{"_id":"67e9a393012a999d2f03a73d","slug":"sarikaar-is-making-kanhas-clothes-ambala-news-c-36-1-sknl1003-139998-2025-03-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: कान्हा के वस्त्र, बना रही सारिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: कान्हा के वस्त्र, बना रही सारिकार
विज्ञापन
अंबाला। अब शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों से भी महिलाएं आगे आ रही हैं और हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर अपनी आजीविका चला रही हैं। समलेहड़ी गांव की रोशनी ग्रुप से समूह सखी सारिका ग्रुप की महिलाओं के साथ मिलकर कान्हा के वस्त्र, लकड़ी के झूले और जूट के बैग बना रही है। इसके साथ ही सारिका एक दुकान भी चला रही है। एक समय ऐसा आया, जब सारिका की तबीयत बिगड़ गई और हार्ट अटैक आ गया। इसके बाद स्टंट डलवाना पड़ा लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपना सफर जारी रखा।
2022 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी सारिका : साहा स्थित समलेहड़ी गांव निवासी सारिका ने बताया कि 2022 में वह हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी। उसने गांव में रोशनी ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में 10 महिलाएं हैं जिसमें सुमन, डिंपल, ममता, मंजीत और अन्य महिलाएं शामिल है।
वह अपने ग्रुप में समूह सखी है और अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ऊन के कान्हा के वस्त्र, कान्हा के लकड़ी के झूले और जूट के बैग बना रही है।
इन वस्त्रों के लिए सामान जैसे स्टॉन, सितारा, फूल, कॉटन और ऊन दिल्ली से लाती है। झूले के लिए लकड़ी का अंबाला से इंतजाम हो जाता है।
उनके पास लकड़ी के झूलाें की कीमत 100 से लेकर 1000 रुपये तक है। इसके अलावा 100 रुपये से लेकर 500 रुपये में वस्त्र की कीमत है।
दुकान पर आते हैं व्यापारी और सोशल मीडिया पर रहती है एक्टिव : सारिका ने बताया कि वह घर के काम के साथ कान्हा के वस्त्र, लकड़ी के झूले और जूट के बैग बनाती है। इसके साथ ही उसने एक दुकान भी की हुई है।क
विज्ञापन
विज्ञापन
2022 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी सारिका : साहा स्थित समलेहड़ी गांव निवासी सारिका ने बताया कि 2022 में वह हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी। उसने गांव में रोशनी ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में 10 महिलाएं हैं जिसमें सुमन, डिंपल, ममता, मंजीत और अन्य महिलाएं शामिल है।
विज्ञापन
वह अपने ग्रुप में समूह सखी है और अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ऊन के कान्हा के वस्त्र, कान्हा के लकड़ी के झूले और जूट के बैग बना रही है।
इन वस्त्रों के लिए सामान जैसे स्टॉन, सितारा, फूल, कॉटन और ऊन दिल्ली से लाती है। झूले के लिए लकड़ी का अंबाला से इंतजाम हो जाता है।
उनके पास लकड़ी के झूलाें की कीमत 100 से लेकर 1000 रुपये तक है। इसके अलावा 100 रुपये से लेकर 500 रुपये में वस्त्र की कीमत है।
दुकान पर आते हैं व्यापारी और सोशल मीडिया पर रहती है एक्टिव : सारिका ने बताया कि वह घर के काम के साथ कान्हा के वस्त्र, लकड़ी के झूले और जूट के बैग बनाती है। इसके साथ ही उसने एक दुकान भी की हुई है।क
विज्ञापन