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पिट रहे बेटे को छुड़वाने आई मां को भी पीटा, रेफर करने के बाद नहीं मिली एंबुलेंस
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रेहड़ी लगाकर कपड़े बेचने वाले सुशील कुमार की कुछ युवकों ने पिटाई कर दी। इसके साथ ही बीच बचाव करने आई उनकी मां भजन कौर को भी हमलावरों ने नहीं बक्शा। इस बीच उनके कपड़े भी फाड़ दिए। घायल अवस्था में वह शहजादपुर अस्पताल पहुंचे तो उन्हें वहां भी सरकारी अमले की बेरुखी का सामना करना पड़ा। जहां से उन्हें शहर के नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन एंबुलेंस न मिलने के कारण वह रात भर वहीं अस्पताल रुके रहे। वे सुबह ऑटो में रुपये खर्च कर शहर के नागरिक अस्पताल पहुंचे, जहां उनका इलाज चल रहा है।
कपड़ों की रेहड़ी लगाता है सुशील
गांव परैल निवासी 34 वर्षीय सुशील कुमार ने बताया कि वह कपड़ों की रेहड़ी लगाता है। वह सोमवार शाम को काम निपटा कर घर की ओर जा रहा था। गांव के ही मोड़ पर पीछे से बाइक पर आ रहे लड़कों ने होर्न बजाया। जैसे ही वह अपनी रेहड़ी साइड में करने लगा तो युवकों ने बाइक रोकी और पास ही पड़े सरिये से उसे मारना शुरू कर दिया। इसी बीच पास ही मनरेगा के तहत काम कर रही उनकी मां भजन कौर ने जब उनकी आवाज सुनी तो वह भी बाकी लोगों के साथ वहां आ गई और बचाने का प्रयास करने लगी। हमलावरों ने उनकी मां को भी मारना शुरू कर दिया और उनके कपड़े फाड़ दिए। बाद में उनका बड़ा भाई कुलविंद्र सिंह आया तो वह किसी तरह हमें शहजादपुर के स्वास्थ्य केंद्र में लेकर गया। जहां से पहले तो उन्हें पुलिस स्टेशन जाने के लिए कह दिया गया। लेकिन जब वह नहीं गए तो उन्हें शहर नागरिक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। रेफर होने के लिए उन्हें एंबुलेंस मांगी तो स्टाफ ने एंबुलेंस न होने की बात कही।
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कपड़ों की रेहड़ी लगाता है सुशील
गांव परैल निवासी 34 वर्षीय सुशील कुमार ने बताया कि वह कपड़ों की रेहड़ी लगाता है। वह सोमवार शाम को काम निपटा कर घर की ओर जा रहा था। गांव के ही मोड़ पर पीछे से बाइक पर आ रहे लड़कों ने होर्न बजाया। जैसे ही वह अपनी रेहड़ी साइड में करने लगा तो युवकों ने बाइक रोकी और पास ही पड़े सरिये से उसे मारना शुरू कर दिया। इसी बीच पास ही मनरेगा के तहत काम कर रही उनकी मां भजन कौर ने जब उनकी आवाज सुनी तो वह भी बाकी लोगों के साथ वहां आ गई और बचाने का प्रयास करने लगी। हमलावरों ने उनकी मां को भी मारना शुरू कर दिया और उनके कपड़े फाड़ दिए। बाद में उनका बड़ा भाई कुलविंद्र सिंह आया तो वह किसी तरह हमें शहजादपुर के स्वास्थ्य केंद्र में लेकर गया। जहां से पहले तो उन्हें पुलिस स्टेशन जाने के लिए कह दिया गया। लेकिन जब वह नहीं गए तो उन्हें शहर नागरिक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। रेफर होने के लिए उन्हें एंबुलेंस मांगी तो स्टाफ ने एंबुलेंस न होने की बात कही।
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