकाय महावीर पार्क तालाब के नाम से दर्ज है, जिसे विशिष्ट पहचान संख्या भी दी गई है। प्राधिकरण ने अपने जवाब में यह स्वीकार किया है कि निधि की कमी के कारण इस तालाब को अभी तक विकास कार्यों के लिए हाथ में नहीं लिया जा सका था।
6.86 एकड़ भूमि निजी स्वामित्व वाली : नगर निगम
हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग (डीयूएलबी) के वरिष्ठ नगर योजनाकार अर्विंदर ढुल ने एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली के समक्ष अपना जवाब दाखिल कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिस जमीन पर कॉलोनाइजर द्वारा कॉलोनी विकसित करने की अनुमति मांगी गई है, वह राजस्व अभिलेख में तालाब के रूप में दर्ज नहीं है और यह पूरी तरह से निजी स्वामित्व वाली भूमि है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अनुसार, मेसर्स बिग बर्ड्स डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने पट्टी मेहर (सेक्टर-7) के अंतर्गत 6.8625 एकड़ भूमि पर टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत एक आवासीय कॉलोनी के लिए आवेदन किया था। विभाग ने सभी संबंधित विभागों नगर निगम, जिला नगर योजनाकार और सिंचाई विभाग से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद, गत 27 जुलाई 2026 को इस आशय का लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी कर दिया था।
एनओसी का भी दिया सुझाव
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि अंतिम विकास योजनाओं के तहत यह भूमि आवासीय क्षेत्र में आती है। हालांकि, तालाब डाटा प्रबंधन प्रणाली में इसे महावीर पार्क तालाब के रूप में दिखाए जाने के कारण, विभाग ने कॉलोनाइजर को हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त करने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर यह भूमि आवासीय क्षेत्र में आती है तो निस्तारण भी आवासीय क्षेत्र की प्राथमिक आवश्यकता है। यह पूर्व में निस्तारण के लिए जमीन रखी गई थी न कि कॉलोनी बसाने के लिए।
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- सेक्टर-7 की करोड़ाें की 32 एकड़ जमीन के मामले में एनजीटी में हुई सुनवाई
वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। हरियाणा सरकार के दो विभाग, एक ही जमीन के दो अलग-अलग दावे कर रहे हैं। यह दावे किसी सरकारी दस्तावेज में नहीं बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पटल पर किए गए हैं। इन दावों ने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और गंभीरता को उजागर कर दिया है।
एनजीटी में सेक्टर-7 की करोड़ों की तालाब की जमीन का मामला विचाराधीन है। इस जमीन के एक हिस्से पर आलीशान बहुमंजिला परियोजना बनना था। सुनवाई के दौरान जमीन को एक तरफ तो हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण ने तालाब बताकर हलफनामा दे दिया है। वहीं अब नगर निगम ने इस जमीन को निजी संपत्ति बता दिया है। ऐसे में सरकार की दो एजेंसियों की अब आगामी सुनवाई में मुसीबत बढ़ने वाली दिखाई दे रही है।
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सेक्टर-7 निवासी अखिलेश चोपड़ा ने एनजीटी में अप्रैल 2025 में याचिका दायर की थी। इस दौरान उन्होंने याचिका दायर करते हुए बताया था कि सेक्टर-7 के पीछे 32.69 एकड़ जगह एचएसवीपी के निस्तारण के लिए प्रस्तावित है। इस जमीन के कुछ हिस्से को निजी लोगों को सौंपकर तालाब को मिट्टी से भरने का काम किया जा रहा है। जबकि हर साल बारिश में सेक्टर के इलाके जलभराव की समस्या से डूबते हैं। तब से एनजीटी में जमीन तालाब की है या नहीं इस पर सभी विभागों से जवाब लिया जा रहा था।
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प्राधिकरण के प्रधान सलाहकार ने 25 अप्रैल 2025 को नगर निगम अंबाला के कार्यकारी अभियंता को पत्र लिखकर इस मामले में मौके का निरीक्षण करने और 15 दिनों के भीतर वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। हालांकि, समय पर अपेक्षित प्रतिक्रिया न मिलने पर प्राधिकरण ने 24 सितंबर 2025 को अंबाला के नगर निगम आयुक्त को कड़े निर्देश जारी किए थे।
महावीर पार्क तालाब के रूप में दर्ज है भूमि : प्राधिकरण
एनजीटी के निर्देश पर दाखिल तालाब प्राधिकरण के जवाब से यह साफ हो गया है कि जमीन तालाब की थी। एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज के मुताबिक, हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के तालाब डाटा प्रबंधन प्रणाली (पीडीएमएस) में यह जल निकाय महावीर पार्क तालाब के नाम से दर्ज है, जिसे विशिष्ट पहचान संख्या भी दी गई है। प्राधिकरण ने अपने जवाब में यह स्वीकार किया है कि निधि की कमी के कारण इस तालाब को अभी तक विकास कार्यों के लिए हाथ में नहीं लिया जा सका था।
6.86 एकड़ भूमि निजी स्वामित्व वाली : नगर निगम
हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग (डीयूएलबी) के वरिष्ठ नगर योजनाकार अर्विंदर ढुल ने एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली के समक्ष अपना जवाब दाखिल कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिस जमीन पर कॉलोनाइजर द्वारा कॉलोनी विकसित करने की अनुमति मांगी गई है, वह राजस्व अभिलेख में तालाब के रूप में दर्ज नहीं है और यह पूरी तरह से निजी स्वामित्व वाली भूमि है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अनुसार, मेसर्स बिग बर्ड्स डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने पट्टी मेहर (सेक्टर-7) के अंतर्गत 6.8625 एकड़ भूमि पर टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत एक आवासीय कॉलोनी के लिए आवेदन किया था। विभाग ने सभी संबंधित विभागों नगर निगम, जिला नगर योजनाकार और सिंचाई विभाग से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद, गत 27 जुलाई 2026 को इस आशय का लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी कर दिया था।
एनओसी का भी दिया सुझाव
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि अंतिम विकास योजनाओं के तहत यह भूमि आवासीय क्षेत्र में आती है। हालांकि, तालाब डाटा प्रबंधन प्रणाली में इसे महावीर पार्क तालाब के रूप में दिखाए जाने के कारण, विभाग ने कॉलोनाइजर को हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त करने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर यह भूमि आवासीय क्षेत्र में आती है तो निस्तारण भी आवासीय क्षेत्र की प्राथमिक आवश्यकता है। यह पूर्व में निस्तारण के लिए जमीन रखी गई थी न कि कॉलोनी बसाने के लिए।