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Ambala News: एक साल में तीसरी बार सरबजोत ने दागा स्वर्ण पर निशाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Sep 2023 01:08 AM IST
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Sarabjot aims for gold for the third time in a year
अंबाला। महज नौ साल की उम्र में लगे स्कूल कैंप के सटीक निशाने से शुरू हुए शूटिंग के सफर ने धीन गांव निवासी सरबजोत को आज ऊंचाइयों की बुलंदियों पर लाकर खड़ा कर दिया। अपने शूटर मामा के किस्सों को सुना तो हौसला बुलंद हो गया। 2016 में कोच अभिषेक राणा से शूटिंग का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। महज 20 साल की उम्र में सरबजोत अभी तक 24 पदक झटक चुका है।
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सरबजोत के लिए 2023 सफलता भरा रहा है। किसान के बेटे सरबजोत ने इस साल में अब तक अंतरराष्ट्रीय लैवल की चार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और तीन स्वर्ण व एक कांस्य पदक जीता। इन प्रतियोगिताओं में एशियन गेम्स 2023 भी शामिल है। मार्च 2023 को भोपाल में हुए इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन (आईएसएसएफ) वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक झटका। मई 2023 में अजरबाइजान के भाकू में आयोजित आईएसएसएफ के वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीता था।
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हालांकि अगस्त में आयोजित 53वीं आईएसएसएफ के वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण से चूकते हुए कांस्य पदक हासिल किया था। हिम्मत न हारते हुए अब एशियन गेम्स में एक बार फिर स्वर्ण पर निशाना लगाया। अच्छी बात यह है कि सरबजोत एशियाई खेलों में भाग लेने से पहले अंबाला छावनी स्थिति शूटिंग रेंज में आए थे और शूटिंग सीख रहे बच्चों को तकनीकि गुर भी सिखाए थे।
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कोविड के बावजूद भी नहीं हारी थी हिम्मत

सरबजोत के पिता जतिंद्र ने बताया कि वह पेशे से किसान हैं। उनके परिवार में सरबजोत का दूर का मामा शूटिंग करता है। 2012 को सरबजोत के स्कूल में एक कैंप लगा था और उसमें निशाना लगाया था। तभी से उसकी ललक बढ़ गई और धीरे-धीरे वह अपने मामा के संपर्क में आ गया। उनके निशानों के किस्से सुनने के बाद उसने शूटिंग रेंज में दाखिला लिया। कोरोना के समय में वह खुद संक्रमित हो गया था। अस्पताल में दाखिल रहा, लेकिन सरबजोत ने हिम्मत नहीं हारी। दिनरात मेहनत की बदौलत अपनी मंजिल तक पहुंचा। गांव से फीनिक्स क्लब आता था। उस ललक ने ही सरबजोत को इस मुकाम तक पहुंचाया है।

सालों पुरानी सड़क की मांग पूरी

पिता जतिंद्र ने बताया कि सरबजोत ने गांव में उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अब लोग उन्हें बेटे के नाम से जानते हैं। उसकी बदौलत ही घर तक जाने वाला करीब 300 मीटर कच्चे रास्ते को पक्का करने की मांग भी पूरी हो गई। जल्द ही गांव में लाइटिंग भी लगने जा रही है। सरबजोत के पदक जीतकर आने के बाद एक बार फिर रास्ते की मांग उठी थी और वो रास्ता अब बन गया है।
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