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फाइलों में ही उलझी जांच, रिकार्ड दिखाने में आनाकानी
ब्यूरो/अंबाला/अमर उजाला
Updated Tue, 14 Feb 2017 12:26 AM IST
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डस्टबिन
- फोटो : अमर उजाला
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म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) ने पांच घोटालों की जांच के लिए भले ही एमसीए कमिश्नर ने पार्षदों और निचले अफसरों की एक ज्वाइंट कमेटी गठित कर दी है, लेकिन यह अभी तक फाइलों में ही उलझ रही है। एमसीए इन घोटालों के बाबत अभी तक जांच कमेटी के समक्ष संबंधित घोटालों का कोई रिकार्ड ही प्रस्तुत नहीं कर पाया है।
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जांच कमेटी के सदस्यों ने अब आरोप लगाया है कि एमसीए अफसर जानबूझकर संबंधित घोटाला का रिकार्ड प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं। इस वजह से डेढ़ माह बाद भी ये जांच न तो आगे बढ़ पाएगी और न ही इन मुद्दों पर ठोस चर्चा हो पाई है। क्योंकि बैठक में जानबूझकर अधूरे रिकार्ड के साथ एमसीए के अफसर व कर्मचारी पहुंच जाते हैं और जांच को आगे टालने का प्रयास करते हैं।
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ये है पांच घोटाले
डस्टबीन घोटाला- पार्षदों का आरोप है कि एमसीए ने 140 डस्टबीन खरीदें, एक डस्टबीन की कीमत 21 हजार के करीब है। लेकिन उन्होंने उसी जगह से किसी और रूप में जब डस्टबीन की कूटेशन मांगी, तो उन्हें अच्छी गेज की चादर और विद व्हील डस्टबीन साढ़े पंद्रह हजार रुपये में मिल रहे हैं। सोनिया ने सवाल खड़ा कि आखिरकार एमसीए ने फिर महंगे डस्टबीन क्यों खरीदे?
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स्टेशनरी घोटाला- मेयर समेत अन्य पार्षदों ने आरोप लगाया है कि पिछले तीन साल के कार्यकाल में एमसीए ने 70 लाख रुपये की स्टेशनरी खरीदी, लेकिन जब इसका हिसाब किताब मांगा गया तो आज तक ये नहीं मालूम बताया गया कि कितनी स्टेशनी खरीदी, कहां से खरीदी और क्या खरीदा?
स्क्रैप घोटाला- एमसीए में पड़ा स्क्रैप ही भारी मात्रा में पड़े-पड़े चोरी हो गया। एक पार्षद ने एक ट्रक स्क्रैप तो खुद पकड़वाया। कैंट में पड़ा स्क्रैप भी गायब है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि सारा स्क्रैप मिलीभगत से गायब हुआ है।
डोर-टू-डोर कांट्रेक्ट घोटाला
पार्षदों ने आरोप लगाया कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने में भी चहेते ठेकेदार पर अफसर मेहरबानी बरत रहे हैं। पार्षद सोनिया रानी ने कहा कि ठेकेदार लगातार कांट्रेक्ट की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। कई तरह की अनियमितता आ रही है, उसके बाद उसका ठेका रद्द होने के बाद अफसरों ने उसका ठेका एक्सटेंड कर दिया और उसे पेमेंट भी कर दी। इसमें भारी आर्थिक अनियमितता है और इससे एमसीए को आर्थिक नुकसान हुआ है।
स्ट्रीट लाइट घोटाला - आईएचएसडीपी के तहत वर्ष 2013 में एमसीए के पास दलित बस्तियों में लगाने के लिए सोडियम स्ट्रीट लाइट के सेट विद पोल आए थे। लेकिन एमसीए ने सोडियम स्ट्रीट लाइट की बजाय वहां साधारण सस्ती स्ट्रीट लाइटें लगवाकर खानापूर्ति कर ली। सोडियम सेट क्यों नहीं लगाए गए? सस्ती स्ट्रीट लाइट क्यों लगाई गई? और बिजली के खंभे कहां हैं और संबंधित एरिया में सभी जगह स्ट्रीट लाइटें लगी या नहीं?
दो बैठकें संपन्न, लेकिन रिकार्ड का अता-पता नहीं
घोटालों की जांच कर दो बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन एमसीए की ओर से अभी तक इस बाबत पूरा रिकार्ड जांच कमेटी के समक्ष पेश नहीं किया जा रहा है। पार्षद सोनिया रानी ने बताया कि वे बार-बार एमसीए अफसरों और कर्मियों को बैठक में जांच कमेटी के समक्ष रिकार्ड पेश करने को कह चुकी हैं, लेकिन उनके कान पर जूं ही नहीं रेंग रही है। उन्होंने बताया कि अब बुधवार को फिर से जांच कमेटी की बैठक है। फिर से अफसरों को पूरा रिकार्ड लेकर पेश होने का कहा गया है। उधर, पार्षद दलजीत सिंह भाटिया ने आरोप लगाया कि नगर निगम के कुछ निचले कर्मचारियों ने मिलीभगत कर रिकार्ड खुदबुर्द कर दिया है, इसीलिए जांच कमेटी के समक्ष पूरा रिकार्ड पेश नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निगम के निचले अफसर और कर्मचारी साफ पाक है तो क्यों नहीं रिकार्ड पेश करते?
साठ दिन में पूरी करनी है जांच
इन घोटालों की जांच को लेकर पार्षदों ने 27 दिसंबर 2016 में हुई सदन की बैठक में विजिलेंस इंक्वायरी की मांग की थी, लेकिन एमसीए कमिश्नर सत्येंद्र दूहन ने पार्षदों से आह्वान किया कि हाउस खुद ऐसी जांच के लिए सक्षम है। हाउस जांच कमेटी गठित करे और टाइम बांड जांच के आदेश दे। इस पर पार्षदों में सोनिया रानी, रूपम गुगलानी, दलजीत सिंह भाटिया, डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल और सुरेंद्र बिंद्रा डब्बू को जांच कमेटी में शामिल किया गया। जांच कमेटी का चेयरमैन मेयर रमेश लाल मल को बनाया गया, जबकि निगम की ओर से ज्वाइंट कमिश्नर और एसई को जांच में सहयोग के लिए शामिल किया गया।
पार्षदों ने कुछ अनियमिताओं और घोटालों की शिकायतें दी हैं। उनकी जांच चल रही है। दो महीने का वक्त दिया गया है। जांच कमेटी में रिकार्ड पेश किया जा रहा है। जो भी घपले के आरोपों का सच होगा, वो जांच के दौरान सामने आ जाएगा। इसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र दूहन, कमिश्नर, एमसीए
एमसीए कर्मचारियों और अफसरों से आग्रह किया गया है कि वे जांच कमेटी के समक्ष घोटालों से संबंधित पूरा रिकार्ड लेकर आएं, तभी ऐसी जांच का फायदा है। कमिश्नर ने निष्पक्ष जांच के लिए ये कमेटी गठित करवाई है। इसलिए निगम के अफसर भी जांच कमेटी को पूरा सहयोग करें।
-रमेश लाल मल, मेयर, एमसीए