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एसए जैन जमीन प्रकरण : आयुक्त के पास अटकी फाइल, कार्रवाई का इंतजार
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अंबाला सिटी। एसए जैन जमीन प्रकरण में संयुक्त आयुक्त की जांच रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त के पास कई दिन पहले पहुंच चुकी है। अभी तक इस मामले में कार्रवाई नहीं लिया गया है। अब यह फाइल आयुक्त के टेबल पर ही पड़ी है। वहीं, इस मामले की जांच संयुक्त आयुक्त अदिति कर रहे थे। उन्होंने जांच के बाद रिपोर्ट आयुक्त को सौंपी थी। नगर निगम आयुक्त वीरेंद्र लाठर कह चुके हैं कि स्कूल की जमीन से जुड़े प्रॉपर्टी आईडी मामले में जांच की जा रही है।
एसए जैन स्कूल की करीब 6600 गज जमीन की नियमों को ताक पर रखकर बिक्री करने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में दो शिकायतें नगर निगम मेयर की ओर से भी की गई। जिसमें संपत्ति आईडी बनाने पर सवाल उठाया। इसी की मेयर जांच करा रही हैं। इस संबंध में निगम आयुक्त से फोन पर संपर्क किया गया मगर संपर्क नहीं हो सका।
तहसीलदार से भी रजिस्ट्री की जांच करवाई गई
निगम की ओर से तहसीलदार से भी रजिस्ट्री की जांच करवाई गई है। जांच में प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए लगाई गई रजिस्ट्री ठीक पाई गई थी, लेकिन तहसीलदार की ओर से खसरा नंबर लोकेशन नहीं बताई गई है। निगम की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि तीन से चार प्रॉपर्टी आईडी बनाने में नियमों का उल्लंघन किया गया है। वहीं, इस मामले को लेकर नगर निगम ने तीन कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस जारी किए थे। नोटिस के बाद कर्मचारियों ने अपना जवाब निगम अधिकारियों को दिया था। इसके बाद मामले में निगम संयुक्त आयुक्त जांच कर रहे थे।
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एसए जैन स्कूल की करीब 6600 गज जमीन की नियमों को ताक पर रखकर बिक्री करने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में दो शिकायतें नगर निगम मेयर की ओर से भी की गई। जिसमें संपत्ति आईडी बनाने पर सवाल उठाया। इसी की मेयर जांच करा रही हैं। इस संबंध में निगम आयुक्त से फोन पर संपर्क किया गया मगर संपर्क नहीं हो सका।
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तहसीलदार से भी रजिस्ट्री की जांच करवाई गई
निगम की ओर से तहसीलदार से भी रजिस्ट्री की जांच करवाई गई है। जांच में प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए लगाई गई रजिस्ट्री ठीक पाई गई थी, लेकिन तहसीलदार की ओर से खसरा नंबर लोकेशन नहीं बताई गई है। निगम की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि तीन से चार प्रॉपर्टी आईडी बनाने में नियमों का उल्लंघन किया गया है। वहीं, इस मामले को लेकर नगर निगम ने तीन कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस जारी किए थे। नोटिस के बाद कर्मचारियों ने अपना जवाब निगम अधिकारियों को दिया था। इसके बाद मामले में निगम संयुक्त आयुक्त जांच कर रहे थे।
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