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जोली पैक्स की सीलिंग के खिलाफ नारेबाजी, जताया रोष
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नारायणगढ़। जोली पैक्स (दि प्राथमिक कृषि सहकारी समिति) के कार्यालय को जिला प्रशासन द्वारा सील करने के विरोध में लोगों ने नारेबाजी की। सोमवार को लोगों ने तहसीलदार नारायणगढ़ को डीसी के नाम ज्ञापन सौंपा। लोगों ने बताया कि पैक्स को सील करने के बाद कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। इसके चलते बैंक से बुढ़ापा पेंशन, जमा निकासी, रिकवरी सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
साथ ही धान की रोपाई व अन्य फसलों की बिजाई का काम चल रहा है, लेकिन किसानों को खाद आदि नहीं मिल रही है। बैंक से जुड़े सभी लोग परेशान हैं। ज्ञापन देने आए रणजीत सिंह, गरीब दास, लखमीर सिंह, जसपाल सिंह, रोबिन,दविंदर सिंह, राजेश, विनोद कुमार, मोहन लाल, ज्ञान चंद, संदीप, कर्ण सिंह, प्रदीप आदि ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित व किसान हित में जोली पैक्स की सील खोली जाए। वहीं, सोमवार को सील के विरोध में पैक्स कर्मचारी यूनियन भी कूद पड़ी है।
दूसरी ओर, पैक्स कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान दविंद्र राणा ने कहा कि यह गलत तरीका है। पैक्स का ऑडिट होता है। पिछला ऑडिट मार्च 2021 में हुआ था। इसमें अनियमितता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। यदि सरकार के पास कोई शिकायत है तो बैंक का रिकॉर्ड लेकर निष्पक्ष जांच की जा सकती है। पैक्स से जुड़े सदस्यों ने बताया कि बैंक की रिकवरी चल रही है। इसकी अंतिम तिथि 30 जून है। किसान अपना लेनदेन करने बैंक जा रहे हैं, लेकिन काम नहीं हो रहा है। 30 जून के बाद ऋण वाले किसान डिफाल्टर हो जाएंगे। उन्हें 12 से 13 प्रतिशत की दर से ब्याज देना पड़ेगा, जबकि अभी कोई ब्याज नहीं है, क्योंकि ब्याज सरकार ही दे रही है।
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सात गांवों के बुजुर्ग, दिव्यांग और विधवाएं परेशान
जोली पैक्स से जुड़े दर्जनों लोग नारायणगढ़ लघु सचिवालय पहुंचे। वे उप मंडल अधिकारी (नागरिक) से मिलना चाहते थे, लेकिन एसडीएम के अवकाश पर होने के चलते पैक्स के सदस्य तहसीलदार से मिले। लोगों का कहना था कि पैक्स से 14 गांव जुड़े हुए हैं और हजारों लोगों का लेनदेन होता है। वहीं, सात गांवों के बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों को प्रति माह पेंशन भी इसी बैंक से मिलती है जो सीलिंग के बाद प्रभावित हुई है। लोगों को घरेलू जरूरतों के लिए पैसे की जरूरत है और लोग बैंक में जाते भी हैं, लेकिन परेशान होकर लौट आते हैं।
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साथ ही धान की रोपाई व अन्य फसलों की बिजाई का काम चल रहा है, लेकिन किसानों को खाद आदि नहीं मिल रही है। बैंक से जुड़े सभी लोग परेशान हैं। ज्ञापन देने आए रणजीत सिंह, गरीब दास, लखमीर सिंह, जसपाल सिंह, रोबिन,दविंदर सिंह, राजेश, विनोद कुमार, मोहन लाल, ज्ञान चंद, संदीप, कर्ण सिंह, प्रदीप आदि ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित व किसान हित में जोली पैक्स की सील खोली जाए। वहीं, सोमवार को सील के विरोध में पैक्स कर्मचारी यूनियन भी कूद पड़ी है।
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दूसरी ओर, पैक्स कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान दविंद्र राणा ने कहा कि यह गलत तरीका है। पैक्स का ऑडिट होता है। पिछला ऑडिट मार्च 2021 में हुआ था। इसमें अनियमितता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। यदि सरकार के पास कोई शिकायत है तो बैंक का रिकॉर्ड लेकर निष्पक्ष जांच की जा सकती है। पैक्स से जुड़े सदस्यों ने बताया कि बैंक की रिकवरी चल रही है। इसकी अंतिम तिथि 30 जून है। किसान अपना लेनदेन करने बैंक जा रहे हैं, लेकिन काम नहीं हो रहा है। 30 जून के बाद ऋण वाले किसान डिफाल्टर हो जाएंगे। उन्हें 12 से 13 प्रतिशत की दर से ब्याज देना पड़ेगा, जबकि अभी कोई ब्याज नहीं है, क्योंकि ब्याज सरकार ही दे रही है।
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सात गांवों के बुजुर्ग, दिव्यांग और विधवाएं परेशान
जोली पैक्स से जुड़े दर्जनों लोग नारायणगढ़ लघु सचिवालय पहुंचे। वे उप मंडल अधिकारी (नागरिक) से मिलना चाहते थे, लेकिन एसडीएम के अवकाश पर होने के चलते पैक्स के सदस्य तहसीलदार से मिले। लोगों का कहना था कि पैक्स से 14 गांव जुड़े हुए हैं और हजारों लोगों का लेनदेन होता है। वहीं, सात गांवों के बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों को प्रति माह पेंशन भी इसी बैंक से मिलती है जो सीलिंग के बाद प्रभावित हुई है। लोगों को घरेलू जरूरतों के लिए पैसे की जरूरत है और लोग बैंक में जाते भी हैं, लेकिन परेशान होकर लौट आते हैं।